Oxford Extreme Heat List: ऑक्सफोर्ड की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, हीटवेव के निशाने पर भारत के ये बड़े शहर
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में दुनिया भर के मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। भारत में भी पिछले कुछ सालों से गर्मियों के मौसम में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है। इसी बीच मशहूर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक नई और बेहद चौंकाने वाली वैज्ञानिक रिसर्च सामने आई है। ऑक्सफोर्ड की इस एक्सट्रीम हीट लिस्ट (भीषण गर्मी की सूची) में भारत के कई प्रमुख महानगरों को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की गई है। इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और अपने खुशनुमा मौसम के लिए मशहूर बेंगलुरु जैसे बड़े शहर अब भीषण गर्मी और खतरनाक हीटवेव के सबसे बड़े जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल हो चुके हैं।
इस वैज्ञानिक रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। रिपोर्ट में विभिन्न देशों के बड़े शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर और भौगोलिक स्थिति के आधार पर एक विशेष हीट रिस्क स्कोर (गर्मी जोखिम सूचकांक) तैयार किया गया है। इस सूचकांक से यह साफ पता चलता है कि आने वाले समय में इन शहरों में रहने वाली एक बड़ी आबादी को अत्यधिक उच्च तापमान और लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ सकता है, जो स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए एक गंभीर चुनौती है।
इस अत्यधिक शहरीकरण के कारण ये बड़े शहर अर्बन हीट आइलैंड में तब्दील होते जा रहे हैं, जहाँ रात के समय भी तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है। मुंबई जैसे तटीय शहरों में हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) का स्तर ज्यादा होने की वजह से गर्मी का अहसास और भी खतरनाक हो जाता है, जिसे मेडिकल साइंस की भाषा में वेट-बल्ब तापमान कहा जाता है। इन सभी प्रतिकूल कारकों की वजह से भारत के इन प्रमुख आर्थिक केंद्रों का पर्यावरण संतुलन पूरी तरह बिगड़ रहा है और वे भीषण गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते जा रहे हैं।
रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में आने वाले दशकों में अत्यधिक गर्मी वाले दिनों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका जताई गई है। ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो इन शहरों का हीट रिस्क स्कोर आने वाले समय में खतरनाक स्तर को भी पार कर सकता है। इस सूची का मुख्य उद्देश्य सरकारों को समय रहते सचेत करना है ताकि वे अपने शहरों को इस बदलते मौसम की मार से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम कर सकें।
स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा, यह अत्यधिक गर्मी देश की आर्थिक उत्पादकता को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है। निर्माण कार्य, डिलीवरी सर्विसेज और कृषि जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले आउटडोर वर्कर्स के लिए दोपहर के समय काम करना नामुमकिन हो जाता है, जिससे लेबर प्रोडक्टिविटी में भारी गिरावट आती है। ऑक्सफोर्ड की इस रिपोर्ट में साफ तौर पर सलाह दी गई है कि भविष्य के संकट से निपटने के लिए अब हमें अपने शहरों में बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने होंगे, कूल रूफ तकनीक को बढ़ावा देना होगा और पानी के स्रोतों को पुनर्जीवित करना होगा। तभी जाकर हम अपने महानगरों को रहने लायक और सुरक्षित बनाए रख सकते हैं।
इस वैज्ञानिक रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद पर्यावरण विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। रिपोर्ट में विभिन्न देशों के बड़े शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर और भौगोलिक स्थिति के आधार पर एक विशेष हीट रिस्क स्कोर (गर्मी जोखिम सूचकांक) तैयार किया गया है। इस सूचकांक से यह साफ पता चलता है कि आने वाले समय में इन शहरों में रहने वाली एक बड़ी आबादी को अत्यधिक उच्च तापमान और लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ सकता है, जो स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए एक गंभीर चुनौती है।
जानिए क्यों बढ़ रहा है बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों का हीट रिस्क स्कोर
अक्सर देखा जाता है कि लोग गर्मियों से राहत पाने के लिए बेंगलुरु जैसे शहरों का रुख करते थे, लेकिन ऑक्सफोर्ड की इस नई रिसर्च ने सालों पुरानी इस धारणा को बदल दिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन महानगरों में कंक्रीट के जंगलों का तेजी से बढ़ना, हरियाली की लगातार होती कमी और वाहनों व फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषण इसके पीछे की मुख्य वजह हैं।You may also like
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इस अत्यधिक शहरीकरण के कारण ये बड़े शहर अर्बन हीट आइलैंड में तब्दील होते जा रहे हैं, जहाँ रात के समय भी तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है। मुंबई जैसे तटीय शहरों में हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) का स्तर ज्यादा होने की वजह से गर्मी का अहसास और भी खतरनाक हो जाता है, जिसे मेडिकल साइंस की भाषा में वेट-बल्ब तापमान कहा जाता है। इन सभी प्रतिकूल कारकों की वजह से भारत के इन प्रमुख आर्थिक केंद्रों का पर्यावरण संतुलन पूरी तरह बिगड़ रहा है और वे भीषण गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते जा रहे हैं।
ऑक्सफोर्ड की एक्सट्रीम हीट लिस्ट के मुख्य निष्कर्ष और आंकड़े
इस वैश्विक जलवायु अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के सैकड़ों शहरों का बारीकी से मूल्यांकन किया है और उनके लिए एक विशिष्ट जोखिम स्कोर निर्धारित किया है। इस सूची में भारत के शहरों को काफी ऊपर स्थान मिला है, जो हमारे लिए एक वेक-अप कॉल की तरह है।रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में आने वाले दशकों में अत्यधिक गर्मी वाले दिनों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने की आशंका जताई गई है। ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो इन शहरों का हीट रिस्क स्कोर आने वाले समय में खतरनाक स्तर को भी पार कर सकता है। इस सूची का मुख्य उद्देश्य सरकारों को समय रहते सचेत करना है ताकि वे अपने शहरों को इस बदलते मौसम की मार से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम कर सकें।
बदलती जलवायु का आम जनता के स्वास्थ्य और काम पर क्या होगा असर
जब भी कोई शहर भीषण गर्मी और लगातार आने वाली हीटवेव की चपेट में आता है, तो इसका सबसे सीधा और बुरा असर वहां रहने वाले आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक ऊंचे तापमान के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, थकान और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं।स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा, यह अत्यधिक गर्मी देश की आर्थिक उत्पादकता को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है। निर्माण कार्य, डिलीवरी सर्विसेज और कृषि जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले आउटडोर वर्कर्स के लिए दोपहर के समय काम करना नामुमकिन हो जाता है, जिससे लेबर प्रोडक्टिविटी में भारी गिरावट आती है। ऑक्सफोर्ड की इस रिपोर्ट में साफ तौर पर सलाह दी गई है कि भविष्य के संकट से निपटने के लिए अब हमें अपने शहरों में बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने होंगे, कूल रूफ तकनीक को बढ़ावा देना होगा और पानी के स्रोतों को पुनर्जीवित करना होगा। तभी जाकर हम अपने महानगरों को रहने लायक और सुरक्षित बनाए रख सकते हैं।









