Explainer: Reels और Shorts की लत पड़ना कितना खतरनाक? एक्सपर्ट्स क्यों दे रहे हैं चेतावनी
Instagram Reels , YouTube Shorts और दूसरी शॉर्ट वीडियो ऐप्स आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। कुछ सेकंड के वीडियो मनोरंजन और जानकारी का आसान जरिया बन गए हैं, लेकिन कई बार इन्हें देखते-देखते घंटों बीत जाते हैं और पता भी नहीं चलता। धीरे-धीरे यह आदत लत बन जाती है, जिसका असर दिमाग, नींद, काम और मेंटल हेल्थ पर पड़ने लगता है। आइए जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा Reels और Short Videos देखने से दिमाग पर क्या असर पड़ सकता है।
हर नया वीडियो दिमाग को कुछ नया और मजेदार कंटेंट देता है। इसके बाद दिमाग में डोपामाइन नाम का केमिकल रिलीज होता है, जो खुशी का एहसास कराता है। यही वजह है कि एक वीडियो खत्म होते ही लोग अगला वीडियो देखने लगते हैं और उन्हें समय का अंदाजा भी नहीं रहता।
लगातार छोटे-छोटे वीडियो देखने से दिमाग तेजी से बदलने वाले कंटेंट का आदी हो जाता है। ऐसे में किताब पढ़ना, पढ़ाई करना या लंबे समय तक किसी काम पर ध्यान लगाना मुश्किल लगने लगता है। कई लोगों को कुछ मिनट से ज्यादा एक ही काम पर फोकस करने में परेशानी महसूस होने लगती है।
कई लोग काम या पढ़ाई के बीच सिर्फ दो मिनट के लिए फोन उठाते हैं, लेकिन देखते-देखते काफी समय निकल जाता है। इससे जरूरी काम अधूरे रह सकते हैं और प्रोडक्टिविटी काफी कम हो जाती है। साथ ही, समय का सही इस्तेमाल करना भी मुश्किल हो जाता है।
बार-बार वीडियो देखने की आदत क्यों लग जाती है?
हर नया वीडियो दिमाग को कुछ नया और मजेदार कंटेंट देता है। इसके बाद दिमाग में डोपामाइन नाम का केमिकल रिलीज होता है, जो खुशी का एहसास कराता है। यही वजह है कि एक वीडियो खत्म होते ही लोग अगला वीडियो देखने लगते हैं और उन्हें समय का अंदाजा भी नहीं रहता।
ध्यान लगाने की क्षमता कम हो सकती है
लगातार छोटे-छोटे वीडियो देखने से दिमाग तेजी से बदलने वाले कंटेंट का आदी हो जाता है। ऐसे में किताब पढ़ना, पढ़ाई करना या लंबे समय तक किसी काम पर ध्यान लगाना मुश्किल लगने लगता है। कई लोगों को कुछ मिनट से ज्यादा एक ही काम पर फोकस करने में परेशानी महसूस होने लगती है।
काम और पढ़ाई पर असर पड़ सकता है
कई लोग काम या पढ़ाई के बीच सिर्फ दो मिनट के लिए फोन उठाते हैं, लेकिन देखते-देखते काफी समय निकल जाता है। इससे जरूरी काम अधूरे रह सकते हैं और प्रोडक्टिविटी काफी कम हो जाती है। साथ ही, समय का सही इस्तेमाल करना भी मुश्किल हो जाता है।
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