हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है ये साइलेंट संकेत, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
वहां उनके हार्ट में स्टेंट डाला गया था।
दुनिया भर के आंकड़ों की मानें, तो दिल की बीमारी से हर साल लगभग 1.8 करोड़ लोगों की मौत होती है और हार्ट अटैक मौत का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है। मानव शरीर हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों संबंधी संकेत देता है, जिसे आम तौर पर इग्नोर कर दिया जाता है।
परेशान करने वाली बात यह है कि जिन लोगों को हार्ट अटैक आता है, उनमें से कई लोगों को लक्षण महसूस होते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में वे समय रहते इन लक्षणों को समझ नहीं पाए। हालांकि यह भी सच है कि हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है।
इन लक्षणों में छाती में हल्का दर्द महसूस होना, थकान, सांस लेने में तकलीफ होने जैसी चीजें हो सकती है, जिसे अकसर रोजाना की समस्या समझ कर टाल दिया जाता है। 40 साल की उम्र में, अचानक हार्ट अटैक आने से पहले कोई साफ चेतावनी वाले लक्षण नहीं दिखाई देते हैं।
दिल का दर्द या सिर्फ एसिडिटी?
शुरुआती लक्षणों में ज़्यादातर छाती में हल्का दर्द या दबाव, बहुत ज़्यादा थकान, सांस फूलना, अपच जैसी बेचैनी और जबड़े में दर्द और उसका गर्दन या पीठ तक फैलना शामिल हो सकता है। इमरजेंसी रूम में पहुँचने वाले कई मरीजों के अनुसार, उन्होंने थकान को नजरअंदाज किया या छाती की बेचैनी को गैस समझकर टाल दिया।
दिल से जुड़े छाती के दर्द में छाती में कसाव और भारीपन महसूस हो सकता है और यह अक्सर हाथ, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है। एसिडिटी आमतौर पर खाने के समय होती है और जलन पैदा करती है, लेकिन यह पाचन की दवाओं से ठीक हो जाती है।
क्या महिलाओं में लक्षण अलग होते हैं?
पुरुषों और महिलाओं में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। जहाँ पुरुषों में छाती का दर्द सबसे आम लक्षण होता है, वहीं महिलाओं में कोई साफ-साफ लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। महिलाओं में बहुत ज्यादा थकान, सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, जी मिचलाना और पीठ के ऊपरी हिस्से और जबड़े में दर्द। ये लक्षण अक्सर पहचान में नहीं आते। महिलाओं को बिना किसी वजह के यदि थकान और सांस लेने में तकलीफ होती है, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, फिर चाहे उन्हें छाती में तेज दर्द न हो।
क्या टेस्ट्स में भी छूट सकते हैं ये संकेत?
डॉक्टर मानते हैं कि कई बार ऐसा हो सकता है कि रूटीन टेस्ट के नतीजे नेगेटिव आएं। उदाहरण के लिए, ECG में दिल की धड़कन या रिदम में कोई समस्या न दिखे और ब्लड टेस्ट के नतीजे भी नॉर्मल हों। शुरुआती दौर में, रक्त वाहिकाओं की सतह पर छोटे ब्लॉकेज या अस्थिर प्लाक छिपे हुए जोखिम होते हैं, जो अचानक सामने आ सकते हैं और तुरंतहार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं, इसलिए शुरुआती जांच के नतीजों के बावजूद किसी भी लक्षण या चिंता को नजरअंदाज न करें।
स्मार्टवॉच या घर पर मॉनिटरिंग कितनी सही है?
इस प्रकार के डिवाइस आपकी हार्ट रेट को ट्रैक करने और उसमें कुछ अनियमितताओं का पता लगाने में सक्षम हो सकते हैं, जिससे आपके दिल की स्थिति के बारे में उपयोगी डेटा मिल सकता है, जिस पूरी तरह से निर्भर नहीं रहा जा सकता है।
स्टेंट डालने के बाद भी मौत क्यों?
- इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे मरीज डॉक्टर द्वारा दी गई खून पतला करने वाली दवाएं (Anti-platelet) समय पर न लेता हो या फिर स्टेंट पर थक्का जम गया हो, इससे भी हार्ट अटैक हो सकता है।
- इसके साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि स्टेंट केवल एक या दो ब्लॉक हुई नसों को खोलता है। यदि हृदय की किसी अन्य नसों में ब्लॉकेज बढ़ जाए, तो भी दिल का दौरा पड़ने का खतरा बना रहता है।
- कुछ मरीजों में खून पतला करने वाली दवाएं ठीक से काम नहीं करती हैं, जिससे क्लॉटिंग का खतरा बना रहता है और हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है।
- यदि स्टेंट बहुत गंभीर हार्ट अटैक के बाद लगाया गया हो और दिल की मांसपेशियां पहले ही बहुत कमजोर हो चुकी हों, जिससे पंपिंग कम हो गई हो, तो अचानक दिल की धड़कन रुक सकती है।