DNA टेस्ट में पिता नहीं निकले, तो नहीं देना होगा बच्चे को गुजारा' सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला'

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सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय का कहना है कि अगर DNA टेस्ट से साबित हो जाता है कि शख्स बच्चे का बायोलॉजिकल पिता नहीं है, तो उसे गुजारा देने के निर्देश नहीं दिए जा सकते।

कोर्ट ने कहा कि फिर भले ही बच्चे का जन्म शादी के दौरान ही क्यों न हुआ हो। इसके साथ ही अदालत ने महिला की तरफ से दाखिल अपील को खारिज कर दिया।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच महिला की अपील पर सुनवाई कर रही थी। महिला ने बेटी को गुजारा देने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। इस दौरान अदालत ने इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 (भारतीय साक्ष्य अधिनियम में धारा 116) और पिता का पता करने लिए होने वाली आधुनिक जांचों के बीच संबंध पर चर्चा की गई।

इन फैसलों का किया जिक्र

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अदालत ने अपर्णा अजिंक्य फिरोदिया बनाम अजिंक्य अरुण फिरोदिया के 2023 फैसले का जिक्र किया। इसमें अदालत ने कहा था कि DNA जांच के रूटीन तौर पर आदेश नहीं दिए जाने चाहिए। साथ ही 2025 के इवान रतिनम बनाम मिलान जोसेफ का भी जिक्र किया था। खास बात है कि मौजूदा बेंच का भी मानना था कि DNA जांच के आदेश सतर्कता के साथ ही दिए जाने चाहिए।

बेंच ने कहा, 'इन सभी पुराने फैसलों में एक बात समान रही है कि जजों ने हमेशा DNA टेस्ट का आदेश देने या उसे मंजूरी देने में सावधानी और हिचकिचाहट दिखाई है। हम इस रुख से पूरी तरह सहमत हैं।' हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि हालात बदलते हैं और डीएनए टेस्ट पहले ही हो चुका है और रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। ऐसे में बेंच ने कहा कि मौजूदा केस पिछले मामलों से अलग है।

सुप्रीम कोर्ट का तर्क