Explainer: पश्चिम बंगाल के नए मुख्य सचिव बने मनोज अग्रवाल, नियुक्ति पर क्यों मचा राजनीतिक बवाल?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी सीईओ रहे मनोज कुमार अग्रवाल को सोमवार को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
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मनोज अग्रवाल 1990 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी बनने से पहले भी वह कई अहम प्रशासनिक पदों पर काम कर चुके हैं। अब उन्हें राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


SIR अभियान को लेकर पहले से विवादों में रहे मनोज अग्रवाल

मनोज अग्रवाल के कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR अभियान चलाया गया था। इस अभियान के तहत करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे।


पश्चिम बंगाल में SIR अभियान को लेकर काफी विवाद हुआ था। विपक्षी दलों का आरोप था कि इस प्रक्रिया की वजह से लाखों लोग अपने मतदान अधिकार से वंचित रह गए। इसी कारण मनोज अग्रवाल की कड़ी आलोचना भी हुई। हालांकि दूसरी तरफ कई लोगों ने राज्य में अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और बिना बड़े हिंसक घटनाक्रम के चुनाव कराने के लिए उनकी सराहना भी की।


राज्य सरकार ने जारी की नई अधिसूचना

सोमवार को जारी राज्य सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, मौजूदा मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को नई दिल्ली में प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर नियुक्त किया गया है।


इसके अलावा चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक रहे सुब्रत गुप्ता को पश्चिम Bengal के मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया है। सुब्रत गुप्ता भी 1990 बैच के अधिकारी हैं और विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित SIR अभियान के दौरान उन्हें चुनाव आयोग ने विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किया था।

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा, "गुप्ता का व्यापक प्रशासनिक अनुभव नई सरकार को नीतिगत समन्वय और शासन संबंधी मामलों में मदद करेगा."


विपक्ष ने नियुक्ति पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार द्वारा पूर्व सीईओ को मुख्य सचिव बनाए जाने के फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इसे लेकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।

टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा, "पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल अब बंगाल के मुख्य सचिव बनेंगे. कथित 'निष्पक्ष अंपायर' को बंगाल में बीजेपी सरकार का शीर्ष नौकरशाह बनने का इनाम दिया गया है. क्या अब भी कोई गंभीरता से मानता है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष थे?"


टीएमसी नेता साकेत गोखले ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "बीजेपी और चुनाव आयोग अब खुलेआम चुनाव चोरी करने की बात कर रहे हैं."

उन्होंने आगे लिखा, "यह बेशर्मी की हद है."


कांग्रेस ने भी साधा निशाना

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस नियुक्ति को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एक्स पर लिखा, "ये नियुक्तियां चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच खुली मिलीभगत और सांठगांठ को दर्शाती हैं."

जयराम रमेश ने लिखा है, ''बीजेपी नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की निगरानी करने वाले तत्कालीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल (आईएएस 1990 बैच) को पश्चिम बंगाल सरकार का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है. इसी तरह, एसआईआर और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की निगरानी करने वाले चुनाव आयोग के विशेष रोल पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता (आईएएस 1990 बैच) को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है.''

उन्होंने आगे लिखा, ''इन नियुक्तियों से चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच खुली मिलीभगत और सांठगांठ झलकती है. अब इस गठजोड़ को छिपाने या ढकने की कोशिश तक नहीं की जा रही है. ये नियुक्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं था और उसने विशेष रूप से बीजेपी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए काम किया. पूरे राज्य में ऐसे चुनाव कराए गए, जिनमें 27 लाख लोगों को मतदान से वंचित कर दिया गया. यह सब चुनाव आयोग की ओर से बेहद रणनीतिक तरीक़े से किया गया ताकि बीजेपी को चुनावी लाभ मिल सके.''



बीजेपी ने किया फैसला सही ठहराने का प्रयास

मनोज अग्रवाल की नियुक्ति पर उठ रहे सवालों के बीच पश्चिम बंगाल बीजेपी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने लिखा, ''ममता बनर्जी के उलट, जिन्होंने आईएएस सेवा से जुड़े नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए कई अधिकारियों को दरकिनार कर नौकरशाही व्यवस्था को कमज़ोर किया था, पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने राज्य में कार्यरत सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज अग्रवाल को पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव नियुक्त किया है. यह क़दम क़ानून की गरिमा बहाल करने के वादे के अनुरूप है.''


कई बोर्ड और संगठनों का कार्यकाल भी समाप्त

सोमवार को जारी एक अन्य अधिसूचना में पश्चिम बंगाल सरकार ने विभिन्न विभागों के अंतर्गत आने वाले बोर्ड, संगठनों और संस्थाओं में नामित सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त करने का फैसला लिया।

अधिसूचना में यह भी कहा गया कि 60 वर्ष की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु के बाद सेवा विस्तार पर कार्यरत अधिकारियों की सेवाएं भी समाप्त मानी जाएंगी।

इसी बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नबन्ना में कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और उनसे प्रशासनिक मामलों पर खुलकर अपनी राय रखने को कहा।