स्मार्ट सिटी मिशन: जानिए कैसे बदल रही है भारत के शहरों की तस्वीर

साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत की थी। सरकार इस परियोजना को देश भर में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने और आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से लेकर आई थी। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग 31% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 63% का योगदान देती थी। अनुमान बताते हैं कि आने वाले समय में देश की लगभग 40% आबादी शहरों में निवास करेगी, जिनका जीडीपी में योगदान 75% तक हो जाएगा। आइए भारत के इस स्मार्ट सिटी मिशन के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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क्या है स्मार्ट सिटी मिशन?

स्मार्ट सिटी मिशन सरकार की एक प्रमुख योजना थी, जिसे 25 जून 2015 को लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य बेहतर बुनियादी ढांचे, तकनीक और टिकाऊ शहरी विकास के माध्यम से शहरों में रहने वाले लोगों के जीवन को अधिक सुगम और कुशल बनाना था।


इस मिशन को केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया गया। इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने चुने गए शहरों को 5 साल की अवधि में ₹500 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान की, जिसमें राज्यों ने भी बराबर का योगदान दिया।

5 वर्षों के दौरान स्मार्ट सिटी मिशन के लिए कुल 100 शहरों का चयन किया गया था। पश्चिम बंगाल ने इस पहल में भाग नहीं लिया, जबकि मुंबई और नवी मुंबई बाद में इस कार्यक्रम से बाहर हो गए। यह मिशन आधिकारिक रूप से 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुका है, और तब तक इसमें शामिल शहरों ने अपने अधिकांश प्रोजेक्ट्स पूरे कर लिए थे।


स्मार्ट सिटी मिशन की मुख्य विशेषताएं

जैसा कि पहले बताया गया है, इस मिशन का उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना और लोगों के रहन-सहन को बेहतर बनाना है। आइए समझें कि यह लक्ष्य कैसे हासिल किया जाता है:

  • भूमि का बेहतर उपयोग: यह मिशन क्षेत्र-आधारित भूमि उपयोग को बढ़ावा देता है। इससे राज्यों को विभिन्न कार्यों के लिए जमीन के इस्तेमाल में अधिक लचीलापन मिलता है और वे जरूरत के हिसाब से नियमों में बदलाव कर पाते हैं, साथ ही पर्यावरण सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता है।
  • सभी के लिए आवास: स्मार्ट शहरों के विकास के लिए पर्याप्त आवास सुविधाएं होना जरूरी है। इस मिशन के तहत उच्च और निम्न आय वर्ग, दोनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवासीय परियोजनाओं का विस्तार किया गया।
  • ट्रैफिक और प्रदूषण में कमी: शहरों में भीड़भाड़ और वायु प्रदूषण को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए नए रास्ते बनाए गए हैं ताकि दुर्घटनाओं को कम किया जा सके और स्वास्थ्य को बढ़ावा मिले।
  • मनोरंजन और खुले स्थान: शहरों में पार्कों, खेल के मैदानों, ओपन जिम और अन्य मनोरंजक स्थलों का विकास प्राथमिक स्तर पर किया गया है ताकि लोगों के बीच सामाजिक मेलजोल बढ़ सके।
पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन सेवाएं

प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन सेवाओं की शुरुआत की गई है। उदाहरण के लिए, अब नागरिकों को छोटे-छोटे कामों के लिए नगर निगम के चक्कर नहीं काटने पड़ते, बल्कि वे आधिकारिक वेबसाइट के जरिए घर बैठे सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।


इसके अलावा, हर शहर को उसकी अपनी पहचान जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय भोजन, खेल, कला और संस्कृति के आधार पर विकसित किया गया है। बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं में स्मार्ट समाधान लागू करके पूरे क्षेत्र का तेजी से विकास किया गया है।