सुप्रीम कोर्ट में 3 नए जजों ने ली शपथ, सुनीता अग्रवाल बनीं 13वीं महिला जस्टिस, 37 हुई न्यायाधीशों संख्या
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को तीन नए जजों ने शपथ ली। इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी अदालत में जजों की कार्यरत संख्या 37 हो गई, बता दें कि SC में स्वीकृत क्षमता 38 जजों की है। यानी अब सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ एक पद खाली है। जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने CJI सूर्यकांत के सामने पद की शपथ ली। तीनों ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली।

इन तीन नियुक्तियों की खास बात यह भी है कि तीनों जज सुप्रीम कोर्ट आने से पहले अलग-अलग हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे। जस्टिस सुनीता अग्रवाल गुजरात हाई कोर्ट, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाई कोर्ट और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर को इनके नामों की सिफारिश की थी, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अक्टूबर को मंजूरी दे दी थी।
पहली बार दोपहर में हुआ शपथ समारोह
तीनों का लंबा न्यायिक अनुभवजस्टिस अग्रवाल को 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट का जज बनाया गया था। 2023 में वह गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस बनीं। जस्टिस उपाध्याय भी इलाहाबाद हाई कोर्ट से आए हैं। वह 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने और जनवरी 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त हुए।
जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को 2012 में झारखंड हाई कोर्ट का जज बनाया गया था। वह त्रिपुरा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे और जुलाई 2025 में तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। अब तीनों सुप्रीम कोर्ट की पीठों में मामलों की सुनवाई करेंगे।
जजों की संख्या बढ़ाने के बाद भरे गए पदसुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या इसी साल बढ़ाई गई है। मई 2026 में अध्यादेश के जरिए जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई, यानी CJI को मिलाकर कुल स्वीकृत संख्या 38 हुई। इसके बाद संसद ने सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाला संशोधन विधेयक पारित किया।
95 हजार से ज्यादा मामले लंबितजजों की संख्या बढ़ाने के पीछे सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ भी अहम वजह है। मंगलवार तक शीर्ष अदालत में करीब 95,481 मामले लंबित थे। नए जजों के आने से मामलों की सुनवाई और निपटारे की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
1950 में सिर्फ 8 जज थेसुप्रीम कोर्ट ने 1950 में 8 जजों की स्वीकृत संख्या के साथ काम शुरू किया था। इसके बाद यह संख्या 1956 में 11, 1960 में 14, 1978 में 18, 1986 में 26 और 2009 में 31 हुई। 2019 में इसे 34 और 2026 में 38 किया गया।
इन तीन नियुक्तियों की खास बात यह भी है कि तीनों जज सुप्रीम कोर्ट आने से पहले अलग-अलग हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे। जस्टिस सुनीता अग्रवाल गुजरात हाई कोर्ट, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाई कोर्ट और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर को इनके नामों की सिफारिश की थी, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अक्टूबर को मंजूरी दे दी थी।
पहली बार दोपहर में हुआ शपथ समारोह
- इस बार शपथ समारोह भी खास रहा।
- सुप्रीम कोर्ट में आम तौर पर नए जजों को सुबह करीब 10:30 बजे शपथ दिलाई जाती है।
- मंगलवार को तीनों जजों का शपथ समारोह दोपहर 3:30 बजे रखा गया।
- उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 1950 में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के बाद यह पहली बार था जब नए जजों का शपथ समारोह दोपहर में हुआ।
तीनों का लंबा न्यायिक अनुभवजस्टिस अग्रवाल को 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट का जज बनाया गया था। 2023 में वह गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस बनीं। जस्टिस उपाध्याय भी इलाहाबाद हाई कोर्ट से आए हैं। वह 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने और जनवरी 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त हुए।
जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को 2012 में झारखंड हाई कोर्ट का जज बनाया गया था। वह त्रिपुरा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे और जुलाई 2025 में तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। अब तीनों सुप्रीम कोर्ट की पीठों में मामलों की सुनवाई करेंगे।
जजों की संख्या बढ़ाने के बाद भरे गए पदसुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या इसी साल बढ़ाई गई है। मई 2026 में अध्यादेश के जरिए जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई, यानी CJI को मिलाकर कुल स्वीकृत संख्या 38 हुई। इसके बाद संसद ने सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाला संशोधन विधेयक पारित किया।
95 हजार से ज्यादा मामले लंबितजजों की संख्या बढ़ाने के पीछे सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ भी अहम वजह है। मंगलवार तक शीर्ष अदालत में करीब 95,481 मामले लंबित थे। नए जजों के आने से मामलों की सुनवाई और निपटारे की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
1950 में सिर्फ 8 जज थेसुप्रीम कोर्ट ने 1950 में 8 जजों की स्वीकृत संख्या के साथ काम शुरू किया था। इसके बाद यह संख्या 1956 में 11, 1960 में 14, 1978 में 18, 1986 में 26 और 2009 में 31 हुई। 2019 में इसे 34 और 2026 में 38 किया गया।
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