Banana vs Banana Milkshake: आपके पेट और पाचन के लिए क्या है ज्यादा बेहतर?
केला एक ऐसा फल है जिसे "एनीटाइम फ्रूट" माना जाता है। यह पचाने में आसान, मीठा और हर किसी का पसंदीदा होता है। चाहे नाश्ता हो, वर्कआउट के बाद का स्नैक हो या भागदौड़ भरा दिन, केला हर जगह फिट बैठता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब आप केले को दूध के साथ मिलाकर मिल्कशेक बनाते हैं, तो इसके गुण बदल जाते हैं? कई घरों में बनाना मिल्कशेक को बहुत सेहतमंद माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों की राय थोड़ी अलग है।
पाचन पर केले का प्रभाव केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप क्या खा रहे हैं, बल्कि इस पर भी निर्भर करता है कि आप इसे किसके साथ मिला रहे हैं। आइए जानते हैं कि केला और बनाना मिल्कशेक में से आपके पेट के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है।
साबुत केला खाने के फायदे
पाचन की शुरुआत हमारे मुंह से होती है। जब आप एक साबुत केला खाते हैं और उसे अच्छी तरह चबाते हैं, तो वह लार के साथ मिलता है। लार में मौजूद एंजाइम पाचन प्रक्रिया को मुंह में ही शुरू कर देते हैं।
अच्छी तरह चबाकर खाने से:
इसके विपरीत, जब आप मिल्कशेक पीते हैं, तो चबाने की प्रक्रिया नहीं होती। केला स्वभाव से थोड़ा चिपचिपा होता है और दूध भारी व ठंडा होता है। इन दोनों को मिलाने से पाचन की अग्नि धीमी पड़ सकती है, जिससे पेट में कफ का असंतुलन हो सकता है और बलगम बनने की समस्या बढ़ सकती है। इससे सर्दी, खांसी और साइनस जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
पेट में दूध और केले का मेल
जब दूध पेट में जाता है, तो वह पेट के एसिड के साथ मिलकर प्राकृतिक रूप से दही जैसा जम जाता है ताकि प्रोटीन (केसीन और लैक्टोज) धीरे-धीरे पच सकें। लेकिन जब इसमें केला मिला दिया जाता है, तो केले में मौजूद मैलिक और सिट्रिक एसिड इस प्रक्रिया को बहुत तेज कर देते हैं। इससे दूध समय से पहले ही फट जाता है, जिससे:
कौन है विजेता?
अगर बात पेट की सेहत की हो, तो साबुत केला स्पष्ट रूप से मिल्कशेक से बेहतर है। कभी-कभार मिल्कशेक पीने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है।
पाचन पर केले का प्रभाव केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप क्या खा रहे हैं, बल्कि इस पर भी निर्भर करता है कि आप इसे किसके साथ मिला रहे हैं। आइए जानते हैं कि केला और बनाना मिल्कशेक में से आपके पेट के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है।
साबुत केला खाने के फायदे
पाचन की शुरुआत हमारे मुंह से होती है। जब आप एक साबुत केला खाते हैं और उसे अच्छी तरह चबाते हैं, तो वह लार के साथ मिलता है। लार में मौजूद एंजाइम पाचन प्रक्रिया को मुंह में ही शुरू कर देते हैं।अच्छी तरह चबाकर खाने से:
- पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।
- पेट के एंजाइम पहले से ही सक्रिय हो जाते हैं।
इसके विपरीत, जब आप मिल्कशेक पीते हैं, तो चबाने की प्रक्रिया नहीं होती। केला स्वभाव से थोड़ा चिपचिपा होता है और दूध भारी व ठंडा होता है। इन दोनों को मिलाने से पाचन की अग्नि धीमी पड़ सकती है, जिससे पेट में कफ का असंतुलन हो सकता है और बलगम बनने की समस्या बढ़ सकती है। इससे सर्दी, खांसी और साइनस जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
पेट में दूध और केले का मेल
जब दूध पेट में जाता है, तो वह पेट के एसिड के साथ मिलकर प्राकृतिक रूप से दही जैसा जम जाता है ताकि प्रोटीन (केसीन और लैक्टोज) धीरे-धीरे पच सकें। लेकिन जब इसमें केला मिला दिया जाता है, तो केले में मौजूद मैलिक और सिट्रिक एसिड इस प्रक्रिया को बहुत तेज कर देते हैं। इससे दूध समय से पहले ही फट जाता है, जिससे: - दूध के प्रोटीन ठीक से नहीं पच पाते।
- पोषक तत्वों का शरीर में मिलना मुश्किल हो जाता है।
- पेट में भारीपन महसूस हो सकता है।
केला और दूध का सेवन करने का सही तरीका
विशेषज्ञ यह नहीं कहते कि आप दूध या केला छोड़ दें, बल्कि उन्हें सही तरीके से खाने की सलाह देते हैं।- भोजन के बाद एक केला अच्छी तरह चबाकर खाएं।
- दूध को केले के साथ मिलाने के बजाय, केला खाने के एक से दो घंटे बाद पिएं।
कौन है विजेता?
अगर बात पेट की सेहत की हो, तो साबुत केला स्पष्ट रूप से मिल्कशेक से बेहतर है। कभी-कभार मिल्कशेक पीने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है। Next Story