Nandan Nilekani: कांग्रेस के टिकट पर लड़ चुके हैं चुनाव, फिर भी पीएम मोदी ने नंदन नीलेकणि पर क्यों लगाया दांव, 5 फैक्ट्स
नई दिल्ली: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षाओं में अनिमितताओं पर व्यापक स्तर पर सुझाव देने के लिए एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया है, जिसकी कमान टेक्नोलॉजी सेक्टर के जाने-माने दिग्गज नंदन नीलेकणि को सौंपी है। नीलेकणि एक बार मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। फिर पीएम मोदी ने उन्हें क्या सोचकर इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है?

कांग्रेस से लड़ चुके हैं चुनाव
आधार मैन के रूप में पहचान
यूपीआई के विकास में बड़ी भूमिका
सुप्रीम कोर्ट एआई कमेटी में रोल
पीएम मोदी ने टास्क फोर्स के लिए क्यों चुना
कांग्रेस से लड़ चुके हैं चुनाव
- नंदन नीलेकणि को दुनिया एक दिग्गज टेक्नोक्रैट के रूप में जानती है, लेकिन उन्होंने कुछ समय के लिए राजनीति में भी हाथ आजमाया है।
- 2014 के लोकसभा चुनाव में नंदन नीलेकणि बैंगलोर साउथ सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार थे।
- लेकिन, यहां उन्हें बीजेपी के दिग्गज दिवंगत नेता अनंत कुमार से करारी हार का सामना करना पड़ा था।
आधार मैन के रूप में पहचान
- भारत में नंदन नीलेकणि की इतनी बड़ी पहचान 'आधार'की वजह से मिली है।
- 2009 में वे इंफोसिस से अलग होकर यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के चेयरमैन बनाए गए और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था।
- अपने इस रोल में उन्होंने न केवल 'आधार' की रूपरेखा तैयार की, बल्कि उसे लागू भी किया, जिससे 100 से ज्यादा लोगों को डिजिटल पहचान मिली।
यूपीआई के विकास में बड़ी भूमिका
- नंदन नीलेकणि मोदी सरकार की नीतियों से भी जुड़े रहे हैं।
- वह उस फ्रेमवर्क में मुख्य भूमिका निभा चुके हैं, जिससे देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) विकसित हुआ।
- यूपीआई ने भारत को डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में दुनिया में गेमचेंजर बनाया।
- यूपीआई आज की तारीख देश का सबसे सफल टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट बन चुका है और दुनिया के कम से कम 9 देशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है।
- यूपीआई ने अमेरिका के मास्टरकार्ड और वीजा के रुतबे को भी पूरी तरह से फीका कर दिया है।
- 2019 में नीलेकणि ने रिजर्व बैंक की उस कमेटी की भी अगुवाई की, जिसने देश के चप्पे-चप्पे में डिजिटल पेमेंट को और भी सुलभ बनाने में मदद की।
- जनवरी 2023 में नंदन नीलेकणि जी20 के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर इकोनॉमिक ट्रांसफॉर्मेशन, फाइनेंसियल इंक्लूजन एंड डेवलपमेंट टास्क फोर्स के भी को-चेयर बनाए गए।
सुप्रीम कोर्ट एआई कमेटी में रोल
- पिछले ही साल यानी 2025 में नंदन नीलेकणि को सुप्रीम कोर्ट की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कमेटी में एक एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त हुए थे।
- न्यायपालिका में एआई के इस्तेमाल में मदद के लिए यह कमेटी गठित की गई थी।
- इसके अलावा वे भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए एनर्जी स्टैक टास्क फोर्स के चीफ मेंटर भी बनाए गए।
पीएम मोदी ने टास्क फोर्स के लिए क्यों चुना
- पीएम मोदी ने यह हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन प्रतियोगी परीक्षा में गड़बड़ी के बीच शिक्षा में सुधार के लिए व्यापक सुझाव देने के लिए किया है।
- नंदन नीलेकणि का इस तरह के पैनल से भी पुराना नाता रहा है।
- स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC) की परीक्षा में अनियमितताओं की जांच के लिए 2018-19 में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस जीएस सिंघवी की अगुवाई में सात-सदस्यीय समिति बनाई थी, नंदन नीलेकणि उसमें भी शामिल थे।
- पीएम मोदी को उम्मीद है कि अगर नंदन नीलेकणि इस हाई पावर्ड टास्क फोर्स की अगुवाई करेंगे तो छात्रों में परीक्षाओं को लेकर भरोसा बहाल करने में मदद मिलेगी।
- इंफोसिस के को-फाउंडर को पता है कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में टेक्नोलॉजी को कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
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