पुतिन के रूस लौटते ही भारत के सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की मॉस्को यात्रा से दुनिया भर में भूचाल

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वैश्विक कूटनीति और रक्षा गलियारों में उस समय सनसनी फैल गई जब भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रूस का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सामरिक दौरा शुरू किया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया अंतरराष्ट्रीय दौरों से लौटने के तुरंत बाद भारतीय सेना प्रमुख का मॉस्को पहुंचना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक और अटूट सैन्य संबंधों को एक नया और आक्रामक आयाम मिलने जा रहा है।

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दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों और पश्चिमी देशों की पैनी निगाहें इस समय इस उच्च स्तरीय सैन्य दौरे पर टिकी हुई हैं, क्योंकि बदलते हुए भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और रूस की यह डिफेंस पार्टनरशिप वैश्विक रक्षा बाजार के पुराने समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर रख सकती है। इस रणनीतिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष सैन्य कमांडरों और रक्षा अधिकारियों के बीच अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति, रक्षा तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और भविष्य के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर बेहद गोपनीय और विस्तृत बातचीत होने की पूरी संभावना है।

भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का पुराना इतिहास और वर्तमान सामरिक जरूरतें

भारत और रूस की मित्रता किसी से छिपी नहीं है, और दशकों से मॉस्को नई दिल्ली का सबसे भरोसेमंद और संकट का साथी रक्षा साझीदार रहा है। जब भी भारत को अपनी पश्चिमी या उत्तरी सीमाओं पर किसी बड़े सामरिक संकट का सामना करना पड़ा है, रूस ने हमेशा एक मजबूत ढाल बनकर भारत का साथ निभाया है। वर्तमान समय में जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बाधित हो रही है और दुनिया के कई देश रक्षा उपकरणों की कमी से जूझ रहे हैं, तब जनरल धीरज सेठ का यह रूस दौरा इस बात को सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम है कि भारतीय थल सेना को समय पर आधुनिक बख्तरबंद गाड़ियां, टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम और स्पेयर पार्ट्स बिना किसी रुकावट के मिलते रहें।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल पुराने करारों को आगे बढ़ाना नहीं है, बल्कि भविष्य की आधुनिक युद्धनीति (Modern Warfare) को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के बीच रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना भी है, जिससे मेक इन इंडिया पहल को भी बल मिल सके।

मॉस्को में उच्च स्तरीय सैन्य बैठकें: रक्षा सौदों और तकनीकी ट्रांसफर पर होगी खास चर्चा

अपनी इस मॉस्को यात्रा के दौरान थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ रूसी सशस्त्र बलों के वरिष्ठ जनरलों, रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों और रूस के प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के प्रमुखों के साथ मैराथन बैठकें कर रहे हैं।

इन वार्ताओं में मुख्य रूप से रूस में बने अत्याधुनिक हथियारों के रख-रखाव, भारतीय कारखानों में उनके स्पेयर पार्ट्स के स्थानीय निर्माण और भविष्य की संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं (Joint R&D) पर फोकस किया जा रहा है। भारतीय सेना पिछले कुछ समय से अपनी युद्धक क्षमताओं को और अधिक घातक और तकनीक-युक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, जिसमें रूसी हथियारों की भूमिका हमेशा से रीढ़ की हड्डी जैसी रही है। इस उच्च स्तरीय मंथन के दौरान दोनों देशों के रक्षा विशेषज्ञों द्वारा उन तमाम बाधाओं को दूर करने पर भी विचार किया जा रहा है जो पिछले कुछ समय से वैश्विक प्रतिबंधों और भुगतान प्रणालियों (Payment Mechanisms) के कारण उत्पन्न हुई थीं।

पश्चिमी देशों की पैनी नजर और वैश्विक भू-राजनीति पर इस दौरे का दूरगामी असर

जनरल धीरज सेठ के इस रूस दौरे से अमेरिका और पश्चिमी देशों के रणनीतिक गलियारों में हलचल तेज होना स्वाभाविक है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से पश्चिमी देश चाहते हैं कि भारत रूस के साथ अपने रक्षा संबंधों को पूरी तरह से सीमित कर ले। लेकिन भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और 'स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी' (Strategic Autonomy) का परिचय देते हुए हमेशा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है। नई दिल्ली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की रक्षा जरूरतें और राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी बाहरी दबाव के अधीन नहीं हो सकती हैं।

मॉस्को के साथ इस मजबूत होती सैन्य साझेदारी से यह संदेश भी दुनिया को मिल जाता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी पारंपरिक और परीक्षित मित्र देश के साथ हाथ मिलाने से पीछे नहीं हटेगा, चाहे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दबाव कितना भी क्यों न हो।

भारत की थल सेना का आधुनिकीकरण और भविष्य की रणनीतिक तैयारियां

भारतीय थल सेना वर्तमान में दुनिया की सबसे पेशेवर और ताकतवर सेनाओं में गिनी जाती है, लेकिन आधुनिक तकनीक, ड्रोन वारफेयर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और रोबोटिक्स के इस दौर में सेना को लगातार अपग्रेड करने की आवश्यकता बनी हुई है।

जनरल धीरज सेठ का यह रूस दौरा इसी आधुनिकीकरण अभियान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके जरिए भारत अपनी थल सेना की स्ट्राइक कोर और इन्फैंट्री ब्रिगेड को और अधिक शक्तिशाली बनाना चाहता है। रूस के पास दुनिया की सबसे उन्नत तोपखाना प्रणालियां, टैंक रोधी मिसाइलें और सामरिक रक्षा तकनीक मौजूद हैं, जिनके अनुभवों का लाभ भारतीय सेना को मिल सकता है। इस दौरे के सफल समापन के बाद आने वाले महीनों में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई बड़े और ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगने की उम्मीद है, जो आने वाले दशकों में भारत की सैन्य ताकत को और अधिक अजेय बना देंगे।