Direct e-Rupee Transfer: राशन कार्ड धारको को अब सरकार देगी ये बड़ा फायदा
सरकार राशन कार्ड वालों के लिए एक नया और बड़ा कदम उठा रही है। गुजरात में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के अंदर सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी का एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। अब लोगों को ई-रूपी के रूप में डिजिटल कूपन मिलेंगे। ये कूपन सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में भेजे जाएंगे। सरकार का ये कदम उन लोगों के लिए है जो राशन कार्ड का फायदा उठाते हैं। इन डिजिटल पैसों का इस्तेमाल सिर्फ राशन की दुकानों से अनाज खरीदने के लिए किया जा सकेगा। राशन कार्ड से जुड़ी ये नई व्यवस्था लोगों के काम करने का तरीका पूरी तरह से बदल देगी।

दुनिया के दूसरे देश भी डिजिटल तरीके से मदद पहुंचाने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका में सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम और ब्राजील में बोल्सा फेमिलिया जैसे प्रोग्राम बहुत पहले से इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं यूके का हेल्दी स्टार्ट प्रोग्राम भी लोगों को पोषण देने के लिए प्रीपेड कार्ड का इस्तेमाल करता है। इन सब देशों ने भी अपने तरीके से काम किया है। लेकिन भारत का सीधे सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी के साथ जुड़ना देश को पूरी दुनिया में सबसे आगे ला खड़ा करता है। ये दुनिया भर के लिए एक नई राह दिखाने वाला कदम है।
पैसों का सही इस्तेमाल
सरकार का कहना है कि इस नए सिस्टम से राशन बांटने का काम बहुत साफ और असरदार हो जाएगा। अब तक सब्सिडी के पैसे नकद या पुराने डिजिटल तरीकों से दिए जाते थे। लेकिन अब डिजिटल करेंसी से ये पक्का हो जाएगा कि पैसे उसी काम के लिए खर्च हों जिसके लिए वे दिए गए हैं। राशन कार्ड से फायदा लेने वाले लोग इस डिजिटल पैसे का इस्तेमाल सिर्फ अनाज खरीदने के लिए कर पाएंगे। कोई भी इंसान इन पैसों को किसी और काम में नहीं लगा सकेगा। ये एक बहुत अच्छा तरीका है जिससे सरकारी मदद सीधे सही जगह पहुंचेगी।धोखाधड़ी पर लगेगी रोक
जानकारों का मानना है कि इस कदम से धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी को रोकने में काफी मदद मिलेगी। अक्सर सब्सिडी के पैसों का गलत इस्तेमाल होता है या पैसों की चोरी की शिकायतें आती हैं। डिजिटल करेंसी से सरकार खर्च किए गए पैसों पर सीधी नजर रख सकेगी। इससे सरकारी खर्च पर भी बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। अब कोई भी बीच में पैसे नहीं मार सकेगा। सब कुछ एकदम साफ तरीके से होगा और लोगों को उनका पूरा हक मिलेगा।डिजिटल इंडिया की तरफ एक कदम
ये नया कदम भारत के डिजिटल इकॉनमी अभियान का एक हिस्सा माना जा रहा है। देश में पहले से ही ई-पीओएस मशीनों और वन नेशन वन राशन कार्ड जैसी योजनाएं चल रही हैं। इन योजनाओं ने राशन सिस्टम को डिजिटल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। अब सरकार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में डिजिटल करेंसी को जोड़कर इस काम को एक कदम और आगे ले जाना चाहती है। ये सब डिजिटल दुनिया की तरफ एक बड़ी छलांग है।योजना के सामने आने वाली मुश्किलें
इस नई योजना के सामने कई मुश्किलें भी हैं। ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले बहुत से लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं। वहां इंटरनेट भी अच्छे से काम नहीं करता है। इसके अलावा लोगों को डिजिटल चीजों की ज्यादा जानकारी भी नहीं है। अगर लोग डिजिटल वॉलेट का सही इस्तेमाल नहीं कर पाए तो उन्हें राशन लेने में परेशानी हो सकती है। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को लेकर भी कई चिंताएं सामने आ रही हैं। इन सब बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होगा।पुडुचेरी और चंडीगढ़ में भी शुरुआत
पुडुचेरी भी इस हफ्ते मुफ्त राशन के लिए डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद चंडीगढ़ और दूसरे केंद्र शासित प्रदेशों में भी मुफ्त राशन के लिए इस व्यवस्था को लाया जाएगा। इस पहल के तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया उन लोगों के ई-वॉलेट में डिजिटल करेंसी भेजेगा जो मुफ्त राशन पाने के हकदार हैं। धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों में ये काम शुरू हो जाएगा।आगे का रास्ता
सरकार का इरादा अगले तीन से चार सालों में इस योजना को पूरे देश में लागू करने का है। इसका मतलब है कि आने वाले कुछ सालों में देश के हर कोने में ये डिजिटल व्यवस्था पहुंच जाएगी। जानकारों का कहना है कि अगर ये योजना सफल हो जाती है तो भारत सामाजिक भलाई के कामों में डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल का एक बहुत बड़ा उदाहरण बन सकता है। इससे सब्सिडी बांटने के काम में बहुत सुधार आएगा और सब काम सुरक्षित तरीके से होगा।दुनिया के दूसरे देश भी डिजिटल तरीके से मदद पहुंचाने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका में सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम और ब्राजील में बोल्सा फेमिलिया जैसे प्रोग्राम बहुत पहले से इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं यूके का हेल्दी स्टार्ट प्रोग्राम भी लोगों को पोषण देने के लिए प्रीपेड कार्ड का इस्तेमाल करता है। इन सब देशों ने भी अपने तरीके से काम किया है। लेकिन भारत का सीधे सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी के साथ जुड़ना देश को पूरी दुनिया में सबसे आगे ला खड़ा करता है। ये दुनिया भर के लिए एक नई राह दिखाने वाला कदम है।
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