मुस्लिम आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची थलपति विजय सरकार, तमिलनाडु ने मद्रास HC के फैसले को दी चुनौती
नई दिल्ली: इस्लाम धर्म अपनाने वालों को आरक्षित वर्ग के तहत प्राप्त आरक्षण के लाभ को खत्म करने के मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु की थलपति सी जोसेफ विजय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।
मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया था कि इस्लाम धर्म अपना लेने वाला व्यक्ति पिछड़े वर्ग के तहत मिलने वाले आरक्षण के लाभ का हकदार नहीं है। मद्रास हाई कोर्ट ने इसको लेकर तमिलनाडु सरकार के 2024 के आदेश को ही असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

हाई कोर्ट ने मुस्लिम आरक्षण को असंवैधानिक बताया था
मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया था कि इस्लाम धर्म अपना लेने वाला व्यक्ति पिछड़े वर्ग के तहत मिलने वाले आरक्षण के लाभ का हकदार नहीं है। मद्रास हाई कोर्ट ने इसको लेकर तमिलनाडु सरकार के 2024 के आदेश को ही असंवैधानिक घोषित कर दिया था।
हाई कोर्ट ने मुस्लिम आरक्षण को असंवैधानिक बताया था
- गो-हत्या पर रोक हटाने की मांग के बाद तमिलनाडु की नई नवेली टीवीके सरकार ने मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है।
- लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में तमिलनाडु सरकार ने पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, अधिसूचित समुदाय या अनुसूचित जाति से इस्लाम धर्म अपनाने वाले लोगों को पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) मानने का आदेश जारी किया था।
- यही नहीं, तत्कालीन एमके स्टालिन सरकार ने कम्युनिटी सर्टिफिकेट भी जारी करना शुरू किया था।
- जिन मुस्लिम जातियों को यह आरक्षण दिया जा रहा था उनमें- अंसार, दक्कनी मुस्लिम, दुबेकुला, लब्बाइस, रोवथर, मराकायार, मपिल्ला, शेख और सैयद शामिल हैं।
- लेकिन, मद्रास हाई कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया था।
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