9 Jaguar से IAF की 'शमशेर' नई ताकत, ब्रिटेन के रिटायर्ड फाइटर जेट का भारत क्यों 'दीवाना'? इनसाइड स्टोरी
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के 'शमशेर' कहे जाने वाले जगुआर फाइटर जेट्स को लेकर बड़ा अपडेट है। भारत ने यूके से नौ रिटायर कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदे हैं। यूके के रॉयल एयर फोर्स ने SEPECAT जगुआर अटैक जेट्स को करीब दो दशक पहले ही रिटायर कर दिया था। हालांकि, ब्रिटेन का रक्षा मंत्रालय अभी भी ऐसे 42 जेट्स अपने पास रखे हुए है। वहीं भारत को जगुआर के पुराने हो रहे कॉम्बैट फ्लीट (लड़ाकू विमानों के बेड़े) को चालू रखने के लिए इन जेट्स की जरूरत थी। इसी मकसद से यूके ने 9 रिटायर जगुआर विमान भारत भेज दिए हैं।

जगुआर फाइटर्स के लिए बड़ा फैसला
ये फैसला पुराने हो रहे जगुआर स्क्वाड्रन की ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखने के लिए सरकार ने लिया, यूके से 9 जेट्स भारत भेजे जा चुके हैं। इसका खुलासा ब्रिटेन के मंत्री ल्यूक पोलार्ड की हाल ही में वहां की संसद में दिए गए एक लिखित जवाब से हुआ। उन्होंने कंजर्वेटिव सांसद बेन ओबेसे-जेक्टी के एक सवाल का जवाब दिया था, जिसमें पूछा गया था कि विभाग के पास अभी भी कितने GR1 और T2 वैरिएंट वाले जगुआर विमान मौजूद हैं। जगुआर विमान का निर्माण शीत युद्ध के दौरान असाधारण सहयोग का नतीजा था। इसे ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर SEPECAT नाम के एक जॉइंट वेंचर के तहत विकसित किया था।
इसलिए IAF के लिए अहम हैं ये फाइटर्स
भारत के लिए भी जगुआर फाइटर जेट्स बेहद अहम हैं। सूत्रों के मुताबिक, रॉयल एयर फोर्स के नौ ट्विन-इंजन वाले रिटायर जगुआर एयरक्राफ्ट खरीदे गए हैं। भारत आने पर इन्हें खोलकर इनके पार्ट्स का इस्तेमाल इंडियन एयरफोर्स के जगुआर स्क्वाड्रन में स्पेयर पार्ट्स के तौर पर किया जाएगा। भारत इन रिटायर हो चुके एयरक्राफ्ट के सब-असेंबली जैसे एडोर इंजन, एवियोनिक्स, लैंडिंग गियर और हाइड्रोलिक्स का इस्तेमाल अपने छह जगुआर स्क्वाड्रन के लिए करेगा, ताकि उन्हें कुछ और सालों तक उड़ाया जा सके।
जगुआर फाइटर्स के लिए बड़ा फैसला
ये फैसला पुराने हो रहे जगुआर स्क्वाड्रन की ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखने के लिए सरकार ने लिया, यूके से 9 जेट्स भारत भेजे जा चुके हैं। इसका खुलासा ब्रिटेन के मंत्री ल्यूक पोलार्ड की हाल ही में वहां की संसद में दिए गए एक लिखित जवाब से हुआ। उन्होंने कंजर्वेटिव सांसद बेन ओबेसे-जेक्टी के एक सवाल का जवाब दिया था, जिसमें पूछा गया था कि विभाग के पास अभी भी कितने GR1 और T2 वैरिएंट वाले जगुआर विमान मौजूद हैं। जगुआर विमान का निर्माण शीत युद्ध के दौरान असाधारण सहयोग का नतीजा था। इसे ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर SEPECAT नाम के एक जॉइंट वेंचर के तहत विकसित किया था।
इसलिए IAF के लिए अहम हैं ये फाइटर्स
भारत के लिए भी जगुआर फाइटर जेट्स बेहद अहम हैं। सूत्रों के मुताबिक, रॉयल एयर फोर्स के नौ ट्विन-इंजन वाले रिटायर जगुआर एयरक्राफ्ट खरीदे गए हैं। भारत आने पर इन्हें खोलकर इनके पार्ट्स का इस्तेमाल इंडियन एयरफोर्स के जगुआर स्क्वाड्रन में स्पेयर पार्ट्स के तौर पर किया जाएगा। भारत इन रिटायर हो चुके एयरक्राफ्ट के सब-असेंबली जैसे एडोर इंजन, एवियोनिक्स, लैंडिंग गियर और हाइड्रोलिक्स का इस्तेमाल अपने छह जगुआर स्क्वाड्रन के लिए करेगा, ताकि उन्हें कुछ और सालों तक उड़ाया जा सके।
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