Winter Storage Tips: कपूर या नेफ्थलीन बॉल्स? जानें कपड़ों और सेहत के लिए क्या है बेहतर
भारतीय घरों में कपड़ों के रखरखाव की बात हो तो कपूर और नेफथलीन बॉल्स (फिनाइल की गोलियां) सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते हैं। इन्हें अलमारी के कोनों या संदूक में डाल दिया जाता है ताकि कीड़े और नमी कपड़ों को खराब न करें। लेकिन क्या कभी सोचा है कि जिस गंध से कीड़े भागते हैं, वह इंसान के शरीर पर क्या असर डालती है? इन दिनों सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता ने इस सवाल को जरूरी बना दिया है कि कपूर और नेफथलीन में से कौन सा विकल्प हमारी सेहत के लिए कम नुकसानदायक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नेफथलीन के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों के लिए यह और भी खतरनाक है क्योंकि उनका शरीर इन केमिकल्स के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है। कुछ रिसर्च में तो नेफथलीन को कार्सिनोजेनिक श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि इसके लंबे समय तक इस्तेमाल से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
कपूर का एक और फायदा यह है कि यह नेफथलीन की तरह कपड़ों पर लंबे समय तक अपनी गंध नहीं छोड़ता। हवा के संपर्क में आने पर यह जल्दी उड़ जाता है। हालांकि इसे पूरी तरह सुरक्षित मान लेना भी सही नहीं होगा। अगर कपूर को बहुत ज्यादा मात्रा में या बंद कमरे में इस्तेमाल किया जाए, तो यह भी फेफड़ों में जलन या त्वचा संबंधी परेशानियां पैदा कर सकता है।
इसके अलावा, समय-समय पर अलमारी को खोलकर हवा लगने दें। अगर घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं, तो इन बॉल्स का इस्तेमाल बहुत सावधानी से करें क्योंकि वे इन्हें कैंडी समझकर निगल सकते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
नेफथलीन बॉल्स
सालों से नेफथलीन बॉल्स को सस्ता और असरदार मानकर इस्तेमाल किया जा रहा है। ये गोलियां ठोस से सीधे गैस में बदलती हैं, जिसे सब्लिमेशन कहा जाता है। यही गैस कपड़ों में मौजूद कीड़ों को मारती है। हालांकि जब अलमारी खोली जाती है, तो यह गैस सीधे तौर पर हमारी सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है।You may also like
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विशेषज्ञों का मानना है कि नेफथलीन के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों के लिए यह और भी खतरनाक है क्योंकि उनका शरीर इन केमिकल्स के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है। कुछ रिसर्च में तो नेफथलीन को कार्सिनोजेनिक श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि इसके लंबे समय तक इस्तेमाल से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
कपूर:प्राकृतिक विकल्प
नेफथलीन की तुलना में कपूर को अक्सर ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि कपूर प्राकृतिक रूप से पेड़ों की छाल से प्राप्त किया जाता है। इसकी खुशबू मन को शांति देने वाली मानी जाती है और इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में भी किया जाता रहा है। कपूर न केवल कीड़ों को दूर रखता है बल्कि वातावरण को भी शुद्ध करने में मदद करता है।कपूर का एक और फायदा यह है कि यह नेफथलीन की तरह कपड़ों पर लंबे समय तक अपनी गंध नहीं छोड़ता। हवा के संपर्क में आने पर यह जल्दी उड़ जाता है। हालांकि इसे पूरी तरह सुरक्षित मान लेना भी सही नहीं होगा। अगर कपूर को बहुत ज्यादा मात्रा में या बंद कमरे में इस्तेमाल किया जाए, तो यह भी फेफड़ों में जलन या त्वचा संबंधी परेशानियां पैदा कर सकता है।
जरूरी सावधानियां
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि जितनी तेज गंध होगी, असर उतना ही बेहतर होगा। असल में यह तेज गंध एक चेतावनी है। जब भी आप बंद अलमारी खोलते हैं, तो उसमें जमा गैस सीधे आपके संपर्क में आती है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि कपड़ों को सीधे संपर्क में रखने के बजाय उन्हें किसी पतले मलमल के कपड़े या कागज में लपेट कर रखें।इसके अलावा, समय-समय पर अलमारी को खोलकर हवा लगने दें। अगर घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं, तो इन बॉल्स का इस्तेमाल बहुत सावधानी से करें क्योंकि वे इन्हें कैंडी समझकर निगल सकते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।









