यूक्रेन युद्ध के बीच रूस में बढ़ा पुतिन का दबदबा! संसदीय चुनाव जीती 'यूनाइटेड रशिया', जानिए इस जीत के पीछे का गणित
रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्ता के लिए एक अहम चुनावी परीक्षा पूरी हो गई है। 18 से 20 सितंबर 2026 के बीच हुए रूस के संसदीय चुनाव में शुरुआती आधिकारिक नतीजों में United Russia ने बड़ी बढ़त बना ली है। 21 सितंबर की सुबह तक करीब 93% मतों की गिनती में पार्टी को लगभग 57.83% वोट मिले थे। 2021 के पिछले संसदीय चुनाव में United Russia को 49.82% वोट मिले थे।रूस की 450 सदस्यीय State Duma में आधी सीटें पार्टी लिस्ट के आधार पर और आधी सिंगल-मेंबर निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं। शुरुआती आंकड़ों में United Russia के उम्मीदवार 225 में से 208 सिंगल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रहे थे। इसका मतलब है कि पार्टी संसद में दो-तिहाई बहुमत बनाए रखने की स्थिति में है।
पहली बार यूक्रेन युद्ध के बाद हुआ संसदीय चुनावयह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद यह पहला संसदीय चुनाव था। पुतिन और क्रेमलिन ने मतदान को रूस की एकता और युद्ध के बीच सरकार के समर्थन के प्रदर्शन के रूप में पेश किया।
चुनाव में करीब 11.1 करोड़ मतदाता वोट देने के पात्र थे और आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मतदान प्रतिशत लगभग 57% रहा, जो 2021 के 51.72% से ज्यादा है।
जीत का गणित क्या है?United Russia की बढ़त को समझने के लिए सिर्फ वोट प्रतिशत देखना काफी नहीं है। इसके पीछे कई राजनीतिक और चुनावी परिस्थितियां हैं।
पहला कारण—पुतिन का समर्थन:
दूसरा कारण—विपक्ष की सीमित मौजूदगी:
इस चुनाव में पुतिन की नीतियों और युद्ध का खुलकर विरोध करने वाले राजनीतिक विकल्पों की मौजूदगी काफी सीमित रही। रूस की Supreme Court ने Yabloko को राष्ट्रीय पार्टी-लिस्ट बैलेट से बाहर कर दिया था। कई युद्ध-विरोधी नेताओं को जेल हुई या वे देश छोड़ चुके हैं।
तीसरा कारण—अन्य बड़ी पार्टियों का रुख:
93% मतों की गिनती तक आधिकारिक आंकड़ों में United Russia करीब 57.83% वोट के साथ सबसे आगे थी।
इसके बाद Communist Party को करीब 13.81%, LDPR को 8.93% और New People को 7.97% वोट मिले। A Just Russia करीब 4.96% पर थी, जो संसद में पार्टी-लिस्ट सीट के लिए जरूरी 5% सीमा से थोड़ा नीचे थी।
हालांकि State Duma की पूरी तस्वीर पार्टी-लिस्ट वोट से तय नहीं होती, क्योंकि 225 सीटें सीधे निर्वाचन क्षेत्रों से भी चुनी जाती हैं।
यूक्रेन युद्ध के बीच चुनाव पर क्यों उठे सवाल?चुनाव के दौरान रूस पर यूक्रेन की ओर से बड़े ड्रोन हमले भी हुए। रूसी अधिकारियों ने चुनाव के दौरान साइबर हमलों की भी जानकारी दी। दूसरी तरफ यूक्रेन ने रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में मतदान को अवैध बताया है। यूरोपीय संघ ने भी इन क्षेत्रों में रूसी चुनाव कराने को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
रूस में चुनाव प्रक्रिया को लेकर आलोचकों ने भी सवाल उठाए हैं। कई स्वतंत्र और युद्ध-विरोधी राजनीतिक आवाजों को चुनावी प्रक्रिया में सीमित किया गया, जबकि रूस ने इन प्रतिबंधों और चुनाव व्यवस्था का अपना पक्ष रखा है। इसलिए इन नतीजों को सिर्फ सामान्य चुनावी प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखना विवादित है।
क्या यह जीत सीधे पुतिन के लिए जनमत साबित करती है?क्रेमलिन इन नतीजों को पुतिन की नीतियों और यूक्रेन युद्ध के प्रति समर्थन के संकेत के तौर पर पेश कर सकता है। लेकिन चुनाव में वास्तविक विपक्ष की सीमित मौजूदगी और युद्ध-विरोधी उम्मीदवारों पर प्रतिबंध जैसे कारकों के कारण इन परिणामों को पूरे रूसी समाज की स्वतंत्र राय का सीधा और पूर्ण प्रतिनिधि मानने पर विवाद है।
अब आगे क्या?United Russia के मजबूत प्रदर्शन से रूस की घरेलू राजनीति में क्रेमलिन का संसदीय नियंत्रण जारी रहने की संभावना है। इससे पुतिन सरकार को कानून बनाने और अपनी नीतियों को संसद के भीतर आगे बढ़ाने के लिए मजबूत राजनीतिक आधार मिलता है।
सबसे बड़ा सवाल अब यूक्रेन युद्ध को लेकर है। युद्ध पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है और रूस के भीतर भी इसके आर्थिक और सामाजिक प्रभाव दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद चुनावी नतीजों में United Russia को स्पष्ट बढ़त मिली है।
यानी 2026 का संसदीय चुनाव रूस की राजनीति में एक बड़ा संदेश जरूर देता है—क्रेमलिन और United Russia का संसदीय दबदबा फिलहाल कायम है। लेकिन इन नतीजों को यूक्रेन युद्ध पर पूरे रूसी समाज के स्वतंत्र जनमत के रूप में कैसे देखा जाए, यह अलग और विवादित सवाल है।