जेब में थे सिर्फ 1,400 रुपये! इस भारतीय ने विदेश जाकर रचा इतिहास, आज बने ₹883 करोड़ के रिटेल किंग
भारत से कई लोग बेहतर करियर और अवसरों की तलाश में विदेश जाते हैं। इनमें से कुछ लोग नौकरी से शुरुआत करके आगे चलकर अपना बड़ा कारोबार खड़ा कर लेते हैं। ऐसी ही एक कहानी है केरल के रहने वाले रामचंद्रन ओट्टापाथु की, जिन्होंने बोत्सवाना जाकर अपनी किस्मत बदली और रिटेल सेक्टर में बड़ा नाम बनाया।आज वह चॉपीज (Choppies) जैसे बड़े रिटेल कारोबार से जुड़े हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ करीब 883 करोड़ रुपये
रामचंद्रन ओट्टापाथु का जन्म केरल के त्रिशूर जिले के ओल्लूर में हुआ था। यह इलाका टाइल और लकड़ी के कारोबार के लिए जाना जाता है। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और उनके पिता बुनकर थे।
ओट्टापाथु ने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी और चार्टर्ड अकाउंटेंसी की परीक्षा पहली ही कोशिश में पास कर ली। इसके बाद उन्हें विदेश में नौकरी का मौका मिला।
साल 1992 में वह बोत्सवाना पहुंचे
उनके लिए बोत्सवाना बिल्कुल नई जगह थी, लेकिन आने वाले वर्षों में यही देश उनके करियर और बिजनेस की सबसे बड़ी जमीन बन गया।
10 साल की उम्र में भाई को खो दियाओट्टापाथु का बचपन भी आसान नहीं रहा। जब वह सिर्फ 10 साल के थे, तब उनके 17 वर्षीय बड़े भाई बालकृष्णन की सांप के काटने से मौत हो गई।
इस घटना के बाद परिवार पर मुश्किलों का दौर आया। उनके पिता भी शराब की लत और निराशा से जूझने लगे। ऐसे हालात में परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गईं और ओट्टापाथु ने कम उम्र से ही मेहनत और संघर्ष को करीब से देखा।
इन्हीं परिस्थितियों ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अकाउंटेंट की नौकरी से की शुरुआतबोत्सवाना पहुंचने के बाद रामचंद्रन ओट्टापाथु ने एक रिटेल बिजनेस में अकाउंटेंट के तौर पर काम शुरू किया। उस समय कंपनी मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल सामान बेचती थी।
लेकिन ओट्टापाथु ने जल्द ही बाजार की जरूरतों को समझना शुरू कर दिया। उन्हें महसूस हुआ कि आम और कम आय वाले ग्राहकों के लिए सस्ती रोजमर्रा की ग्रोसरी उपलब्ध कराने के क्षेत्र में बड़ा अवसर मौजूद है।
उन्होंने अकाउंटिंग की नौकरी तक सीमित रहने के बजाय बिजनेस में बदलाव का सुझाव दिया।
इलेक्ट्रॉनिक्स से ग्रोसरी कारोबार की ओर किया रुखओट्टापाथु ने कारोबार की रणनीति बदलते हुए इलेक्ट्रिकल सामान की जगह ग्रोसरी और सब्जियों
उन्होंने दुकान के कामकाज का समय भी बढ़ाया। पहले जहां दुकान शाम 5 बजे तक खुलती थी, वहीं बाद में इसे रात 8 बजे तक चलाया जाने लगा।
यह बदलाव कारोबार के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ। साल 1993 में दूसरा स्टोर खोला गया और आगे चलकर कंपनी ने बोत्सवाना के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार करना शुरू किया।
‘फ्रेंडली ग्रोसर’ से चॉपीज तक का सफरसाल 1999 में गैबोरोन में पहला ‘फ्रेंडली ग्रोसर’
समय के साथ यही कारोबार Choppies के नाम से बड़े रिटेल नेटवर्क में बदल गया।
साल 2012 में चॉपीज बोत्सवाना स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह उस समय एक्सचेंज के इतिहास के सबसे बड़े IPO में से एक था। कंपनी ने IPO के जरिए करीब 350 मिलियन बोत्सवाना पुला
तब तक कंपनी बोत्सवाना की प्रमुख ग्रोसरी रिटेल चेन में शामिल हो चुकी थी।
रियल एस्टेट और दूसरे कारोबार में भी विस्ताररिटेल कारोबार के अलावा ओट्टापाथु ने दूसरे बिजनेस में भी निवेश किया। साल 2010 में उन्होंने फारूक इस्माइल के साथ मिलकर एक प्रॉपर्टी कंपनी में हिस्सेदारी हासिल की। रिपोर्ट्स के अनुसार इस कंपनी में ओट्टापाथु की हिस्सेदारी 28 फीसदी से ज्यादा है।
इसके अलावा उन्होंने कारोबार का विस्तार दूसरे देशों में भी किया।
भारत से भी जुड़ा है कारोबाररामचंद्रन ओट्टापाथु का बिजनेस कनेक्शन भारत से भी बना हुआ है। वह योगक्षेमम लोन्स लिमिटेड
कंपनी गोल्ड लोन, व्हीकल लोन, टर्म लोन और बिजनेस लोन जैसी वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराती है।
200 पुला से करोड़ों की दौलत तकरामचंद्रन ओट्टापाथु की कहानी इस बात का उदाहरण है कि विदेश जाकर नौकरी करने वाला व्यक्ति बाजार की जरूरतों को समझकर किस तरह बिजनेस में बड़ा बदलाव ला सकता है।
बोत्सवाना पहुंचते समय जेब में सिर्फ 200 पुला से शुरुआत करने वाले ओट्टापाथु ने धीरे-धीरे रिटेल कारोबार में अपनी पहचान बनाई और आज उनकी संपत्ति करोड़ों रुपये में बताई जाती है।