Income Tax Rule: किराए पर HRA क्लेम करने वाले सावधान, फर्जीवाड़े पर लगेगा 200% पेनल्टी का झटका
सुनने में यह तरीका बहुत आसान और फायदेमंद लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयकर विभाग की नजर इस पर बहुत टेढ़ी रहती है? अगर आपने नियमों का पालन नहीं किया, तो टैक्स बचाने की यह छोटी सी कोशिश आपको भारी मुसीबत में डाल सकती है। यहां तक कि आपको 200 प्रतिशत तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
क्या माता-पिता को किराया देना कानूनी है?
जी हां, कानून आपको अपने माता-पिता को किराया देने और उस पर टैक्स छूट पाने की इजाजत देता है। लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें हैं जिनका पूरा होना अनिवार्य है। सबसे पहली शर्त यह है कि वह घर आपके माता-पिता के नाम पर होना चाहिए। आप उस घर के मालिक या सह-मालिक नहीं होने चाहिए।
इसके अलावा, यह लेनदेन केवल कागजों पर नहीं होना चाहिए। आपको वास्तव में हर महीने उन्हें किराया देना होगा। आयकर विभाग अब इस मामले में काफी सख्त हो गया है और वह केवल रेंट रसीद देखकर संतुष्ट नहीं होता।
इन नियमों का पालन करना है जरूरी
अगर आप अपने परिवार के किसी सदस्य को किराया दे रहे हैं, तो इन बातों का खास ध्यान रखें:
- बैंक ट्रांजेक्शन का उपयोग करें: किराए का भुगतान हमेशा बैंक ट्रांसफर या चेक के जरिए करें। नकद भुगतान करने से बचें, क्योंकि विवाद की स्थिति में आपके पास भुगतान का कोई पुख्ता सबूत नहीं होगा।
- रेंट एग्रीमेंट: एक औपचारिक रेंट एग्रीमेंट जरूर बनवाएं। इसमें किराए की राशि, अवधि और अन्य शर्तें स्पष्ट होनी चाहिए।
- पैन कार्ड की जानकारी: यदि सालाना किराया 1 लाख रुपये से अधिक है, तो आपको अपने माता-पिता या जीवनसाथी का पैन कार्ड नंबर अपने नियोक्ता (Employer) को देना होगा।
- माता-पिता की आईटीआर: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो किराया आप दे रहे हैं, वह आपके माता-पिता की आय मानी जाएगी। उन्हें अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में इस किराए की आय को दिखाना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो आयकर विभाग इसे टैक्स चोरी मान सकता है।
जीवनसाथी को किराया देने में है जोखिम
हालांकि पति या पत्नी को किराया देने पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसे साबित करना बहुत मुश्किल होता है। आयकर विभाग का मानना है कि पति-पत्नी एक ही घर में साथ रहने के लिए बाध्य हैं, इसलिए उनके बीच किराए का रिश्ता थोड़ा असामान्य लगता है। कई अदालती फैसलों में इसे खारिज भी किया गया है। इसलिए, जीवनसाथी को किराया देकर टैक्स बचाने की कोशिश जोखिम भरी हो सकती है।
200 प्रतिशत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई
अगर आयकर विभाग को लगता है कि आपने केवल टैक्स बचाने के लिए फर्जी रेंट रसीदें लगाई हैं और वास्तव में कोई किराया नहीं दिया गया है, तो इसे 'आय छुपाना' माना जाता है। ऐसी स्थिति में, विभाग आपसे वह टैक्स तो वसूलेगा ही जो आपने बचाया है, साथ ही उस पर भारी ब्याज और टैक्स राशि का 200 प्रतिशत तक जुर्माना भी लगा सकता है।
टैक्स बचाना आपका अधिकार है, लेकिन इसके लिए गलत रास्तों का चुनाव करना आपके वित्तीय भविष्य को संकट में डाल सकता है। हमेशा ईमानदारी और सही दस्तावेजों के साथ ही अपनी टैक्स प्लानिंग करें।









