वोटर लिस्ट में धांधली या कुछ और? महाराष्ट्र SIR में एक-तिहाई नाम कटने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार और आयोग से मांगा जवाब!
महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई अब 5 नवंबर को होगी।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया था कि मतदाता सूची की अंतिम सूची 6 नवंबर को प्रकाशित होने की प्रस्तावित तारीख को देखते हुए मामले की सुनवाई उससे पहले की जाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने यह मामला उठाया गया। सुनवाई के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, नोटिस भेजे जाने और पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण लोगों के पते बदलने जैसी समस्याओं पर चिंता जताई गई।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 33 फीसदी नाम कटने का दावायाचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी. दातार ने अदालत में दलील दी कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों से संबंधित नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं को अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन देने में कई तरह की व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, नाम हटाए जाने और दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता जरूरी है, ताकि पहले से मतदाता सूची में शामिल लोगों के मतदान के अधिकार पर असर न पड़े।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी. दातार ने चुनाव आयोग की ओर से हटाए गए मतदाताओं को फॉर्म-6 भरने के लिए कहे जाने पर सवाल उठाया।
उन्होंने दलील दी कि फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है। ऐसे में, जो लोग पहले से मतदान करते रहे हैं और जिनके नाम पहले मतदाता सूची में शामिल थे, उनसे दोबारा यही फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया पर विचार किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मतदाता सूची में पहले से दर्ज लोगों के नाम हटने की स्थिति में उन्हें दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट और सुगम होनी चाहिए, ताकि पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हों।
मुंबई और पुणे के पुनर्विकास प्रोजेक्ट भी बने चिंता की वजहसुनवाई के दौरान मुंबई और पुणे में चल रही पुनर्विकास परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों शहरों में लगभग 3,500 रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनके तहत पुरानी हाउसिंग कॉलोनियों को तोड़ा जा रहा है।
इन परियोजनाओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने पुराने घरों से दूसरी जगह जाना पड़ रहा है। दलील दी गई कि पता बदलने या संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा हो सकता है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से इस समस्या पर ध्यान देने की अपील की और कहा कि पुनर्विकास के कारण स्थान बदलने वाले लोगों के मताधिकार की रक्षा के लिए उचित व्यवस्था जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट से मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया रोकने की मांगयाचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
याचिकाकर्ता ने 6 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की प्रस्तावित तारीख का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने फिलहाल समय-सीमा बढ़ाने का आदेश नहीं दिया, लेकिन मामले की जल्द सुनवाई का भरोसा दिलाया।
पीठ ने कहा कि यदि सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने या अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है, तो इस संबंध में उचित निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को क्या भरोसा दिया?सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को आश्वस्त किया कि अदालत मामले पर ध्यान देगी।
CJI ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े दूसरे मामलों में पहले भी समय-सीमा बढ़ाई गई है। अदालत की टिप्पणी से संकेत मिला कि यदि परिस्थितियों में इसकी जरूरत दिखाई देती है, तो मतदाताओं को राहत देने के लिए उचित कदम उठाए जा सकते हैं।
हालांकि, फिलहाल अंतिम मतदाता सूची की समय-सीमा में बदलाव का कोई आदेश नहीं दिया गया है।
अब 5 नवंबर की सुनवाई पर टिकी नजरेंअब देखना होगा कि अदालत चुनाव आयोग से क्या जवाब मांगती है और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया या समय-सीमा को लेकर कोई निर्देश जारी करती है या नहीं। इस मामले का असर महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया, नाम हटाए जाने की शिकायतों और मतदाताओं को अपने नाम सूची में शामिल कराने के अवसर पर पड़ सकता है।