टाइप 1 डायबिटीज से हैं परेशान? बाबा रामदेव ने बताए इसे रिवर्स करने के नेचुरल तरीके
यह एक ऑटोइम्यून समस्या है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज की उन कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है जो इंसुलिन बनाती हैं। जब शरीर में इंसुलिन नहीं बनता, तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। पहले यह बीमारी उम्रदराज लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब बच्चे और किशोर भी इसका शिकार हो रहे हैं।
इस बीमारी को शुरुआत में पहचानना बहुत जरूरी है। इसके कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
बाबा रामदेव के अनुसार, इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर समय रहते ध्यान दिया जाए और सही दिनचर्या अपनाई जाए, तो इसे रिवर्स करना संभव है।
ये योगासन निम्नलिखित हैं:
भारत में वैदिक काल से ही योग और प्राकृतिक चिकित्सा को जीवन का आधार माना गया है। आज जब विदेशी लोग भारतीय संस्कृति और योग को अपनाकर स्वस्थ हो रहे हैं, तब भारतीयों का इसे भूलना चिंता का विषय है। कम उम्र में बीमारियों का शिकार होने से बचने के लिए यह जरूरी है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें। सही खानपान, नियमित योग और प्राकृतिक उपचार अपनाकर टाइप 1 डायबिटीज जैसी बीमारी को भी मात दी जा सकती है।
इस बीमारी को शुरुआत में पहचानना बहुत जरूरी है। इसके कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
- बार-बार प्यास लगना।
- बार-बार यूरिन पास करने की इच्छा होना।
- शरीर में लगातार थकान महसूस होना।
- आंखों से धुंधला दिखाई देना।
बाबा रामदेव के अनुसार, इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर समय रहते ध्यान दिया जाए और सही दिनचर्या अपनाई जाए, तो इसे रिवर्स करना संभव है।
डायबिटीज के मुख्य कारण
बाबा रामदेव के अनुसार, डायबिटीज के पीछे तीन बड़े कारण होते हैं। सबसे पहला और मुख्य कारण पैंक्रियाज का डैमेज होना है, जिससे इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित होता है। कई बार सिंथेटिक दवाओं का अधिक सेवन भी इसका कारण बनता है, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों के कोमल शरीर पर पड़ता है। इसके अलावा, बढ़ता प्रदूषण और आजकल का अनहेल्दी लाइफस्टाइल भी शुगर बढ़ने की बड़ी वजह है।You may also like
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खानपान में करें ये जरूरी बदलाव
सेहत को सुधारने में सबसे बड़ा योगदान हमारी डाइट का होता है। बाबा रामदेव ने डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए कुछ खास चीजों को डाइट में शामिल करने की सलाह दी है:- जूस और सब्जियां: खाने में टमाटर, खीरा और करेले का जूस शामिल करना बेहद फायदेमंद होता है। इसके अलावा लौकी, ब्रोकली, भिंडी, टिंडा, पालक और बीन्स जैसी हरी सब्जियां शरीर को पोषण देती हैं और शुगर लेवल को स्थिर रखती हैं।
- ग्लाइसेमिक इंडेक्स का ध्यान: डायबिटीज के मरीजों को उन चीजों से दूर रहना चाहिए जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है। सिंपल कार्ब्स कम लेने चाहिए।
- ये चीजें जोड़ें: अपनी थाली में साबुत अनाज, लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और विभिन्न प्रकार के बीजों को जगह दें।
- इनसे बनाएं दूरी: प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड चीनी और सैचुरेटेड फैट का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए या बहुत कम कर देना चाहिए।
नीम और करेले की विशेष थेरेपी
बाबा रामदेव ने डायबिटीज को रिवर्स करने के लिए एक बहुत ही सरल और अनोखी थेरेपी बताई है। इस थेरेपी में नीम और करेले को पीसकर एक पेस्ट बनाया जाता है। इस पेस्ट को किसी समतल तली वाले बर्तन (जैसे परात) में रखकर उस पर रोजाना कुछ देर के लिए नंगे पैर चलना होता है। यह प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में काफी मददगार मानी जाती है।डायबिटीज के लिए रामबाण हैं ये योगासन
सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि शारीरिक सक्रियता भी बहुत जरूरी है। बाबा रामदेव ने 5 से 10 ऐसे योगासन बताए हैं, जिन्हें अगर रोजाना किया जाए तो पैंक्रियाज फिर से सक्रिय हो सकता है और इंसुलिन का स्तर सुधर सकता है।ये योगासन निम्नलिखित हैं:
- मंडूकासन: यह पेट के अंगों, विशेषकर पैंक्रियाज की मालिश करता है।
- वक्रासन: यह स्पाइन और पेट के लिए लाभकारी है।
- पवनमुक्तासन : पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
- उत्तानपादासन : पेट की मांसपेशियों को टोन करता है।
- योग मुद्रासन और वज्रासन: ये आसन मानसिक शांति और पाचन के लिए बेहतरीन हैं।
भारत में वैदिक काल से ही योग और प्राकृतिक चिकित्सा को जीवन का आधार माना गया है। आज जब विदेशी लोग भारतीय संस्कृति और योग को अपनाकर स्वस्थ हो रहे हैं, तब भारतीयों का इसे भूलना चिंता का विषय है। कम उम्र में बीमारियों का शिकार होने से बचने के लिए यह जरूरी है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें। सही खानपान, नियमित योग और प्राकृतिक उपचार अपनाकर टाइप 1 डायबिटीज जैसी बीमारी को भी मात दी जा सकती है।









