झारग्राम में झालमुड़ी के बीच चॉपर वाली सियासत: क्या है प्रधानमंत्री की सुरक्षा का असली प्रोटोकॉल?
पश्चिम बंगाल के झारग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक स्थानीय दुकान पर रुककर झालमुड़ी का आनंद लेना सुर्खियों में है। हालांकि, इस सादगी भरे पल पर अब राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री के इस 'स्नैक ब्रेक' की वजह से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का हेलिकॉप्टर झारग्राम में नहीं उतर सका।
अस्थायी पाबंदी: प्रधानमंत्री के आगमन, लैंडिंग और प्रस्थान के दौरान सुरक्षा कारणों से उस विशिष्ट क्षेत्र में दूसरे हेलिकॉप्टर या विमानों के परिचालन पर अस्थायी रोक लगा दी जाती है। इसका उद्देश्य किसी भी हवाई खतरे या अव्यवस्था को रोकना होता है।
एटीसी की भूमिका: एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को स्पष्ट निर्देश होते हैं कि जब पीएम का चॉपर लैंड कर रहा हो या उड़ान भरने की तैयारी में हो, तो उस समय किसी अन्य वीवीआईपी मूवमेंट को अनुमति न दी जाए। यह एक मानक प्रक्रिया है जिसका पालन हर राज्य में किया जाता है।
नो-फ्लाई जोन: हालांकि पूरा शहर नो-फ्लाई जोन नहीं होता, लेकिन पीएम के कार्यक्रम स्थल के आसपास का दायरा अस्थायी रूप से प्रतिबंधित रहता है। इस दौरान वहां ड्रोन उड़ाना भी पूरी तरह वर्जित होता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन सुरक्षा के नजरिए से प्रधानमंत्री का प्रोटोकॉल सर्वोच्च प्राथमिकता रखता है। एसपीजी के नियमों के तहत, सुरक्षा में किसी भी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाती, चाहे इसके लिए किसी दूसरे बड़े राजनेता के कार्यक्रम में देरी ही क्यों न हो जाए।
क्या है पूरा विवाद?
टीएमसी ने एक ट्वीट के जरिए दावा किया कि जब प्रधानमंत्री झारग्राम में मौजूद थे, तब झारखंड के मुख्यमंत्री को लैंडिंग की अनुमति नहीं दी गई। टीएमसी का कहना है कि प्रधान सेवक के लंबे समय तक रुकने और फोटो खिंचवाने के चक्कर में दो निर्वाचित नेताओं को घंटों इंतजार करना पड़ा और अंततः उन्हें अपनी रैली किए बिना ही रांची लौटना पड़ा। टीएमसी ने इसे 'आदिवासी विरोधी मानसिकता' करार देते हुए सवाल उठाया कि क्या विपक्ष के नेताओं के प्रति यही सम्मान है।सुरक्षा प्रोटोकॉल की असलियत
जब भी प्रधानमंत्री किसी क्षेत्र के दौरे पर होते हैं, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के पास होती है। एसपीजी 'ब्लू बुक' के कड़े दिशा-निर्देशों का पालन करती है। आइए समझते हैं कि इस दौरान हवाई यातायात के नियम क्या होते हैं:अस्थायी पाबंदी: प्रधानमंत्री के आगमन, लैंडिंग और प्रस्थान के दौरान सुरक्षा कारणों से उस विशिष्ट क्षेत्र में दूसरे हेलिकॉप्टर या विमानों के परिचालन पर अस्थायी रोक लगा दी जाती है। इसका उद्देश्य किसी भी हवाई खतरे या अव्यवस्था को रोकना होता है।
एटीसी की भूमिका: एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को स्पष्ट निर्देश होते हैं कि जब पीएम का चॉपर लैंड कर रहा हो या उड़ान भरने की तैयारी में हो, तो उस समय किसी अन्य वीवीआईपी मूवमेंट को अनुमति न दी जाए। यह एक मानक प्रक्रिया है जिसका पालन हर राज्य में किया जाता है।
नो-फ्लाई जोन: हालांकि पूरा शहर नो-फ्लाई जोन नहीं होता, लेकिन पीएम के कार्यक्रम स्थल के आसपास का दायरा अस्थायी रूप से प्रतिबंधित रहता है। इस दौरान वहां ड्रोन उड़ाना भी पूरी तरह वर्जित होता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन सुरक्षा के नजरिए से प्रधानमंत्री का प्रोटोकॉल सर्वोच्च प्राथमिकता रखता है। एसपीजी के नियमों के तहत, सुरक्षा में किसी भी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाती, चाहे इसके लिए किसी दूसरे बड़े राजनेता के कार्यक्रम में देरी ही क्यों न हो जाए।
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