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भारतीय रेलवे में बड़ा बदलाव: अब बिना सिग्नल रुके दौड़ेंगी ट्रेनें, जानें क्या है नया 'कवच' सिस्टम

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भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है। हर रोज करोड़ों यात्री एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए ट्रेनों का सहारा लेते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा और समय की पाबंदी रेलवे के लिए हमेशा से सबसे बड़ी चुनौती रही है। इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए रेल मंत्री ने भारतीय रेलवे में एक नई और आधुनिक प्रणाली को लागू करने की घोषणा की है।
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यह नई प्रणाली कोई साधारण अपडेट नहीं है, बल्कि यह भारतीय रेल के परिचालन के तरीके को पूरी तरह से बदलने वाली तकनीक है। सरकार का मुख्य ध्यान अब 'शून्य दुर्घटना' के लक्ष्य को हासिल करना है। इसके लिए 'कवच' (Kavach) नामक स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली के नए वर्जन को पूरे देश में तेजी से लागू करने की योजना बनाई गई है।

क्या है यह नई प्रणाली और कैसे करेगी काम?

रेलवे जिस नई व्यवस्था को अपना रहा है, उसका नाम 'कवच 4.0' है। यह एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। सरल शब्दों में कहें तो यह एक ऐसा डिजिटल सुरक्षा कवच है जो दो ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकता है। अगर कभी मानवीय गलती की वजह से या घने कोहरे के कारण लोको पायलट सिग्नल नहीं देख पाता है और ट्रेन आगे बढ़ जाती है, तो यह सिस्टम अपने आप सक्रिय हो जाता है। यह तकनीक खुद ही ट्रेन की रफ्तार को कम कर देती है या इमरजेंसी ब्रेक लगाकर उसे रोक देती है।

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इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से भारत में विकसित की गई है। रेल मंत्री के अनुसार, अब इस प्रणाली को मिशन मोड में इंस्टॉल किया जा रहा है। आने वाले समय में हजारों किलोमीटर की पटरियों और सैकड़ों इंजनों को इस तकनीक से लैस कर दिया जाएगा।

सफर होगा सुरक्षित और तेज

अक्सर देखा जाता है कि सर्दियों के मौसम में कोहरे की वजह से ट्रेनें घंटों देरी से चलती हैं। दृश्यता कम होने के कारण ड्राइवर को ट्रेन धीमी चलानी पड़ती है। लेकिन नई प्रणाली के आने के बाद, लोको पायलट के पास कैबिनेट के अंदर ही सिग्नल की पूरी जानकारी होगी। इससे खराब मौसम में भी ट्रेनें अपनी निर्धारित गति से चल सकेंगी और यात्रियों का समय बचेगा।


इसके अलावा, रेलवे अब अपने बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक बना रहा है। पटरियों की क्षमता बढ़ाना, नए स्टेशन बनाना और पुरानी सिग्नल व्यवस्था को हटाकर डिजिटल इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाना इस योजना का अहम हिस्सा है। रेल मंत्री ने साफ किया है कि सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

भविष्य की तैयारी

भारत सरकार का लक्ष्य न केवल वर्तमान ट्रेनों को सुरक्षित बनाना है, बल्कि भविष्य की हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करना है। जिस तरह से वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें पटरियों पर उतर रही हैं, उनके लिए इस तरह की आधुनिक सुरक्षा प्रणाली अनिवार्य हो जाती है।

रेलवे का यह नया सिस्टम न केवल हादसों को रोकने में मददगार होगा, बल्कि यह भारतीय रेलवे की विश्वसनीयता को भी बढ़ाएगा। यह कदम साबित करता है कि अब भारतीय रेल सिर्फ पुरानी पटरियों पर नहीं चल रही, बल्कि तकनीक और सुरक्षा के मामले में वैश्विक मानकों को छूने की कोशिश कर रही है।

रेलवे में होने वाले ये बदलाव आम आदमी के सफर को आरामदायक और तनावमुक्त बनाने के लिए हैं। जब तकनीक और अनुभव एक साथ मिलते हैं, तो विकास की रफ्तार और बढ़ जाती है। रेल मंत्री की यह घोषणा आने वाले वर्षों में देश के कोने-कोने तक एक सुरक्षित और आधुनिक रेल नेटवर्क पहुँचाने का वादा करती है। उम्मीद है कि जल्द ही कवच प्रणाली पूरे भारत में लागू होगी और रेल हादसे इतिहास की बात बन जाएंगे।



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