लाल सागर में जंग जैसे हालात: यमन का पेरिम द्वीप खाली, बाब अल-मंदेब पर हूती कब्जे से वैश्विक समुद्री व्यापार पर संकट
यमन में हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों ने एक बार फिर लाल सागर की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती लड़ाके अब बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बेहद करीब पहुंच गए हैं। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि यमनी सरकार की सेना ने पेरिम द्वीप से अपना नियंत्रण हटा लिया है और वहां से पीछे हट गई है।
पेरिम द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां नियंत्रण का मतलब बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नजर रखने की बड़ी क्षमता हासिल करना है। द्वीप के ठीक सामने स्थित धुबाब शहर
बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण और संकरा समुद्री रास्ता है। अगर इस इलाके में हूतियों का प्रभाव और बढ़ता है तो यहां से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
10 दिनों से लाल सागर तट पर आगे बढ़ रहे हूतीहूती विद्रोही पिछले करीब 10 दिनों से यमन के लाल सागर तट पर लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मोखा समेत कई रणनीतिक इलाकों
मोखा पर कब्जा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शहर बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
मोखा पर कब्जे के बाद बढ़ी चिंताहूतियों ने गुरुवार को यमन के लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किया था। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस अभियान में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC)
हालांकि, ईरान सार्वजनिक तौर पर हूतियों को सैन्य निर्देश देने या अभियान चलाने में मदद करने से इनकार करता रहा है।
बाब अल-मंदेब दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है और इसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।
यह चिंता ऐसे समय बढ़ी है जब ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट
तेहरान की गतिविधियों से परिचित एक क्षेत्रीय राजनयिक ने दावा किया है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई वरिष्ठ कमांडर पहले से यमन में मौजूद हैं। उनके मुताबिक, इन अधिकारियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हूतियों के हमलों की निगरानी की और रणनीति बनाने में भूमिका निभाई।
राजनयिक का कहना है कि हूतियों के हमलों की रणनीति को लेकर कई हफ्तों तक चर्चा हुई थी।
एक अन्य ईरानी अधिकारी के मुताबिक, ईरान ने हूतियों समेत अपने सहयोगी समूहों के साथ कई बैठकें की थीं। हालांकि, उनका दावा है कि मोखा पर हमला करने का फैसला हूतियों ने खुद लिया था।
यमन की सऊदी समर्थित सरकार से जुड़े कई सैन्य अधिकारियों ने भी दावा किया है कि लाल सागर तट पर हूतियों के हालिया अभियान में ईरान की मदद मिली थी।
यमनी सैन्य सूत्रों ने पकड़े गए हूती लड़ाकों से मिली जानकारी के आधार पर दावा किया है कि IRGC की कुद्स फोर्स से जुड़े वरिष्ठ कमांडर अब्दोलरेजा शहलाई
ईरानी सूत्रों का दावा है कि यमन में हूती इलाकों पर हवाई और समुद्री नाकेबंदी के बावजूद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स हथियार और सैन्यकर्मी यमन के अंदर और बाहर पहुंचाने में सक्षम हैं। हालांकि, इन हथियारों और लोगों को किस तरीके से पहुंचाया जा रहा है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के विशेषज्ञ अहमद नागी
उनका कहना है कि हूतियों की सैन्य क्षमता बढ़ने के पीछे नए हथियारों की बड़ी भूमिका है। इनमें कथित तौर पर ईरान से मिले हथियारों के अलावा तस्करी नेटवर्क के जरिए हासिल किए गए हथियार भी शामिल हैं। मौजूदा अभियान में ड्रोन के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।
सऊदी अरब ने मोखा पर नहीं की बड़ी एयरस्ट्राइकजब हूती लड़ाके मोखा की ओर बढ़ रहे थे, तब यमनी सरकार ने सऊदी अरब से ज्यादा हवाई और सैन्य सहायता मांगी थी। यमनी अधिकारियों के मुताबिक, सरकार चाहती थी कि सऊदी अरब हूतियों के प्रमुख ठिकानों पर बड़े हवाई हमले करे।
इनमें राजधानी सना
हालांकि, सऊदी अरब ने मोखा मोर्चे पर कोई बड़ा हवाई अभियान नहीं चलाया। उसने यमन को हथियार, लॉजिस्टिक सहायता और खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई। कुछ हवाई हमले जरूर किए गए, लेकिन उनका मुख्य फोकस जौफ और मारिब जैसे उत्तरी इलाकों पर रहा।
यमनी अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के साथ बड़े सैन्य टकराव से बचना चाहता है। आशंका है कि ऐसा होने पर हूती सऊदी क्षेत्र में ड्रोन हमले और तेज कर सकते हैं।
ट्रम्प ने सऊदी की एयरस्ट्राइक की मांग ठुकराईहूतियों के खिलाफ सऊदी अरब को अमेरिका से सीधे हवाई हमलों की उम्मीद थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान
हालांकि, अमेरिका सऊदी अरब को खुफिया और सैन्य सहायता देना जारी रखे हुए है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, 100 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य सलाहकार सऊदी अरब में मौजूद हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने यह संख्या करीब 200 बताई है।
ये अमेरिकी सैन्यकर्मी सऊदी सेना को हूतियों से जुड़ी खुफिया जानकारी और संभावित लक्ष्यों की पहचान में मदद कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी सैनिक हूतियों के खिलाफ होने वाले हवाई हमलों में सीधे शामिल नहीं हैं।
फिलहाल अमेरिका सीधे सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए हुए है। ऐसे में मोखा और पेरिम द्वीप के बाद हूतियों को रोकने के लिए सऊदी अरब और यमन सरकार की अगली रणनीति क्या होगी