2.5 Rupee Rare Note: क्या आपके पास भी है ढाई रुपये का नोट? घर बैठे बन सकते हैं लखपति
भारत के पैसों का इतिहास बहुत पुराना और दिलचस्प रहा है। समय के साथ यहाँ कई तरह के सिक्के और नोट आए जो अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। इन्हीं में से एक है ढाई रुपये का नोट जिसे भारतीय मुद्रा के इतिहास में सबसे अलग और दुर्लभ माना जाता है। आज के दौर में यह नोट सिर्फ लेनदेन का जरिया नहीं है बल्कि इसे जमा करने वालों के लिए यह एक खजाना बन गया है। पुराने सिक्कों और नोटों को इकट्ठा करने का शौक भारत में बहुत तेजी से फैल रहा है और यही वजह है कि इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं।

ब्रिटिश काल में शुरू हुआ यह सफर
ढाई रुपये का यह नोट पहली बार ब्रिटिश राज के दौरान बाजार में लाया गया था। उस समय एक रुपये में 16 आने होते थे और इस नोट की कीमत 2 रुपये 8 आने यानी ढाई रुपये तय की गई थी। इसे 2 जनवरी 1918 को जारी किया गया था। उस समय चांदी की कमी हो गई थी और सिक्कों की मांग बहुत ज्यादा थी इसलिए सरकार को कागज के नोट छापने पड़े। हालांकि यह नोट बहुत ज्यादा समय तक चलन में नहीं रहा और 1926 में इसे वापस ले लिया गया।डॉलर के बराबर थी इसकी साख
हैरान करने वाली बात यह है कि उस जमाने में इस ढाई रुपये के नोट की कीमत अमेरिकी डॉलर के बराबर मानी जाती थी। इसकी छपाई इंग्लैंड में की गई थी और इस पर ब्रिटिश राजा किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर बनी हुई थी। यह नोट अपनी बनावट और खास मूल्य की वजह से उस समय भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता था।आखिर क्यों है यह इतना कीमती
किसी भी पुराने नोट की कीमत इस बात पर तय होती है कि वह कितना कम मिलता है और बाजार में उसकी कितनी मांग है। ढाई रुपये का यह नोट बहुत ही कम समय के लिए बाजार में आया था इसलिए इसके बहुत कम नमूने अब बचे हैं। यही वजह है कि नीलामी में इस नोट की कीमत लाखों में लगती है। कुछ मौकों पर तो इसकी कीमत 6.4 लाख रुपये तक पहुँच चुकी है। जानकारों का कहना है कि कागज के नोट सिक्कों के मुकाबले जल्दी खराब हो जाते हैं इसलिए अगर यह अच्छी हालत में मिल जाए तो इसकी कीमत और भी बढ़ जाती है।झारखंड में पुराना खजाना
झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित जैन कॉइन गैलरी पुराने नोटों के शौकीनों के लिए एक बड़ा केंद्र बन गई है। यहाँ मुगल काल के सिक्कों से लेकर ब्रिटिश भारत के नोट और आजाद भारत के खास सिक्के देखने को मिलते हैं। इस गैलरी को चलाने वाले लोग दुर्लभ नोटों को इकट्ठा करते हैं और उन्हें दूसरे शौकीनों तक पहुँचाते हैं। यहाँ आने वाले लोगों का मानना है कि हर पुराना नोट सिर्फ कागज नहीं बल्कि इतिहास का एक पन्ना है और ऐसी जगहें इतिहास को बचाने में बड़ी मदद कर रही हैं।भारत में बढ़ता नया शौक
पुराने नोट और सिक्के जमा करने का काम अब भारत में एक मुनाफे वाला काम बनता जा रहा है। कई लोग पुराने नोट बेचकर अच्छा पैसा कमा रहे हैं। कुछ दुर्लभ नोट तो लाखों में बिकते ही हैं पर अगर किसी नोट का सीरियल नंबर खास हो तो उसकी कीमत करोड़ों तक भी जा सकती है। हालांकि हर पुराना नोट महंगा नहीं होता। उसकी हालत कैसी है और वह कितना ऐतिहासिक है इसी आधार पर उसका पैसा तय किया जाता है।आने वाली पीढ़ी के लिए विरासत
दुर्लभ नोट सिर्फ सजावट की चीज नहीं हैं बल्कि इनसे यह समझने में मदद मिलती है कि देश की आर्थिक हालत समय के साथ कैसे बदली। ढाई रुपये का यह नोट इस बात का सबूत है कि कैसे जरूरत पड़ने पर सरकारें नई तरह के पैसे जारी करती हैं। यह पुरानी करेंसी हमारी विरासत का हिस्सा है जो हमें बीते हुए कल के बारे में बहुत कुछ बताती है।Next Story