NHAI New Toll Rules: नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स में होगी 40% तक की कटौती, जानिए NHAI के नए नियम

मोदी सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बार-बार सफर करने वाले अनगिनत चालकों और ट्रांसपोर्टरों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और राहत देने वाला बदलाव किया है। अगर आपके सफर के रास्ते में लंबे पुल, सुरंगें, फ्लाईओवर या एलिवेटेड स्ट्रक्चर आते हैं, तो अब आपको पहले के मुकाबले काफी कम टोल टैक्स चुकाना पड़ेगा।
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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवे फीस रूल्स में बड़े अपडेट किए हैं। इसके तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को नए रेट्स के हिसाब से टोल टैक्स का पुनर्मूल्यांकन करने और बिना किसी देरी के इस संशोधन प्रक्रिया को शुरू करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।


यह है टोल कैलकुलेशन का नया तरीका

अपडेट किए गए नेशनल हाईवे फीस रूल्स के तहत सरकार ने टोल रेट्स तय करने के लिए दो अलग-अलग फॉर्मूले बनाए हैं। NHAI को साफ तौर पर यह निर्देश दिया गया है कि वह आम जनता से टोल वसूलने के लिए उसी फॉर्मूले का इस्तेमाल करे जिससे कुल लागत सबसे कम आती हो।


पहले फॉर्मूले में किसी विशेष स्ट्रक्चर जैसे पुल या सुरंग की लंबाई को 10 से गुणा किया जाता है और फिर हाईवे के बाकी बचे सामान्य हिस्से की लंबाई को उसमें जोड़ दिया जाता है। दूसरा फॉर्मूला सीधे पूरे हाईवे सेक्शन की कुल लंबाई यानी पुल और सामान्य सड़क दोनों को मिलाकर 5 से गुणा करता है। इसके अलावा 60 मीटर या उससे छोटे पुलों के लिए अलग से किसी गणना की जरूरत नहीं होगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य मकसद चालकों और आम जनता पर टोल टैक्स के वित्तीय बोझ को कम करना और शुल्क निर्धारण में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।


पहले क्यों इतना ज्यादा लगता था टोल टैक्स?

आम तौर पर किसी हाईवे पर पुल, सुरंग या एलिवेटेड रोड का निर्माण और रखरखाव एक सामान्य सड़क की तुलना में काफी ज्यादा खर्चीला होता है। यही वजह है कि पुराने नियमों के तहत ऐसे स्ट्रक्चर की वास्तविक लंबाई का 10 गुना मानकर टोल टैक्स की गणना की जाती थी।


उदाहरण के लिए अगर किसी हाईवे पर 5 किलोमीटर लंबी सुरंग या एलिवेटेड रोड होती थी, तो टोल टैक्स वसूलने के लिए उसे 50 किलोमीटर लंबी सामान्य सड़क के बराबर माना जाता था। इस नियम की वजह से यात्रियों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता था, खासकर एक्सप्रेसवे और बड़े शहरी एक्सप्रेसवे पर जहां पुल कई किलोमीटर लंबे होते हैं।


उदाहरण से समझें अपनी बचत का गणित

संशोधित नियमों के असर को दो अलग-अलग स्थितियों से आसानी से समझा जा सकता है।

पहली स्थिति में मान लीजिए कि 40 किलोमीटर के हाईवे में 30 किलोमीटर एलिवेटेड रोड है और 10 किलोमीटर सामान्य सड़क है। पुराने तरीके (30 × 10 + 10) के हिसाब से कुल दूरी 310 किलोमीटर मानी जाती थी, जिससे बहुत भारी टोल देना पड़ता था। हालांकि नए 5 गुना वाले नियम (40 × 5) के तहत कुल दूरी सिर्फ 200 किलोमीटर बनती है। इसका मतलब है कि जनता को 310 किलोमीटर के बजाय अब केवल 200 किलोमीटर का ही टोल चुकाना होगा।

दूसरी स्थिति में जहां एलिवेटेड हिस्सा कम है, जैसे 40 किलोमीटर के हाईवे में 10 किलोमीटर का ब्रिज और 30 किलोमीटर की सामान्य सड़क है। यहां पहले फॉर्मूले से 130 किलोमीटर की दूरी निकलती है (10 × 10 + 30) और दूसरे फॉर्मूले से 200 किलोमीटर की दूरी निकलती है। चूंकि नियम के मुताबिक सबसे कम लागत वाले फॉर्मूले को चुनना अनिवार्य है, इसलिए चालकों से केवल 130 किलोमीटर का ही टोल टैक्स लिया जाएगा।


इस तरह दोनों ही स्थितियों में कम दूरी वाले विकल्प को चुनने से चालकों को सीधा आर्थिक फायदा मिलता है। इन दोनों फॉर्मूलों की तुलना करने पर कुल दूरी लगभग 40 प्रतिशत तक कम हो जाती है, जिससे टोल टैक्स की दरों में 40% तक की भारी गिरावट देखने को मिलती है।