ब्लड शुगर पर पानी का असर' जानिए कब और कितना पीना सुरक्षित...
आमतौर पर पानी को केवल प्यास बुझाने या शरीर को हाइड्रेट रखने से जोड़कर देखा जाता है, जबकि इसका सीधा असर ब्लड सर्कुलेशन, मेटाबॉलिज्म और ग्लूकोज लेवल पर भी पड़ता है। विशेषकर डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए पानी पीने का तरीका और समय उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना खानपान और दवाइयों का पालन करना।
हाल ही में इंस्टाग्राम पर क्लीनिकल न्यूट्रीकेयर से जुड़े एक वीडियो में इस बात को विस्तार से समझाया गया है कि कैसे पानी की कमी या गलत समय पर पानी पीने से ब्लड शुगर असंतुलित हो सकता है।
ज्यादा कॉर्टिसोल होने पर कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सही तरीके से प्रतिक्रिया नहीं कर पातीं, जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है।
इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति अगर संतुलित और हेल्दी भोजन भी कर रहा हो, तब भी उसका ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं आ पाता। सिर्फ पानी की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसका समय भी ब्लड शुगर को प्रभावित करता है। कई लोग भारी या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन के तुरंत बाद खूब सारा पानी पी लेते हैं। इससे पेट में मौजूद एसिड का स्तर कम हो जाता है और पाचन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। जब डाइजेशन ठीक से नहीं होता, तो ग्लूकोज का सही तरीके से ब्रेकडाउन और अवशोषण नहीं हो पाता।ऐसी स्थिति में शुगर तुरंत नहीं बढ़ती, लेकिन कुछ समय बाद अचानक स्पाइक देखने को मिलता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।पानी हमेशा रूम टेंपरेचर या हल्का गुनगुना होना बेहतर रहता है, क्योंकि बहुत ठंडा पानी पाचन को प्रभावित कर सकता है।