PF Contribution Rules: क्या कम हो जाएगी आपकी इन-हैंड सैलरी? नए लेबर कोड और पीएफ पर पूरी जानकारी

पिछले कुछ समय से नौकरीपेशा लोगों के बीच एक ही चर्चा सबसे ज्यादा है: "क्या नए लेबर कोड के बाद मेरी टेक-होम सैलरी कम हो जाएगी?" सरकार ने अब इस पर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड (Wage, Social Security, Industrial Relations, और Occupational Safety) तैयार किए गए हैं। इनका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है, लेकिन इसका सीधा असर हर महीने बैंक अकाउंट में आने वाली रकम पर पड़ने वाला है।
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सबसे बड़ा बदलाव: 50% बेसिक पे का नियम

नए लेबर कोड के तहत 'मजदूरी' (Wages) की परिभाषा बदल गई है। अब आपकी कुल सैलरी (CTC) में 'बेसिक पे' और 'महंगाई भत्ता' (DA) का हिस्सा कम से कम 50% होना अनिवार्य है।

पहले कंपनियां क्या करती थीं? वे बेसिक सैलरी को कम (लगभग 25-30%) रखती थीं और बाकी हिस्सा अलाउंस (HRA, ट्रैवल अलाउंस आदि) में बांट देती थीं। इससे कंपनी और कर्मचारी दोनों का पीएफ योगदान कम रहता था और हाथ में आने वाली सैलरी ज्यादा दिखती थी। अब नए नियम के अनुसार, अगर आपके अलाउंस 50% से ज्यादा हैं, तो अतिरिक्त राशि को बेसिक पे में जोड़ दिया जाएगा।


पीएफ और ग्रेच्युटी पर असर

चूंकि पीएफ (PF) की कटौती बेसिक सैलरी के आधार पर होती है, इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ने का मतलब है कि आपके पीएफ फंड में हर महीने जमा होने वाली रकम बढ़ जाएगी।

पॉजिटिव पक्ष: आपके रिटायरमेंट फंड (EPF) और ग्रेच्युटी की रकम में जबरदस्त इजाफा होगा। भविष्य के लिए आपकी बचत पहले के मुकाबले बहुत मजबूत हो जाएगी।