जिन गांव वालों के उजाड़े थे घर, अब उन्हीं ने अपनाने से किया इनकार; सरेंडर कर चुके नक्सलियों के सामने नई चुनौती

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नई दिल्ली: हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में वापस लौटे ऐसे कुछ हथियारबंद नक्सलियों के सामने एक बड़ी समस्या आ रही है। जिन्होंने दहशत के दिनों में अपने ही गांव वालों का खून बहाया था। अब आत्मसमर्पण कर चुके यह नक्सली जब अपने गांवों में जा रहे हैं तो गांववाले इनकी खुली मुखालफत करते हुए इन्हें अपनाने से इंकार कर रहे हैं। गांव वालों का तर्क है कि खून-खराबे के दौर में जब इन्होंने जिसे चाहा उसे पुलिस का मुखबिर बताकर कितने ही घरों को उजाड़ दिया तो अब इन पर कैसे भरोसा किया जा सकता है?
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मामले में छत्तीसगढ़ सुकमा जिले के एसपी मयंक गुर्जर ने भी एनबीटी को बताया कि सरेंडर किए हुए कुछ नक्सलियों के सामने इस तरह की समस्या आई हैं। जिन्हें गांव वालों से बातचीत करके दूर किया जा रहा है


प्रशासन कर रहा मददपुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों का कहना है कि अब वह किसी भी सूरत में हथियार नहीं उठाएंगे, बस उन्हें उनके गांव में भी जगह मिल जाए तो अच्छा हो जाएगा। इसके लिए पुलिस-प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है कि सरेंडर कर चुके नक्सलियों को अब कोई समस्या ना आने पाए। पुलिस प्रशासन इनके रोजगार के लिए भी लगातार काम कर रहा है। ताकि इनके सामने रोजी-रोटी का भी संकट पैदा ना होने पाए।

झारखंड में बचे सिर्फ दो नक्सलियों के ग्रुपपुलिस अधिकारियों का कहना है कि यूं तो देश में जितने भी राज्यों में हथियारबंद नक्सली थे। उनमें से कुछ मारे गए तो अधिकतर ने सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। लेकिन झारखंड में अभी भी 20-25 नक्सलियों के एक-दो ग्रुप अभी बचे हुए हैं। जिनसे संपर्क साधकर पहले यही कोशिश की जा रही है कि वह सरकार के सामने हथियार डाल दें। नहीं तो उन्होंने अगर पुलिस फोर्स का सामना करते हुए उनके उपर गोलियां चलाई तो एनकाउंटर में उन्हें भी बड़ी हानि हो सकती है


पुलिस लगातार कोशिश कर रही है कि झारखंड में बचे यह कुछ नक्सली और जल्दी से जल्दी सरेंडर कर दें। बाकी देश से हथियारबंद नक्सली खत्म हो चुके हैं।