ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नियमों में बड़ा बदलाव, नाबालिगों को गलती पड़ सकती है बहुत भारी
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में भारत सरकार ने क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। अगर आप भी बार-बार आरटीओ (RTO) के चक्कर काटकर थक चुके हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। अब आपको ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए सरकारी दफ्तर की लंबी कतारों में लगने की जरूरत नहीं होगी। नए नियमों के अनुसार, अब मान्यता प्राप्त निजी ड्राइविंग स्कूल भी ड्राइविंग टेस्ट ले सकेंगे और वहां से मिला सर्टिफिकेट लाइसेंस बनवाने के लिए पर्याप्त होगा।
क्या हैं नए नियम और कैसे बदल जाएगी आपकी जिंदगी?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सरल और डिजिटल बना दिया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब आरटीओ में होने वाली भीड़भाड़ और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
निजी ड्राइविंग स्कूलों को मिली शक्ति: अब आपको आरटीओ जाकर वहां के अधिकारी के सामने गाड़ी चलाकर दिखाने की अनिवार्यता नहीं है। आप किसी भी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त निजी ड्राइविंग सेंटर में जाकर ट्रेनिंग ले सकते हैं और वहीं अपना टेस्ट पूरा कर सकते हैं। वहां से मिलने वाले पासिंग सर्टिफिकेट को जब आप ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करेंगे, तो आपका लाइसेंस सीधे आपके घर के पते पर भेज दिया जाएगा।
ट्रेनिंग की अवधि: नए नियमों के तहत ट्रेनिंग का समय भी निर्धारित किया गया है। हल्के वाहनों (जैसे कार या बाइक) के लिए 4 हफ्तों में कुल 29 घंटे की ट्रेनिंग जरूरी होगी। इसमें 21 घंटे व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) और 8 घंटे सैद्धांतिक (थ्योरी) ज्ञान दिया जाएगा। वहीं भारी वाहनों के लिए 6 हफ्तों में 38 घंटे की ट्रेनिंग अनिवार्य है।
नाबालिगों के लिए सख्त चेतावनी: जहां एक ओर प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, वहीं सुरक्षा नियमों को और भी कड़ा कर दिया गया है। अगर कोई नाबालिग (18 साल से कम उम्र) गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर 25,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है और उस किशोर को 25 साल की उम्र तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।
कागजी कार्रवाई हुई कम: अब लाइसेंस के लिए लगने वाले दस्तावेजों की संख्या भी कम कर दी गई है। आधार कार्ड के जरिए वेरिफिकेशन की सुविधा ने पूरी प्रक्रिया को 'फेसलेस' बनाने की ओर कदम बढ़ाया है।
पर्यावरण का भी रखा गया है ख्याल
इन नए नियमों में केवल लाइसेंस की ही बात नहीं है, बल्कि प्रदूषण कम करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार करीब 9 लाख पुराने सरकारी वाहनों को सड़कों से हटाने की योजना पर काम कर रही है ताकि पर्यावरण को स्वच्छ रखा जा सके।
इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाना है। अब जिम्मेदारी ड्राइविंग स्कूलों की भी होगी कि वे बेहतर चालक तैयार करें, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आए। अगर आप भी नया लाइसेंस बनवाने की सोच रहे हैं, तो इन नए नियमों का लाभ उठाएं और जिम्मेदार नागरिक की तरह सड़क सुरक्षा का पालन करें।
क्या हैं नए नियम और कैसे बदल जाएगी आपकी जिंदगी?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सरल और डिजिटल बना दिया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब आरटीओ में होने वाली भीड़भाड़ और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।निजी ड्राइविंग स्कूलों को मिली शक्ति: अब आपको आरटीओ जाकर वहां के अधिकारी के सामने गाड़ी चलाकर दिखाने की अनिवार्यता नहीं है। आप किसी भी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त निजी ड्राइविंग सेंटर में जाकर ट्रेनिंग ले सकते हैं और वहीं अपना टेस्ट पूरा कर सकते हैं। वहां से मिलने वाले पासिंग सर्टिफिकेट को जब आप ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करेंगे, तो आपका लाइसेंस सीधे आपके घर के पते पर भेज दिया जाएगा।
ट्रेनिंग की अवधि: नए नियमों के तहत ट्रेनिंग का समय भी निर्धारित किया गया है। हल्के वाहनों (जैसे कार या बाइक) के लिए 4 हफ्तों में कुल 29 घंटे की ट्रेनिंग जरूरी होगी। इसमें 21 घंटे व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) और 8 घंटे सैद्धांतिक (थ्योरी) ज्ञान दिया जाएगा। वहीं भारी वाहनों के लिए 6 हफ्तों में 38 घंटे की ट्रेनिंग अनिवार्य है।
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नाबालिगों के लिए सख्त चेतावनी: जहां एक ओर प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, वहीं सुरक्षा नियमों को और भी कड़ा कर दिया गया है। अगर कोई नाबालिग (18 साल से कम उम्र) गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर 25,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है और उस किशोर को 25 साल की उम्र तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।
कागजी कार्रवाई हुई कम: अब लाइसेंस के लिए लगने वाले दस्तावेजों की संख्या भी कम कर दी गई है। आधार कार्ड के जरिए वेरिफिकेशन की सुविधा ने पूरी प्रक्रिया को 'फेसलेस' बनाने की ओर कदम बढ़ाया है।
पर्यावरण का भी रखा गया है ख्याल
इन नए नियमों में केवल लाइसेंस की ही बात नहीं है, बल्कि प्रदूषण कम करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार करीब 9 लाख पुराने सरकारी वाहनों को सड़कों से हटाने की योजना पर काम कर रही है ताकि पर्यावरण को स्वच्छ रखा जा सके।इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाना है। अब जिम्मेदारी ड्राइविंग स्कूलों की भी होगी कि वे बेहतर चालक तैयार करें, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आए। अगर आप भी नया लाइसेंस बनवाने की सोच रहे हैं, तो इन नए नियमों का लाभ उठाएं और जिम्मेदार नागरिक की तरह सड़क सुरक्षा का पालन करें।









