बाजार गिरने पर घबराएं नहीं, SIP जारी रखें
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) आज भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का सबसे लोकप्रिय तरीका बन चुका है। लाखों निवेशक हर महीने छोटी-छोटी रकम निवेश करके लॉन्ग टर्म में बड़ा फंड बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब भी शेयर बाजार में गिरावट आती है, कई निवेशक अपने SIP को रोकने या बंद करने के बारे में सोचने लगते हैं। हालांकि, SIP का इतिहास और विशेषज्ञों की राय यह दिखाती है कि यह फैसला अक्सर गलत साबित होता है।
SIP की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह Rupee Cost Averaging का फायदा देता है। जब बाजार नीचे होता है, तब उसी रकम में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, और जब बाजार ऊपर होता है, तो कम यूनिट्स मिलती हैं। इस तरह, लंबे समय में निवेश की औसत लागत बैलेंस हो जाती है। यही कारण है कि बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP निवेशक बेहतर औसत रिटर्न कमा सकते हैं।
इतिहास भी यही बताता है कि जिन्होंने लॉन्ग टर्म तक SIP जारी रखा है, उन्हें बेहतर रिजल्ट मिले हैं। बाजार में गिरावट के समय SIP रोकने से निवेशक कम कीमत पर मिलने वाले यूनिट्स का फायदा खो देते हैं, जिससे उनका कुल रिटर्न प्रभावित हो सकता है।
SIP की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह Rupee Cost Averaging का फायदा देता है। जब बाजार नीचे होता है, तब उसी रकम में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, और जब बाजार ऊपर होता है, तो कम यूनिट्स मिलती हैं। इस तरह, लंबे समय में निवेश की औसत लागत बैलेंस हो जाती है। यही कारण है कि बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP निवेशक बेहतर औसत रिटर्न कमा सकते हैं।
इतिहास भी यही बताता है कि जिन्होंने लॉन्ग टर्म तक SIP जारी रखा है, उन्हें बेहतर रिजल्ट मिले हैं। बाजार में गिरावट के समय SIP रोकने से निवेशक कम कीमत पर मिलने वाले यूनिट्स का फायदा खो देते हैं, जिससे उनका कुल रिटर्न प्रभावित हो सकता है।
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