Health Insurance Mistakes: भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना फंस जाएगा पैसा
आजकल के समय में जिस तरह से बीमारियों का इलाज महंगा होता जा रहा है उसे देखकर हेल्थ इंश्योरेंस अब कोई लग्जरी नहीं बल्कि जरूरत बन गया है। एक छोटी सी बीमारी भी किसी परिवार की पूरी जमा पूंजी खत्म कर सकती है। लोग अपनी सुरक्षा के लिए पॉलिसी तो ले लेते हैं लेकिन अक्सर जानकारी की कमी या छोटी गलतियों की वजह से क्लेम के समय उन्हें बहुत परेशानी होती है। कई बार तो कंपनी क्लेम देने से पूरी तरह मना कर देती है। इसलिए ये समझना बहुत जरूरी है कि पॉलिसी खरीदते समय किन गलतियों से बचना चाहिए।

बीमारियों की सही जानकारी देना
हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय सबसे बड़ी और जरूरी बात ये है कि आप अपनी सेहत से जुड़ी हर जानकारी सच बताएं। अक्सर देखा गया है कि लोग अपनी पुरानी बीमारियों के बारे में नहीं बताते। उन्हें लगता है कि अगर वो बीमारी के बारे में बताएंगे तो प्रीमियम के पैसे बढ़ जाएंगे। ये सोच बहुत गलत है क्योंकि क्लेम के समय बीमा कंपनियां आपके मेडिकल रिकॉर्ड की गहराई से जांच करती हैं। अगर उस समय किसी पुरानी बीमारी का पता चलता है तो कंपनी क्लेम रिजेक्ट कर सकती है और आपकी पॉलिसी भी बंद हो सकती है। आंकड़ों के मुताबिक लगभग 25 प्रतिशत क्लेम सिर्फ इसीलिए रिजेक्ट होते हैं क्योंकि लोगों ने अपनी पुरानी बीमारी की बात छिपाई होती है।शर्तों को ठीक से न समझना
ज्यादातर लोग विज्ञापन देखकर या किसी एजेंट की बातों में आकर जल्दीबाजी में पॉलिसी खरीद लेते हैं। वो पॉलिसी के कागजों को ध्यान से नहीं पढ़ते। बाद में जब अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आती है तब उन्हें पता चलता है कि कई बीमारियां या इलाज तो उनकी पॉलिसी में शामिल ही नहीं हैं। हर पॉलिसी में कुछ बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड होता है। अगर उस समय से पहले क्लेम किया जाए तो पैसा नहीं मिलता। इसलिए बिना शर्तों को समझे पॉलिसी लेना एक बहुत बड़ी भूल साबित हो सकती है।कम प्रीमियम के पीछे भागना
अक्सर लोग ऐसी पॉलिसी चुनते हैं जिसका प्रीमियम सबसे कम हो। ये फैसला बाद में भारी पड़ सकता है क्योंकि कम प्रीमियम वाली पॉलिसी में अक्सर सुविधाएं भी कम होती हैं। ऐसी पॉलिसियों में रूम रेंट की लिमिट या इलाज के खर्च पर कई तरह की पाबंदियां होती हैं। जब अस्पताल का बिल बड़ा आता है तब पता चलता है कि बीमा कंपनी पूरा पैसा नहीं दे रही है। ये बहुत जरूरी है कि आप अपनी जरूरतों, परिवार के सदस्यों की संख्या और भविष्य के मेडिकल खर्चों को ध्यान में रखकर ही सही कवर चुनें।कागजों की कमी
क्लेम मिलने की पूरी प्रक्रिया आपके दस्तावेजों पर टिकी होती है। अस्पताल के बिल, डिस्चार्ज पेपर, टेस्ट रिपोर्ट और डॉक्टर की पर्चियां बिल्कुल सही और पूरी होनी चाहिए। अगर इन कागजों में कोई भी कमी होती है या जानकारी मैच नहीं करती है तो बीमा कंपनी क्लेम रोक सकती है। कई बार लोग कागजात जमा करने में भी बहुत देरी कर देते हैं जिसकी वजह से क्लेम मिलने में दिक्कत आती है। कागजों को संभालकर रखना और उन्हें समय पर जमा करना बहुत जरूरी है।सही चुनाव और पूरी सुरक्षा
हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा तभी मिलता है जब उसे पूरी समझदारी के साथ खरीदा जाए। अगर आप पॉलिसी की शर्तों को अच्छे से समझते हैं और कंपनी को अपनी सेहत की सही जानकारी देते हैं तो क्लेम मिलने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। सही प्लान और सही जानकारी ही आपको और आपके परिवार को आर्थिक संकट से बचा सकती है। ये न भूलें कि सही समय पर ली गई सही पॉलिसी ही मुसीबत में आपका सबसे बड़ा सहारा बनती है। ये पैसा आपके मुश्किल वक्त के लिए होता है इसलिए इसे चुनते समय कोई भी लापरवाही न बरतें।Next Story