PPF Account Rules: क्या आप भी खोलना चाहते हैं एक से ज्यादा पीपीएफ खाते? पहले जान लें ये जरूरी नियम
जब बात सुरक्षित निवेश और टैक्स बचाने की आती है, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ (PPF) भारतीयों की पहली पसंद बनकर उभरता है। सरकारी गारंटी और आकर्षक ब्याज दर के कारण मध्यम वर्ग के बीच यह योजना बेहद लोकप्रिय है। लेकिन कई बार निवेशकों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या हम एक से ज्यादा पीपीएफ खाते खोल सकते हैं? क्या अलग-अलग बैंकों में खाते रखकर ज्यादा ब्याज कमाया जा सकता है?
अगर आपके मन में भी ऐसे ही सवाल हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए जानते हैं पीपीएफ से जुड़े उन नियमों के बारे में जो हर निवेशक को पता होने चाहिए।
क्या एक से अधिक पीपीएफ खाते खोलना मुमकिन है?
नियमों के मुताबिक, कोई भी भारतीय नागरिक अपने नाम पर केवल एक ही पीपीएफ खाता रख सकता है। चाहे आप किसी सरकारी बैंक में खाता खोलें, निजी बैंक में या फिर पोस्ट ऑफिस में, आपके पास पूरे देश में सिर्फ एक ही सक्रिय पीपीएफ अकाउंट होना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति अनजाने में या जानबूझकर एक से ज्यादा पीपीएफ खाते खोल लेता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाता है। ऐसी स्थिति में दूसरे खाते को 'अनियमित' घोषित कर दिया जाता है। इसका नुकसान यह होता है कि दूसरे खाते पर आपको कोई ब्याज नहीं मिलता और न ही उस पर कोई टैक्स छूट का लाभ मिलता है।
बच्चों के नाम पर खाते का क्या है नियम?
यहाँ एक छोटा सा अपवाद है जिसे समझना जरूरी है। एक अभिभावक के रूप में आप अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर दूसरा खाता खोल सकते हैं। लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि मुख्य खाताधारक और नाबालिग के खाते, दोनों को मिलाकर एक वित्तीय वर्ष में कुल निवेश की सीमा 1.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर आप दोनों खातों में मिलाकर 1.5 लाख से ज्यादा जमा करते हैं, तो अतिरिक्त राशि पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा।
दो खाते खुल गए हों तो क्या करें?
अगर आपसे गलती से दो खाते खुल गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इन दोनों खातों को आपस में मर्ज (Merge) करवा सकते हैं। इसके लिए आपको आर्थिक कार्य विभाग को एक आवेदन देना होता है। वेरिफिकेशन के बाद आपके दोनों खातों की राशि को एक मुख्य खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है और दूसरा खाता बंद कर दिया जाता है। हालांकि, यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है, इसलिए शुरुआत में ही सावधानी बरतना बेहतर है।
निवेश की सीमा और फायदे
पीपीएफ में निवेश की न्यूनतम सीमा 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये सालाना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी 'EEE' कैटेगरी है। इसका मतलब है कि आपके द्वारा किया गया निवेश, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी के समय मिलने वाली पूरी राशि टैक्स-फ्री होती है।
पीपीएफ एक शानदार लंबी अवधि का निवेश है, लेकिन इसके नियमों की जानकारी होना भी उतना ही आवश्यक है। एक से अधिक खाता खोलकर आप कानूनन मुश्किल में पड़ सकते हैं और अपना ब्याज भी गंवा सकते हैं। इसलिए सुरक्षित निवेश करें और नियमों का पालन करते हुए अपने भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएं।
अगर आपके मन में भी ऐसे ही सवाल हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए जानते हैं पीपीएफ से जुड़े उन नियमों के बारे में जो हर निवेशक को पता होने चाहिए।
क्या एक से अधिक पीपीएफ खाते खोलना मुमकिन है?
नियमों के मुताबिक, कोई भी भारतीय नागरिक अपने नाम पर केवल एक ही पीपीएफ खाता रख सकता है। चाहे आप किसी सरकारी बैंक में खाता खोलें, निजी बैंक में या फिर पोस्ट ऑफिस में, आपके पास पूरे देश में सिर्फ एक ही सक्रिय पीपीएफ अकाउंट होना चाहिए।यदि कोई व्यक्ति अनजाने में या जानबूझकर एक से ज्यादा पीपीएफ खाते खोल लेता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाता है। ऐसी स्थिति में दूसरे खाते को 'अनियमित' घोषित कर दिया जाता है। इसका नुकसान यह होता है कि दूसरे खाते पर आपको कोई ब्याज नहीं मिलता और न ही उस पर कोई टैक्स छूट का लाभ मिलता है।
बच्चों के नाम पर खाते का क्या है नियम?
यहाँ एक छोटा सा अपवाद है जिसे समझना जरूरी है। एक अभिभावक के रूप में आप अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर दूसरा खाता खोल सकते हैं। लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि मुख्य खाताधारक और नाबालिग के खाते, दोनों को मिलाकर एक वित्तीय वर्ष में कुल निवेश की सीमा 1.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर आप दोनों खातों में मिलाकर 1.5 लाख से ज्यादा जमा करते हैं, तो अतिरिक्त राशि पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा।दो खाते खुल गए हों तो क्या करें?
अगर आपसे गलती से दो खाते खुल गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इन दोनों खातों को आपस में मर्ज (Merge) करवा सकते हैं। इसके लिए आपको आर्थिक कार्य विभाग को एक आवेदन देना होता है। वेरिफिकेशन के बाद आपके दोनों खातों की राशि को एक मुख्य खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है और दूसरा खाता बंद कर दिया जाता है। हालांकि, यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है, इसलिए शुरुआत में ही सावधानी बरतना बेहतर है। निवेश की सीमा और फायदे
पीपीएफ में निवेश की न्यूनतम सीमा 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये सालाना है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी 'EEE' कैटेगरी है। इसका मतलब है कि आपके द्वारा किया गया निवेश, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी के समय मिलने वाली पूरी राशि टैक्स-फ्री होती है। पीपीएफ एक शानदार लंबी अवधि का निवेश है, लेकिन इसके नियमों की जानकारी होना भी उतना ही आवश्यक है। एक से अधिक खाता खोलकर आप कानूनन मुश्किल में पड़ सकते हैं और अपना ब्याज भी गंवा सकते हैं। इसलिए सुरक्षित निवेश करें और नियमों का पालन करते हुए अपने भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएं।
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