फ्लू सीजन में जरूर पिएं ये 5 आयुर्वेदिक जूस, इम्यूनिटी को मिलेगा सपोर्ट

मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल संक्रमण जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में 5 आयुर्वेदिक जूस और हर्बल ड्रिंक आपकी डाइट में पोषण और हाइड्रेशन जोड़ सकते हैं। हालांकि, इन्हें फ्लू का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, साफ-सफाई और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह भी जरूरी है।
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1. आंवला जूस

आंवला को विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर माना जाता है और यह पारंपरिक आयुर्वेदिक आहार का हिस्सा रहा है। आंवला जूस को पानी में मिलाकर सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।

इसका स्वाद काफी खट्टा होता है, इसलिए इसमें ज्यादा चीनी मिलाने से बचें। अगर आपको अक्सर एसिडिटी या पेट से जुड़ी परेशानी रहती है, तो इसे डाइट में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।


2. गिलोय जूस

गिलोय का इस्तेमाल आयुर्वेद में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। हालांकि, इसके सेवन को लेकर सावधानी जरूरी है। खासतौर पर लिवर से जुड़ी बीमारी वाले लोगों या नियमित रूप से दवाएं लेने वालों को बिना चिकित्सकीय सलाह के गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिए।

यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि गिलोय जूस को फ्लू का इलाज या वायरल संक्रमण से बचाव का अचूक उपाय नहीं माना जा सकता।


3. तुलसी-अदरक ड्रिंक

सर्दी-जुकाम के मौसम में तुलसी और अदरक से तैयार गर्म पेय काफी लोकप्रिय है। अदरक की गर्माहट और स्वाद गले में असहजता के दौरान राहत का एहसास दे सकते हैं।

इसे बनाने के लिए पानी में तुलसी की कुछ पत्तियां और अदरक डालकर उबालें। हल्का गर्म होने पर इसे पिएं। स्वाद के लिए थोड़ी मात्रा में शहद मिलाया जा सकता है। ध्यान रखें कि बहुत गर्म पानी में शहद न डालें।

4. गाजर-चुकंदर का जूस

गाजर और चुकंदर का ताजा जूस कई जरूरी पोषक तत्वों का स्रोत हो सकता है। इसमें फोलेट, पोटैशियम और विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।

इसे घर पर ताजा तैयार करके सीमित मात्रा में लिया जा सकता है। हालांकि, केवल जूस को डाइट का विकल्प न बनाएं। साबुत सब्जियों और फलों में जूस की तुलना में अधिक फाइबर होता है, इसलिए संतुलित आहार में इन्हें भी शामिल करना जरूरी है।


5. नींबू-आंवला ड्रिंक

नींबू और आंवला दोनों ही विटामिन C के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इन्हें पानी के साथ मिलाकर एक ताजगी देने वाला पेय तैयार किया जा सकता है।

इसमें अतिरिक्त चीनी डालने के बजाय स्वाद के लिए थोड़ी मात्रा में शहद इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आपको गैस, सीने में जलन या एसिडिटी की समस्या रहती है, तो इस ड्रिंक का सेवन सीमित मात्रा में करें।

फ्लू सीजन में सिर्फ जूस पर निर्भर न रहें

आयुर्वेदिक जूस और हर्बल ड्रिंक आपकी रोजमर्रा की डाइट में स्वाद और कुछ पोषक तत्व जोड़ सकते हैं, लेकिन इन्हें फ्लू से बचाव या इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक भोजन करना, अच्छी नींद लेना और हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

अगर बुखार, सांस लेने में परेशानी या फ्लू जैसे लक्षण लगातार बने रहें या गंभीर हों, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।