सुक्खू सरकार ने खोली नई भर्तियां, मेडिकल कॉलेजों में भरे जाएंगे कई पद- जल्द करें आवेदन
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा को और मजबूत व अच्छा बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने प्रदेश के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्रोफेसरों के पद भरने की मंजूरी दे दी है। मेडिकल कॉलेजों में भर्ती
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद इन पदों के सृजन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। सरकार का मानना है कि मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ शिक्षकों की संख्या बढ़ने से न केवल मेडिकल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि अस्पतालों में मरीजों को भी बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। यह कदम प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
पांच मेडिकल कॉलेजों को मिलेगा लाभनवसृजित पदों को प्रदेश के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वितरित किया गया है। इनमें मेडिकल कॉलेज टांडा, डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन, श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक (मंडी), मेडिकल कॉलेज चंबा तथा मेडिकल कॉलेज हमीरपुर शामिल हैं। इन संस्थानों में लंबे समय से विशेषज्ञ संकाय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। नए पदों के सृजन से शिक्षण और चिकित्सा सेवाओं दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
12 विशेषज्ञ विभागों में बढ़ेगा स्टाफसरकार ने विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं को ध्यान में रखते हुए कुल 12 विभागों में सहायक प्रोफेसरों के पद सृजित किए हैं। इन विभागों में मरीजों की बढ़ती संख्या और विशेषज्ञ डॉक्टरों की आवश्यकता को प्राथमिकता दी गई है।
किस विभाग के पदों पर भर्ती?सरकार द्वारा कुल 75 पदों को भरने की मंजूरी दी गई है। जिसमें-
- रेडियो-डायग्नोसिस विभाग- 13 पद
- स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग- 9 पद
- बाल रोग विभाग- 8 पद
- सामान्य चिकित्सा (जनरल मेडिसन)- 6 पद
- सामान्य सर्जरी- 5 पद
- पल्मोनरी मेडिसिन- 5 पद
- कार्डियोलॉजी- 5 पद
- माइक्रोबायोलॉजी- 5 पद
- मनोरोग- 5 पद
- ENT- 5 पद
पैथोलॉजी- 5 पद - बायोकेमिस्ट्री विभाग- 4 पद
चिकित्सा शिक्षा में इन विषयों का विशेष महत्व है और इनके मजबूत होने से मेडिकल छात्रों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिल सकेगा। वहीं, सरकार के इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मेडिकल कॉलेज नाहन और चंबा में कार्डियोलॉजी विभाग स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत दोनों संस्थानों में कार्डियोलॉजी के सहायक प्रोफेसर (सुपर स्पेशियलिटी) के पद भी सृजित किए गए हैं।
हृदय रोगों के मामलों में लगातार वृद्धि को देखते हुए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। अब भविष्य में इन क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ हृदय रोग सेवाओं के लिए बड़े शहरों का रुख कम करना पड़ सकता है।
दूरदराज क्षेत्रों को मिलेगा फायदाहिमाचल प्रदेश का भौगोलिक स्वरूप चुनौतीपूर्ण है और कई क्षेत्र अब भी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। नए पदों के सृजन से विशेषज्ञ डॉक्टरों और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को मिलेगा। विशेषज्ञ संकाय की नियुक्ति से मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में उपचार सुविधाएं भी बेहतर होंगी। इससे मरीजों को जांच, परामर्श और इलाज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।