वोटर लिस्ट का झोल और CJI का मरहम: नाम कटने से डरे लोगों को सुप्रीम कोर्ट की दो टूक- 'फिक्र न करें'

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दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के 3 नवंबर को जारी स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से जिन पुराने मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने को कहा जा रहा है। जबकि कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि 2026 की मतदाता सूची में शामिल रहे और SIR के दौरान जिनके नाम हटाए गए हैं, उन्हें नए मतदाता की तरह फॉर्म-6 भरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लोगों को राहत देते हुए कहा कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की निगरानी कर रहा है। अदालत चुनाव आयोग से फॉर्म भरने की समयसीमा बढ़ाने के लिए भी कह सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।

CJI सूर्यकांत बोले- लोगों को घबराने की जरूरत नहीं

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और फॉर्म-6 की प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। उनका कहना था कि पहले से वोटर के रूप में रजिस्टर्ड लोगों को दोबारा नए मतदाता की तरह आवेदन करने के लिए कहना सही नहीं है।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले को देख रहा है और जरूरत पड़ने पर चुनाव आयोग से फॉर्म जमा करने की समयसीमा बढ़ाने को कहा जा सकता है।

अदालत की इस टिप्पणी से उन मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके नाम SIR की ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं और जो दोबारा नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं।

चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को क्या स्पष्टीकरण दिया था?

दरअसल, चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को स्पष्ट किया था कि अगर किसी मतदाता का नाम SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है तो वह फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है।

आयोग के मुताबिक, भले ही कोई व्यक्ति पिछले 10 साल या उससे अधिक समय से मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड हो, लेकिन ड्राफ्ट लिस्ट में नाम नहीं होने पर उसे फॉर्म-6 के जरिए आवेदन करना होगा।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि पुराने मतदाताओं द्वारा फॉर्म-6 भरने को झूठा शपथ पत्र नहीं माना जाएगा और इस आधार पर उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

फॉर्म-6 में गलत जानकारी देने पर हो सकती है एक साल की सजा

फॉर्म-6 को लेकर मतदाताओं के बीच सबसे ज्यादा भ्रम इसके डिक्लेरेशन वाले हिस्से को लेकर था। दरअसल, इस फॉर्म में आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि उसका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है।

वहीं, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत गलत जानकारी या झूठी घोषणा देने पर एक साल तक की सजा का प्रावधान है।

ऐसे में पहले से वोटर लिस्ट में शामिल लोगों को डर था कि अगर वे फॉर्म-6 में पहली बार नाम जुड़वाने की घोषणा करते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसी आशंका के चलते कई पुराने मतदाता दोबारा आवेदन करने से बच रहे थे।

चुनाव आयोग ने अब इस डर को दूर करने के लिए स्पष्ट किया है कि SIR में नाम हटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने वाले पुराने मतदाताओं की इस प्रक्रिया को झूठा डिक्लेरेशन नहीं माना जाएगा।

SIR में कितने लोगों के नाम हटाए गए?

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर देशभर में राजनीतिक और कानूनी बहस चल रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बिहार समेत कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।

दिल्ली की बात करें तो यहां करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47 लाख नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से पुराने मतदाताओं के बीच अपने नाम की स्थिति जानने और दोबारा पंजीकरण कराने को लेकर चिंता बढ़ी है।

वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो क्या करें?

अगर आपका नाम SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है तो सबसे पहले अपनी मतदाता स्थिति की जांच करें। इसके लिए चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर EPIC नंबर की मदद से नाम चेक किया जा सकता है।

नाम नहीं मिलने पर फॉर्म-6 के जरिए आवेदन करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसके साथ जरूरी घोषणा और दस्तावेज भी जमा करने होंगे।

दस्तावेजों को लेकर उम्र के आधार पर अलग-अलग नियम बताए गए हैं:

  • 1987 से पहले जन्मे मतदाता: अपना एक निर्धारित दस्तावेज देना होगा।

  • 1987 से 2004 के बीच जन्मे मतदाता: अपने दस्तावेज के साथ माता या पिता में से किसी एक का दस्तावेज देना होगा।

  • 2004 के बाद जन्मे मतदाता: अपने साथ माता और पिता दोनों के निर्धारित दस्तावेज देने होंगे।

इसके अलावा बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) भी घर-घर जाकर मतदाताओं की सहायता कर रहे हैं और फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया में मदद कर रहे हैं।

फॉर्म-6 से 2003 की वोटर लिस्ट से जुड़ी घोषणा भी हटाई गई

चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 की प्रक्रिया को लेकर पहले भी बदलाव किए हैं। अक्टूबर में किए गए संशोधन के बाद SIR प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में नए सिरे से नाम जुड़वाने वाले आवेदकों के लिए 2003 की मतदाता सूची से संबंधित अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया गया था।

इस बदलाव के बाद आवेदकों को यह बताने की जरूरत नहीं होगी कि उनका नाम या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में शामिल था या नहीं।

इससे उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज जुटाने में परेशानी हो रही थी।

19 नवंबर को फिर होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

दिल्ली में SIR प्रक्रिया को लेकर दाखिल याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को अगली सुनवाई करेगा। इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत रहे लोगों को ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटने के बाद दोबारा नए मतदाता की तरह फॉर्म-6 भरने के लिए किस हद तक बाध्य किया जा सकता है।

फिलहाल CJI की टिप्पणी से मतदाताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन फॉर्म-6 की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर अंतिम स्थिति अगली सुनवाई और चुनाव आयोग के निर्देशों के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में मतदाताओं को सलाह है कि वे अपनी वोटर लिस्ट में नाम की स्थिति जरूर जांचें और आधिकारिक निर्देशों के अनुसार ही आवेदन करें।