दमन कलेक्टर ने थार-फॉर्च्यूनर मालिकों को दिलाई शपथ, बोले- सड़क पर दिखाएं जिम्मेदारी
दमन में सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने एक ऐसी मुहिम शुरू की है, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। दमन के जिला कलेक्टर सौरभ मिश्रा ने महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर के मालिकों को एक साथ बुलाकर सुरक्षित और जिम्मेदार ड्राइविंग की शपथ दिलाई। इस अनोखे अभियान का संदेश था- 'भाईगिरी कूल नहीं है, जिम्मेदारी कूल है।' कार्यक्रम में 150 से ज्यादा एसयूवी और उनके मालिक शामिल हुए।
थार-फॉर्च्यूनर की कतार, मालिकों ने ली शपथदमन के ट्रांसपोर्ट नगर में आयोजित 'Thar/Fortuner Sankalp Yatra'
कलेक्टर सौरभ मिश्रा ने वाहन मालिकों से अपील की कि वे अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल रुतबा दिखाने या सड़क पर दबदबा बनाने के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ करें। प्रशासन की ओर से इस कार्यक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जिसके बाद यह पहल चर्चा में आ गई।
'थार का मतलब जिम्मेदारी'कलेक्टर मिश्रा ने थार को 'भाईगिरी' या 'रफियनगिरी' से जोड़ने की धारणा पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 'थार का मतलब जिम्मेदारी'
प्रशासन का संदेश साफ था कि बड़ी और दमदार एसयूवी सड़क पर दूसरे लोगों के लिए डर का कारण नहीं, बल्कि जिम्मेदार व्यवहार की पहचान बननी चाहिए।
न रफ्तार, न स्टंट और न ड्रिंक एंड ड्राइवशपथ के दौरान वाहन मालिकों ने तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी नहीं चलाने का संकल्प लिया। उन्होंने सड़क पर रेसिंग, ड्रिफ्टिंग और स्टंट नहीं करने
इसके अलावा गाड़ियों में बिना अनुमति किए गए बदलावों को हटाने पर भी जोर दिया गया। इनमें टिंटेड ग्लास, अनधिकृत टायर बदलाव, अतिरिक्त लाइट और मॉडिफाइड साउंड सिस्टम जैसी चीजें शामिल हैं। प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
आनंद महिंद्रा को भी किया टैगदमन प्रशासन ने इस अभियान को सोशल मीडिया पर आगे बढ़ाने की अपील की और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा
इस अनोखी पहल का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने कलेक्टर की पहल की तारीफ करते हुए इसे दूसरे शहरों में भी लागू करने की बात कही। बायोकॉन की कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ
दमन प्रशासन की इस पहल का मकसद किसी खास वाहन या उसके सभी मालिकों को गलत ठहराना नहीं, बल्कि सड़क पर जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना है। संदेश यही है कि गाड़ी कितनी भी बड़ी या दमदार हो, सड़क पर असली पहचान रफ्तार या 'भाईगिरी' से नहीं, जिम्मेदारी से बनती है।