Earthquake Prediction: क्या भूकंप आने से 85 दिन पहले मिल सकता है सिग्नल? वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट डेटा में खोजा पैटर्न
हाल ही में दुनिया भर में आए ज़बरदस्त भूकंप - इंडोनेशिया में M7.7, कोलंबिया में M7.4, जापान में M6.8 और मैक्सिको में M7.3 - ने एक बार फिर इंसानियत के सामने एक डरावना सवाल खड़ा कर दिया है: क्या हम कभी इन जानलेवा भूकंपों की पहले से चेतावनी पा सकेंगे? क्या ऐसा कोई अलार्म सिस्टम बनाना मुमकिन है जो किसी शहर के तबाह होने से पहले लोगों को सुरक्षित जगह पहुँचा सके?
कई दशकों से, मॉडर्न जियोफिजिक्स (भू-भौतिकी) का मानना रहा है कि भूकंप की सही भविष्यवाणी समय रहते करना लगभग नामुमकिन है। इंसानों के लिए यह पता लगाना मुश्किल रहा है कि ज़मीन की सतह से 10 से 50 किलोमीटर नीचे मौजूद फॉल्ट लाइनों पर जमा तनाव (स्ट्रेस) कब, कहाँ और कितनी तेज़ी से अचानक रिलीज़ होगा। हालाँकि, अब वैज्ञानिक दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। धरती के अंदर के रहस्यों को जानने के लिए, वैज्ञानिकों ने ज़मीन से नज़र हटाकर आसमान और अंतरिक्ष की गहराइयों की ओर देखना शुरू कर दिया है।
खास बात यह है कि प्रतिष्ठित जर्नल 'नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स' में छपी एक अहम स्टडी और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के 'स्वार्म' सैटेलाइट्स ने दुनिया का ध्यान खींचा है। रिसर्च से पता चलता है कि जब धरती के अंदर गहराई में कोई विनाशकारी भूकंप आता है, तो अंतरिक्ष में सैकड़ों किलोमीटर ऊपर चक्कर लगा रहे सैटेलाइट्स से भेजे जाने वाले डेटा में उसके आने के संकेत दिखने लगते हैं। धरती की टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाली हलचल अंतरिक्ष में मैग्नेटिक फील्ड और आयनोस्फीयर को कैसे प्रभावित करती है? क्या सैटेलाइट सिग्नल भविष्य में लाखों लोगों की जान बचा सकते हैं? आइए, इस वैज्ञानिक रहस्य को आसान शब्दों में समझते हैं...
कांपती धरती