डिजिटल थकान से बचने के 7 तरीके, मोबाइल और स्क्रीन के बीच खुद के लिए भी निकालें समय

आज मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो या दोस्तों से बातचीत करनी हो, ज्यादातर गतिविधियों में स्क्रीन का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, खाली समय में सोशल मीडिया स्क्रॉल करने की आदत भी स्क्रीन टाइम बढ़ा सकती है।
Cozy Digital Detox Moment


लगातार स्क्रीन इस्तेमाल करने से कुछ लोगों को आंखों में थकान, सिरदर्द, ध्यान लगाने में परेशानी या मानसिक थकावट महसूस हो सकती है। देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद का समय भी प्रभावित हो सकता है। अच्छी बात यह है कि कुछ व्यावहारिक बदलावों से स्क्रीन के इस्तेमाल को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

1. हर थोड़ी देर में स्क्रीन से ब्रेक लें

लगातार कई घंटे लैपटॉप पर काम करने से आंखों और शरीर पर दबाव महसूस हो सकता है। इससे बचने के लिए 20-20-20 नियम आजमा सकते हैं। इसके अनुसार, हर 20 मिनट में लगभग 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।


यह तरीका आंखों के तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। इसके साथ समय-समय पर अपनी कुर्सी से उठें, शरीर को स्ट्रेच करें और कुछ देर चलें। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचना भी जरूरी है।

2. गैरजरूरी नोटिफिकेशन बंद करें

हर कुछ मिनट में आने वाले मैसेज, ऐप अलर्ट और सोशल मीडिया नोटिफिकेशन काम के बीच ध्यान भटका सकते हैं। कई बार केवल एक नोटिफिकेशन देखने के लिए फोन उठाने पर व्यक्ति काफी देर तक स्क्रीन पर लगा रहता है।


अपने फोन की सेटिंग में जाकर गैरजरूरी अलर्ट बंद करें। काम करते समय केवल जरूरी कॉल और संदेशों को प्राथमिकता दें। सोशल मीडिया देखने के लिए दिन में एक निश्चित समय तय करना भी उपयोगी हो सकता है।

3. सुबह उठते ही मोबाइल देखने से बचें

सुबह आंख खुलते ही मोबाइल चेक करने की आदत दिन की शुरुआत को जल्दबाजी भरा बना सकती है। इससे ध्यान अपने कामों और व्यक्तिगत जरूरतों के बजाय लगातार आने वाली डिजिटल गतिविधियों पर जा सकता है।

उठने के बाद पहले पानी पिएं, तैयार हों या कुछ देर टहलें। यदि मोबाइल अलार्म के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो अलार्म बंद करने के बाद तुरंत सोशल मीडिया खोलने से बचने की कोशिश करें।

4. काम की जगह और स्क्रीन की दूरी ठीक रखें

लैपटॉप या कंप्यूटर का गलत इस्तेमाल गर्दन, कंधों और आंखों में असुविधा पैदा कर सकता है। स्क्रीन को ऐसी ऊंचाई पर रखें कि गर्दन को बार-बार झुकाना न पड़े। आंखों और स्क्रीन के बीच आरामदायक दूरी बनाए रखें और रोशनी को अपनी जरूरत के अनुसार समायोजित करें।


यदि स्क्रीन पर देखते समय बार-बार आंखों में जलन, धुंधलापन या दर्द महसूस होता है, तो आंखों की जांच कराना उचित रहेगा।

5. सोने से पहले मोबाइल इस्तेमाल सीमित करें

रात में लगातार वीडियो देखना या सोशल मीडिया स्क्रॉल करना सोने के समय को आगे बढ़ा सकता है। स्क्रीन की रोशनी और लगातार मिलने वाली डिजिटल उत्तेजना भी कुछ लोगों की नींद प्रभावित कर सकती है।

सोने से लगभग 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल अलग रखने की कोशिश करें। इस दौरान किताब पढ़ सकते हैं, अगले दिन की तैयारी कर सकते हैं या शांत गतिविधियों में समय बिता सकते हैं। जरूरत हो तो फोन को बिस्तर से थोड़ी दूर चार्ज करें।

6. खाली समय में ऑफलाइन गतिविधियां अपनाएं

हर खाली पल में मोबाइल उठाने के बजाय कुछ समय ऐसी गतिविधियों को दें जिनमें स्क्रीन की जरूरत न हो। जैसे टहलना, पौधों की देखभाल करना, खाना बनाना, संगीत सुनना या परिवार के साथ बातचीत करना।

इन गतिविधियों से दिन में विविधता आती है और मनोरंजन के लिए केवल डिजिटल डिवाइस पर निर्भरता कम हो सकती है। शुरुआत में रोज 15 से 20 मिनट का ऑफलाइन समय तय करना व्यावहारिक रहेगा।


7. अपने स्क्रीन टाइम की समीक्षा करें

फोन की डिजिटल वेलबीइंग या स्क्रीन टाइम सेटिंग में जाकर देखें कि किन ऐप्स पर सबसे ज्यादा समय खर्च हो रहा है। हो सकता है कि आपको किसी जरूरी काम से ज्यादा समय बिना उद्देश्य के स्क्रॉल करने में लग रहा हो।

ऐसे ऐप्स के लिए दैनिक समय सीमा तय करें, जिनका इस्तेमाल कम करना चाहते हैं। हालांकि, स्क्रीन टाइम के आंकड़ों को देखकर खुद पर अनावश्यक दबाव न बनाएं। काम, पढ़ाई और मनोरंजन की जरूरतें हर व्यक्ति के लिए अलग होती हैं।