Vande Bharat Sleeper Train Facilities: जानिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शानदार सुविधाओं के बारे में, देखे अंदर की खूबसूरत फोटो

भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब तक लोग वंदे भारत की चेयर कार में सफर करते थे, लेकिन अब लंबी दूरी के लिए स्लीपर वर्जन भी आ गया है। ये ट्रेन खास तौर पर रात के सफर के लिए बनाई गई है ताकि यात्री आराम से सोकर अपनी मंजिल तक पहुंच सकें। इसका सबसे ज्यादा फायदा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लोगों को होगा। हावड़ा से कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच शुरू हुई ये ट्रेन आधुनिकता और रफ्तार का बेहतरीन मेल है।

अंदर का नजारा और डिजाइन

ट्रेन के अंदर कदम रखते ही एक अलग ही दुनिया का अहसास होता है। इसका इंटीरियर डिजाइन बहुत ही सुंदर और प्रीमियम है। इसमें क्रीम और लकड़ी के रंग का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे क्लासिक लुक देता है। सोने के लिए जो बर्थ दी गई हैं, वे काफी गद्देदार और आरामदायक हैं। हर यात्री के लिए अलग से रीडिंग लाइट और चार्जिंग सॉकेट की व्यवस्था है। ऊपर की बर्थ पर चढ़ने के लिए सीढ़ियों को भी बहुत अच्छे तरीके से डिजाइन किया गया है, ताकि किसी को चढ़ने में परेशानी न हो। ट्रेन के अंदर जगह काफी खुली-खुली लगती है, जिससे भीड़भाड़ का अहसास नहीं होता।

ऑटोमैटिक दरवाजे और बाहरी बनावट

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की एक बड़ी खासियत इसके दरवाजे हैं। ट्रेन के दरवाजे पूरी तरह से ऑटोमैटिक हैं, जो मेट्रो ट्रेन की तरह खुलते और बंद होते हैं। इससे चढ़ने और उतरने में आसानी होती है और धूल-मिट्टी भी अंदर नहीं आती। बाहर से देखने पर ट्रेन का डिजाइन बहुत ही शानदार लगता है। इसका आगे का हिस्सा नुकीला बनाया गया है, जिसे एयरोडायनामिक डिजाइन कहते हैं। इससे ट्रेन तेज रफ्तार में भी हवा को चीरते हुए आसानी से आगे बढ़ती है और हिलती नहीं है।

साफ-सफाई और हाईटेक वॉशरूम

सफर के दौरान साफ-सफाई सबसे जरूरी होती है और इस ट्रेन में इसका पूरा ख्याल रखा गया है। इसके वॉशरूम हवाई जहाज जैसे बनाए गए हैं। इसमें बायो-वैक्यूम टॉयलेट लगे हैं, जो बदबू नहीं आने देते। नल और साबुन के लिए सेंसर का इस्तेमाल किया गया है, यानी बिना छुए ही पानी और साबुन मिल जाएगा। वॉशरूम को साफ रखने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। फर्स्ट एसी के यात्रियों के लिए गर्म पानी से नहाने (शॉवर) की सुविधा भी दी गई है, जो ट्रेन के सफर में एक नया अनुभव है।

यात्रियों के लिए अलग-अलग कोच

इस ट्रेन में हर तरह के यात्रियों की जरूरत का ध्यान रखा गया है। इसमें तीन तरह के कोच हैं - एसी फर्स्ट क्लास, एसी टू टियर और एसी थ्री टियर। कुल मिलाकर 16 डिब्बे हैं, जिनमें 800 से ज्यादा लोग सफर कर सकते हैं। फर्स्ट क्लास के केबिन बहुत ही लग्जरी हैं और इनमें प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा गया है। थ्री टियर और टू टियर कोच में भी काफी जगह है और सफर आरामदायक बनाने के लिए खिड़कियों पर विशेष पर्दे लगाए गए हैं।

सुरक्षा और तकनीक में सबसे आगे

सुरक्षा के मामले में ये ट्रेन बहुत ही बेहतरीन है। इसमें 'कवच' सिस्टम लगा है, जो दो ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकता है। अगर ड्राइवर किसी कारण से ब्रेक लगाना भूल जाए, तो ये सिस्टम अपने आप ट्रेन को रोक देता है। इसके अलावा, हर कोच में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अगर किसी यात्री को कोई परेशानी होती है, तो वो टॉक-बैक यूनिट के जरिए सीधे ड्राइवर या गार्ड से बात कर सकता है। ट्रेन की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है, लेकिन इसके सस्पेंशन इतने अच्छे हैं कि अंदर बैठे लोगों को झटके महसूस नहीं होते।

कनेक्टिविटी और विकास को रफ्तार

प्रधानमंत्री ने इस ट्रेन की शुरुआत करके रेलवे के विकास में एक और अध्याय जोड़ा है। ये ट्रेन हावड़ा और पूर्वोत्तर भारत के बीच की दूरी को कम समय में तय करती है। इससे न सिर्फ आम यात्रियों को फायदा होगा, बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। रास्ते में ये ट्रेन कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकती है, जिससे छोटे शहरों के लोग भी इस आधुनिक सेवा का लाभ उठा सकते हैं। ये ट्रेन सही मायनों में नए भारत की नई तस्वीर पेश करती है।
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