ऑपरेशन सिंदूर के एक साल: 72 घंटों में पाकिस्तान को घुटनों पर लाने वाली भारतीय सेना की वो शौर्य गाथा
6 और 7 मई की वह रात पाकिस्तान कभी नहीं भूल सकता, जब भारतीय सेना ने "ऑपरेशन सिंदूर" के जरिए उसके गुरूर को चकनाचूर कर दिया था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस दर्दनाक हमले का जवाब थी, जिसमें 26 भारतीय पर्यटकों की जान चली गई थी। भारत ने इस ऑपरेशन के जरिए दुनिया को दिखा दिया कि अब आतंक पर वार सिर्फ बातों से नहीं, बल्कि घातक हथियारों से होगा।
पाकिस्तान के अड्डों पर भारत का बड़ा प्रहार
ठीक एक साल पहले भारत ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अलकायदा जैसे खूंखार संगठनों के ठिकानों पर हमला बोला था। ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के 9 मुख्य आतंकी कैंपों पर मिसाइलें बरसाई गईं। जब पाकिस्तानी सेना ने इन आतंकियों के बचाव में उतरने की कोशिश की, तो भारतीय सेना ने पलटवार करते हुए उनके 11 मिलिट्री बेस भी तबाह कर दिए। हालत यह हो गई कि पाकिस्तान को महज 3 दिन के अंदर ही घुटनों पर आना पड़ा और भारत के सामने गिड़गिड़ाते हुए सीजफायर की मांग करनी पड़ी।
सेना ने कैसे सिखाया सबक?
भारत का मकसद साफ था आतंकियों को खत्म करना। शुरुआत में सिर्फ आतंकी अड्डों को निशाना बनाया गया था, लेकिन जब पाकिस्तान की सरकार और सेना आतंकियों के साथ खड़ी दिखी, तो भारतीय सेना ने उनके एयरबेस और सैन्य ठिकानों पर प्रहार शुरू कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह साफ संदेश दिया गया कि अब आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सर्जिकल स्ट्राइक से भी घातक था 'ऑपरेशन सिंदूर'
6 मई की रात करीब 1:05 बजे भारतीय वायुसेना और थलसेना ने मिलकर पाकिस्तान और PoK में मौजूद 9 आतंकी कैंपों पर एयर स्ट्राइक की। ब्रह्मोस और स्कैल्प जैसी घातक मिसाइलों ने बहावलपुर में जैश के मुख्यालय और मुरीदके में लश्कर के बेस को खंडहर बना दिया। इन हमलों में कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए, जिसकी पुष्टि बाद में सैटेलाइट तस्वीरों से भी हुई।
पाकिस्तानी एयरफोर्स का 20% ढांचा खत्म
जब पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की कोशिश की, तो 8 से 10 मई के बीच भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस को अपना निशाना बनाया। इसमें नूर खान एयरबेस, सरगोधा और भोलारी जैसे बड़े ठिकाने शामिल थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में पाकिस्तानी वायुसेना का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह बर्बाद हो गया। भोलारी एयरबेस पर तो पाकिस्तान के 50 से ज्यादा सैनिक और एक स्क्वाड्रन लीडर भी मारा गया।
इतिहास का सबसे बड़ा हमला
1971 के युद्ध के बाद यह पहली बार था जब भारत ने पाकिस्तान की सीमा के इतने अंदर घुसकर हमला किया था। पाकिस्तान ने "ऑपरेशन बुनयान-उल-मरसूस" के जरिए जवाब देने की कोशिश तो की, लेकिन भारतीय डिफेंस सिस्टम के आगे उसकी एक न चली। आखिरकार 10 मई को भारत ने पाकिस्तान की अपील पर युद्ध रोकने का फैसला किया। भारत ने यह साफ कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी सिर्फ रुका है, खत्म नहीं हुआ। अगर दोबारा कोई हिमाकत हुई, तो अंजाम और भी बुरा होगा।
पाकिस्तान के अड्डों पर भारत का बड़ा प्रहार
ठीक एक साल पहले भारत ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अलकायदा जैसे खूंखार संगठनों के ठिकानों पर हमला बोला था। ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के 9 मुख्य आतंकी कैंपों पर मिसाइलें बरसाई गईं। जब पाकिस्तानी सेना ने इन आतंकियों के बचाव में उतरने की कोशिश की, तो भारतीय सेना ने पलटवार करते हुए उनके 11 मिलिट्री बेस भी तबाह कर दिए। हालत यह हो गई कि पाकिस्तान को महज 3 दिन के अंदर ही घुटनों पर आना पड़ा और भारत के सामने गिड़गिड़ाते हुए सीजफायर की मांग करनी पड़ी। सेना ने कैसे सिखाया सबक?
भारत का मकसद साफ था आतंकियों को खत्म करना। शुरुआत में सिर्फ आतंकी अड्डों को निशाना बनाया गया था, लेकिन जब पाकिस्तान की सरकार और सेना आतंकियों के साथ खड़ी दिखी, तो भारतीय सेना ने उनके एयरबेस और सैन्य ठिकानों पर प्रहार शुरू कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह साफ संदेश दिया गया कि अब आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।You may also like
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