हेपेटाइटिस बी और सी: लक्षण, कारण और उपचार के तरीके

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हेपेटाइटिस बी और सी: स्वास्थ्य पर प्रभाव

हेपेटाइटिस बी और सी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई व्यक्तियों में इन बीमारियों के लक्षण लंबे समय तक दिखाई नहीं देते, जिससे लिवर को अंदर ही अंदर काफी नुकसान होता है। डॉक्टरों का कहना है कि इन बीमारियों के लक्षणों की अनुपस्थिति के बावजूद, लिवर में फाइब्रोसिस, सिरोसिस और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। एशियन हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के निदेशक, डॉ. अमित मिगलानी, बताते हैं कि बिना लक्षणों के भी लिवर कैसे धीरे-धीरे खराब हो सकता है।


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हेपेटाइटिस के लक्षण

हेपेटाइटिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके प्रारंभिक लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। शुरुआत में थकान, भूख में कमी, हल्का बुखार और पेट में असहजता जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि आप इनमें से कोई भी लक्षण अनुभव करते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


हेपेटाइटिस की समस्या

भारत में लाखों लोग हेपेटाइटिस बी या सी के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। वे सामान्य जीवन जीते हैं, लेकिन यह वायरस चुपचाप लिवर को नुकसान पहुंचाता है। हेपेटाइटिस सी में कई वर्षों तक लिवर में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, और लोग तब तक अनजान रहते हैं जब तक लिवर की स्थिति गंभीर नहीं हो जाती।


हेपेटाइटिस का संक्रमण कैसे फैलता है

हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण असुरक्षित इंजेक्शन, बिना जांच के रक्त चढ़ाने, असुरक्षित सर्जरी या दंत प्रक्रियाओं, और संक्रमित सुई से टैटू या पियर्सिंग के माध्यम से फैल सकता है।


लिवर सिरोसिस

हेपेटाइटिस बी या सी का उचित इलाज न होने पर यह लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस का कारण बन सकता है, जिससे लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान में, हेपेटाइटिस सी का इलाज संभव है। 8 से 12 हफ्तों में दवाओं और उपचार के माध्यम से इसे ठीक किया जा सकता है। लापरवाही से यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।