BMI के बावजूद छिपा हो सकता है मोटापा; जानें नई चिकित्सा परिभाषा
हमेशा से यह माना जाता रहा है कि यदि किसी का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) सामान्य है, तो वह स्वस्थ है और मोटापे से दूर है। लेकिन हालिया चिकित्सा अनुसंधान ने इस धारणा को चुनौती दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल वजन और लंबाई के आधार पर BMI का उपयोग करना स्वास्थ्य का सही आकलन नहीं करता। सामान्य दिखने वाले व्यक्ति भी अंदरूनी मोटापे के शिकार हो सकते हैं। BMI केवल यह बताता है कि कोई व्यक्ति अंडरवेट, सामान्य वजन, ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में आता है। अब डॉक्टरों ने मोटापे की परिभाषा में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
बेंगलुरु के Aster CMI Hospital के वरिष्ठ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डॉ. महेश डी एम के अनुसार, BMI शरीर में चर्बी की सटीक माप नहीं करता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि BMI से यह नहीं पता चलता कि अतिरिक्त चर्बी किसी अंग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्लिनिकल ओबेसिटी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें शरीर में अत्यधिक चर्बी कई बीमारियों का कारण बन सकती है।
BMI और क्लिनिकल ओबेसिटी में अंतर
डॉ. महेश के अनुसार, BMI और क्लिनिकल ओबेसिटी एक-दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन समान नहीं हैं। कोई व्यक्ति मांसपेशियों के कारण उच्च BMI का हो सकता है, जबकि उसके शरीर में चर्बी कम हो। वहीं, कुछ लोग सामान्य BMI के बावजूद अनहेल्दी चर्बी के शिकार हो सकते हैं। BMI एक स्क्रीनिंग टूल है, जबकि क्लिनिकल ओबेसिटी एक चिकित्सा निदान है।
मोटापे की जांच के नए मानक
विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे का सही आकलन करने के लिए BMI के अलावा अन्य मानकों पर भी ध्यान देना चाहिए, जैसे कि कमर की चौड़ाई, कमर और कूल्हे का अनुपात, शरीर में चर्बी का प्रतिशत, मेडिकल हिस्ट्री, और शारीरिक परीक्षण।
क्लिनिकल ओबेसिटी के लक्षण
डॉ. महेश के अनुसार, कुछ लक्षण जैसे सांस फूलना, सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई, अत्यधिक थकान, नींद संबंधी समस्याएं, और जोड़ो में दर्द क्लिनिकल ओबेसिटी के संकेत हो सकते हैं।
नई परिभाषा का महत्व
डॉ. महेश का मानना है कि मोटापे को केवल वजन और BMI के आधार पर नहीं, बल्कि इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव के आधार पर समझना चाहिए। क्लिनिकल ओबेसिटी की नई परिभाषा उन लोगों की पहचान करने में मदद करेगी जिन्हें चिकित्सा जांच की आवश्यकता है।