पेट्रोल-डीजल की बचत और सोने से दूरी: जानें पीएम मोदी के हैदराबाद वाले बयान के मायने

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी का असर अब भारत पर भी गहराई से पड़ने लगा है। संकट कितना गंभीर है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सामने आकर लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है।
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हैदराबाद की एक रैली में पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि वे एक साल तक सोना खरीदने से बचें और पेट्रोल-डीजल का कम से कम इस्तेमाल करें। इस बयान के बाद हर तरफ एक ही सवाल है कि क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब रॉकेट की रफ्तार से बढ़ने वाली हैं? आखिर पीएम मोदी के इस आह्वान के पीछे का असली मतलब क्या है?

देशभक्ति सिर्फ सैनिकों का काम नहीं: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने लोगों को समझाया कि पिछले दो महीनों से पश्चिम एशिया में जो युद्ध जैसे हालात हैं, उनका सीधा असर भारत की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देशभक्ति का मतलब सिर्फ सीमा पर सैनिकों का बलिदान नहीं है, बल्कि संकट के समय हम सबकी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने लोगों से गुजारिश की कि वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे-छोटे बदलाव करें ताकि देश पर पड़ रहा आर्थिक बोझ कम हो सके।


पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कार पूलिंग पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपील की है कि जहां तक हो सके, लोग अपनी गाड़ियों के बजाय मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक साधनों का इस्तेमाल करें। उन्होंने 'कार पूलिंग' यानी एक ही गाड़ी में कई लोगों के जाने और सामान भेजने के लिए रेलवे को चुनने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बात कही ताकि विदेशों से कच्चा तेल खरीदने की जरूरत कम पड़े।

मोदी जी ने पुराने कोविड काल की याद दिलाते हुए कहा कि वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स को फिर से अपनाया जा सकता है। इससे सफर कम होगा और तेल की बचत होगी। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि फिलहाल विदेशी छुट्टियों और विदेशों में शादी (डेस्टिनेशन वेडिंग) करने से बचें, क्योंकि इससे देश की विदेशी मुद्रा बड़ी मात्रा में बाहर चली जाती है।


सोना और खाने का तेल: बचत ही समाधान

पीएम ने सभी से अनुरोध किया कि जब तक बहुत ज्यादा जरूरी न हो, एक साल तक सोना न खरीदें। सोना खरीदने के लिए भारत को बहुत ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। अगर हम खरीदारी कम करेंगे तो रुपया मजबूत होगा। इसके साथ ही उन्होंने खाने वाले तेल का इस्तेमाल भी कम करने को कहा क्योंकि भारत इसका बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से मंगवाता है। उन्होंने लोगों से कहा कि विदेश जाने के बजाय अपने ही देश में पर्यटन को बढ़ावा दें ताकि स्थानीय दुकानदारों और ड्राइवरों को फायदा हो।

आखिर प्रधानमंत्री ने क्यों की ऐसी अपील?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, ईरान के साथ चल रही जंग की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई कम हो गई है, जिससे कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। भारत सरकार अभी तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए अपनी जेब से भारी पैसा खर्च कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि अगर जनता ईंधन के इस्तेमाल में सिर्फ 10% की कमी ले आए, तो देश के रोजाना करीब 160 करोड़ रुपये बच सकते हैं।

क्या महंगे होंगे पेट्रोल और डीजल?

अगर पीएम मोदी के बयान को गहराई से समझें, तो फिलहाल सरकार कीमतों में भारी बढ़ोतरी नहीं करना चाहती। सरकार चाहती है कि जनता खुद समझदारी दिखाए और बचत करे ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव न पड़े। अगर लोगों ने साथ दिया, तो मुमकिन है कि दाम न बढ़ें। लेकिन अगर हालात नहीं सुधरे और खपत कम नहीं हुई, तो सरकार को मजबूरी में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।