ट्रेन के सफर को बनाना है आरामदायक? बैग पैक करते समय याद रखें ये आसान टिप्स
रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म भीड़ से भरा है। डिस्प्ले बोर्ड पर ट्रेनों का समय बार-बार बदल रहा है। इस पूरी आपाधापी के बीच आपके पास सिर्फ एक बैग है, जिसके सहारे आपको अगले अठारह घंटे बिताने हैं। ट्रेन में चढ़ने से पहले उस बैग में क्या रखा जा रहा है, यह बात सफर शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा मायने रखती है।
अक्सर लोग पैकिंग करते समय उन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते जो पूरे सफर का मजा बिगाड़ सकती हैं। ट्रेन की यात्रा को सुकूनभरी और आसान बनाने के लिए सही पैकिंग के तरीके को समझना बहुत जरूरी है।
इसकी जगह एक सॉफ्ट डफली बैग या बैकपैक सबसे बेहतर विकल्प है। यह लोअर बर्थ के नीचे आसानी से फिट हो जाता है और ऊपरी रैक पर भी आराम से रखा जा सकता है। तीन दिन से कम के सफर के लिए एक बैग काफी होता है। दो बैग रखने का मतलब है सोते समय दो चीजों की चिंता करना।
बैग की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। बहुत जटिल कॉम्बिनेशन लॉक की जगह एक छोटा पीतल का ताला और पतली चेन सबसे अच्छी रहती है। इसे बर्थ की नीचे बनी कुंडी से बांधकर लॉक कर दें। यह तरीका किसी बड़े चोर को शायद न रोके, लेकिन मौका तलाशने वाले चोरों से आपके सामान को पूरी तरह सुरक्षित रखता है।
इसलिए कपड़े हमेशा परतों में पैक करें। एक हल्की जैकेट या शॉल साथ रखें जिसे जरूरत पड़ने पर पहना या निकाला जा सके।
दिन के समय पहनने के लिए ढीले-ढाले सूती या लिनन के कपड़े सबसे सही रहते हैं। रात के लिए एक हल्का फ्लीस या शॉल अपने पास रखें। हर पूरे दिन के लिए कपड़ों की सिर्फ एक जोड़ी काफी है। कपड़े वही चुनें जिन्हें पहनकर सोने में भी आराम मिले, क्योंकि नाइट ट्रेन में कपड़े बदलने की ज्यादा गुंजाइश नहीं होती।
जूते-चप्पलों के मामले में भी समझदारी जरूरी है। कोच के अंदर पहनने के लिए स्लिप-ऑन या चप्पल और बैग के भीतर बंद जूते रखें। ट्रेन का फर्श कितना भी साफ क्यों न दिखे, वहां नंगे पैर घूमना सही नहीं है।
सफर में ले जाने के लिए सूखा नाश्ता सबसे अच्छा रहता है। भुना चना, मुर्मुरा, सूखी नमकीन और फॉयल में लिपटे पराठे और थोड़ा सा अचार आसानी से खराब नहीं होते।
ग्रेवी वाली चीजें, जल्दी खराब होने वाला खाना या तेज गंध वाली चीजें ट्रेन में ले जाने से बचें। बंद डिब्बे में तेज गंध से साथ बैठे यात्रियों को परेशानी हो सकती है।
पानी इस सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ट्रेन में चढ़ते समय कम से कम दो लीटर पानी साथ रखें। स्टेशन पर हमेशा किसी नामी ब्रांड की सीलबंद बोतल ही खरीदें। एक छोटी इंसुलेटेड बोतल साथ रखने से दोपहर की गर्मी में भी पानी ठंडा रहता है।
अगर आप स्लीपर क्लास में सफर कर रहे हैं, तो ट्रैवल पिलो साथ रखना बहुत फायदेमंद होता है। एसी कोच में मिलने वाले तकिए पर घर से लाया गया तकिया कवर चढ़ा लेना स्वच्छता के लिहाज से बहुत अच्छा रहता है।
72 बर्थ वाले कोच में कान के प्लग यानी ईयरप्लग्स बहुत काम आते हैं। इसके अलावा आई मास्क भी जरूर रखें, क्योंकि नीचे या बीच की बर्थ पर रात भर कोच की लाइट जलने से नींद में खलल पड़ सकता है।
जितना ज्यादा सामान होगा, उसकी देखभाल और उसे संभालने की जिम्मेदारी उतनी ही बढ़ जाएगी। ट्रेन आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाती है, आपका काम बस इतना है कि आप बिना किसी थकावट और फालतू के बोझ के वहां पहुंचें।

अक्सर लोग पैकिंग करते समय उन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देते जो पूरे सफर का मजा बिगाड़ सकती हैं। ट्रेन की यात्रा को सुकूनभरी और आसान बनाने के लिए सही पैकिंग के तरीके को समझना बहुत जरूरी है।
सही बैग का चुनाव
ट्रेन के सफर के लिए हार्ड-शैल ट्रॉली बैग चुनना गलत फैसला साबित हो सकता है। यह बैग सीट के नीचे आसानी से खिसकता नहीं है। गलियारे में आने-जाने वाले लोगों के पैरों से टकराता है और पूरे डिब्बे के यात्रियों के लिए परेशानी की वजह बनता है।इसकी जगह एक सॉफ्ट डफली बैग या बैकपैक सबसे बेहतर विकल्प है। यह लोअर बर्थ के नीचे आसानी से फिट हो जाता है और ऊपरी रैक पर भी आराम से रखा जा सकता है। तीन दिन से कम के सफर के लिए एक बैग काफी होता है। दो बैग रखने का मतलब है सोते समय दो चीजों की चिंता करना।
बैग की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। बहुत जटिल कॉम्बिनेशन लॉक की जगह एक छोटा पीतल का ताला और पतली चेन सबसे अच्छी रहती है। इसे बर्थ की नीचे बनी कुंडी से बांधकर लॉक कर दें। यह तरीका किसी बड़े चोर को शायद न रोके, लेकिन मौका तलाशने वाले चोरों से आपके सामान को पूरी तरह सुरक्षित रखता है।
मौसम के हिसाब से कपड़े और जूते
भारत में ट्रेन यात्रा के दौरान एक ही सफर में मौसम के कई मिजाज देखने को मिलते हैं। उदाहरण के लिए, अक्टूबर में दिल्ली से चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस में रात के दो बजे इतनी ठंड होती है कि रेलवे का दिया कंबल भी कम पड़ जाता है। वहीं दूसरी तरफ, दोपहर में राजस्थान के रास्ते गुजरते समय एसी चलने के बावजूद गर्माहट महसूस होती है।इसलिए कपड़े हमेशा परतों में पैक करें। एक हल्की जैकेट या शॉल साथ रखें जिसे जरूरत पड़ने पर पहना या निकाला जा सके।
दिन के समय पहनने के लिए ढीले-ढाले सूती या लिनन के कपड़े सबसे सही रहते हैं। रात के लिए एक हल्का फ्लीस या शॉल अपने पास रखें। हर पूरे दिन के लिए कपड़ों की सिर्फ एक जोड़ी काफी है। कपड़े वही चुनें जिन्हें पहनकर सोने में भी आराम मिले, क्योंकि नाइट ट्रेन में कपड़े बदलने की ज्यादा गुंजाइश नहीं होती।
जूते-चप्पलों के मामले में भी समझदारी जरूरी है। कोच के अंदर पहनने के लिए स्लिप-ऑन या चप्पल और बैग के भीतर बंद जूते रखें। ट्रेन का फर्श कितना भी साफ क्यों न दिखे, वहां नंगे पैर घूमना सही नहीं है।
खान-पान और पानी का इंतजाम
भारतीय ट्रेनों में पैंट्री कार के खाने की गुणवत्ता पहले से बेहतर हुई है, लेकिन यह हर रूट पर एक जैसी नहीं होती। सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि बोर्डिंग के बाद के पहले भोजन का इंतजाम घर से करके चलें।सफर में ले जाने के लिए सूखा नाश्ता सबसे अच्छा रहता है। भुना चना, मुर्मुरा, सूखी नमकीन और फॉयल में लिपटे पराठे और थोड़ा सा अचार आसानी से खराब नहीं होते।
ग्रेवी वाली चीजें, जल्दी खराब होने वाला खाना या तेज गंध वाली चीजें ट्रेन में ले जाने से बचें। बंद डिब्बे में तेज गंध से साथ बैठे यात्रियों को परेशानी हो सकती है।
पानी इस सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ट्रेन में चढ़ते समय कम से कम दो लीटर पानी साथ रखें। स्टेशन पर हमेशा किसी नामी ब्रांड की सीलबंद बोतल ही खरीदें। एक छोटी इंसुलेटेड बोतल साथ रखने से दोपहर की गर्मी में भी पानी ठंडा रहता है।
नींद और आराम के साधन
ट्रेन में मिलने वाला कंबल काफी पतला होता है। सर्दियों के महीनों में या ऊंचाई वाले इलाकों से गुजरते समय केवल उस कंबल के भरोसे नींद पूरी होना मुश्किल है। एक पतला ट्रैवल ब्लैंकेट या बड़ा दुपट्टा अपने साथ रखने से यह समस्या हल हो जाती है।अगर आप स्लीपर क्लास में सफर कर रहे हैं, तो ट्रैवल पिलो साथ रखना बहुत फायदेमंद होता है। एसी कोच में मिलने वाले तकिए पर घर से लाया गया तकिया कवर चढ़ा लेना स्वच्छता के लिहाज से बहुत अच्छा रहता है।
72 बर्थ वाले कोच में कान के प्लग यानी ईयरप्लग्स बहुत काम आते हैं। इसके अलावा आई मास्क भी जरूर रखें, क्योंकि नीचे या बीच की बर्थ पर रात भर कोच की लाइट जलने से नींद में खलल पड़ सकता है।
छोटे लेकिन सबसे काम के सामान
- पावर बैंक: यात्रा शुरू करने से पहले इसे पूरी तरह चार्ज कर लें। ट्रेन के सॉकेट हमेशा काम करें, यह जरूरी नहीं है।
- टार्च: रात के समय स्टेशन आने पर कोच में अंधेरा हो जाता है और बर्थ के आसपास बैग्स बिखरे होते हैं। ऐसे में मोबाइल की टॉर्च या छोटी टॉर्च बहुत काम आती है।
- वेट वाइप्स और सैनिटाइजर: ट्रेन के वॉशबेसिन में अक्सर साबुन खत्म हो जाता है। साफ-सफाई बनाए रखने के लिए वाइप्स बेहद जरूरी हैं।
- कचरे के लिए थैली: डिब्बे का डस्टबिन जल्दी भर जाता है। अपनी सीट और बर्थ को साफ रखना आपकी खुद की जिम्मेदारी है, इसलिए अखबार के पन्ने या छोटी प्लास्टिक थैली साथ रखें।
- किताब या डाउनलोड की गई प्लेलिस्ट: टनल या ग्रामीण इलाकों से गुजरते समय नेटवर्क अक्सर चला जाता है। ऐसे में बिना इंटरनेट के मनोरंजन का साधन साथ होना जरूरी है।
बैग में क्या न रखें
पूरे आकार का बड़ा तौलिया, दो जोड़ी से ज्यादा जूते, भारी लैपटॉप और ऐसे गैजेट्स जिनके लिए अलग चार्जर चाहिए हों, उन्हें घर पर ही छोड़ देना बेहतर है।जितना ज्यादा सामान होगा, उसकी देखभाल और उसे संभालने की जिम्मेदारी उतनी ही बढ़ जाएगी। ट्रेन आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाती है, आपका काम बस इतना है कि आप बिना किसी थकावट और फालतू के बोझ के वहां पहुंचें।
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