लोकेशन ट्रैकिंग, फोन में मालवेयर... 'हनी ट्रैप' में फंसे विंग कमांडर तक कैसे पहुंची दिल्ली पुलिस

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और भारतीय वायु सेना (IAF) की काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट ने एक संयुक्त चार महीने लंबे गुप्त ऑपरेशन के बाद 44 वर्षीय विंग कमांडर को गिरफ्तार किया है। अधिकारी पर आरोप है कि सोशल मीडिया पर 'हनी ट्रैप' का शिकार होने के बाद आरोपी ने सीमा पर सैनिकों की तैनाती और गोपनीय सैन्य दस्तावेजों से जुड़ी संवेदनशील रणनीतिक जानकारी दुश्मन देश को भेजी थी। इस बीच जांच में कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं कि आरोपी कैसे दुशमन देश को जानकारी भेजता था।
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जांच में हुआ बड़ा खुलासाजांच में खुलासा हुआ है कि हैंडलर ने अधिकारी को उसके एक साथी (सहकर्मी) के मोबाइल फोन में एक खतरनाक (मैलेशियस) ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा था। यह सॉफ्टवेयर एक गुप्त रिमोट-एक्सेस मालवेयर की तरह काम करता था, जिससे उस डिवाइस की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक करने, कॉल-मैसेज इंटरसेप्ट करने और फोन का सारा डेटा चुराने की साजिश रची गई थी।

कैसे हुआ भंडाफोड़इस जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश जनवरी में तब शुरू हुआ जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक पाकिस्तानी इंटेलिजेंस नंबर की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के दौरान पाया कि उस नंबर की एक भारतीय नंबर से लगातार एन्क्रिप्टेड बातचीत हो रही है। कॉलर की पहचान IAF के एक्टिव विंग कमांडर के रूप में होते ही वायु सेना की काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट ने अधिकारी पर कड़ी फिजिकल और डिजिटल निगरानी बैठा दी।

आरोपी के खिलाफ OSA के तहत मामला दर्जसबूत मिलने के बाद IAF ने 30 मई को औपचारिक शिकायत के साथ अधिकारी को स्पेशल सेल के हवाले कर दिया। आरोपी अधिकारी पर 'ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट' (OSA) के तहत मामला दर्ज कर तिहाड़ जेल भेजा गया है और 30 जुलाई को अदालत में एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।