भरपूर नींद के बाद भी दिनभर छाई रहती है सुस्ती? सावधान! शरीर के ये 5 छुपे हुए लक्षण दे रहे हैं गंभीर बीमारी का संकेत

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आज की बेहद आधुनिक और भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में शरीर का लगातार थकना एक बेहद सामान्य बात मान ली गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोज रात को 7 से 8 घंटे की गहरी और पूरी नींद लेने के बावजूद अगर आपका शरीर सुबह उठते ही भारी, सुस्त और ऊर्जाहीन महसूस करता है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना आपके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में खराब खानपान, अत्यधिक मानसिक तनाव और पैकेट बंद या प्रोसेस्ड फूड्स पर बढ़ती निर्भरता के कारण युवाओं में पोषक तत्वों की कमी एक महामारी की तरह फैल रही है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि विटामिंस और मिनरल्स की यह कमी शरीर में बहुत धीमी रफ्तार से बढ़ती है, जिसके कारण लोग इसके शुरुआती चेतावनी संकेतों को समझ नहीं पाते और आगे चलकर किसी गंभीर क्रोनिक बीमारी का शिकार हो जाते हैं।

लगातार बनी रहने वाली थकान और असामान्य बाल झड़ना: जब भरपूर आराम भी हो जाए बेअसर

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शहरी आबादी में बढ़ते इस खतरे पर फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल (Amrita Hospital, Faridabad) के प्रसिद्ध आंतरिक रोग विशेषज्ञ (Internal Medicine Expert) डॉ. मोहित शर्मा ने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) से बातचीत में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। डॉ. शर्मा के मुताबिक, आज के समय में पोषण की कमी लोगों की आम सोच से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रही है, विशेषकर महानगरीय इलाकों में। इसका सबसे पहला और प्रमुख संकेत है हर समय बिना वजह थकान महसूस होना। जब शरीर में जरूरी विटामिंस की कमी होती है, तो कोशिकाओं को ऊर्जा बनाने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे आपकी काम करने की दैनिक क्षमता और कार्यकुशलता बुरी तरह प्रभावित होने लगती है। इसका दूसरा बड़ा लक्षण है बालों का अत्यधिक टूटना। मौसम बदलने पर थोड़े बालों का गिरना सामान्य है, लेकिन यदि आपके बाल लगातार और बहुत ज्यादा मात्रा में झड़ रहे हैं, तो यह साफ इशारा है कि बालों की जड़ों को अंदरूनी पोषण नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनका प्राकृतिक विकास चक्र पूरी तरह बाधित हो चुका है।

मुंह में बार-बार छाले होना और हाथ-पैरों में झुनझुनी: नसों पर पड़ रहा है सीधा असर

शरीर में पोषण के घटते स्तर का तीसरा सबसे आम लेकिन नजरअंदाज किया जाने वाला संकेत है मुंह में बार-बार दर्दनाक छाले होना या होंठों के किनारों का अचानक फटना। ज्यादातर लोग इसे पेट की खराबी या मामूली गर्मी समझकर केवल बाहरी क्रीम या दवाइयां लगा लेते हैं, जिससे कुछ समय के लिए तो राहत मिल जाती है, लेकिन बीमारी की असली वजह शरीर के भीतर ही मौजूद रहती है। इसके अलावा, चौथा और सबसे संवेदनशील लक्षण है हाथ-पैरों में अचानक तेज झुनझुनी होना, सुई चुभने जैसा अहसास होना या अंगों का बार-बार सुन्न पड़ जाना। डॉ. मोहित शर्मा ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि इस लक्षण को भूलकर भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर हमारी नसों (Nervous System) पर पड़ रहे बुरे असर और कुछ खास विटामिंस की भारी कमी को दर्शाता है। इसे नजरअंदाज करने पर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है।

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