गर्दन की झुर्रियों और फाइन लाइंस को कम करने के लिए अपनाएं ये 4 तरीके, डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताए उपाय

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चेहरे को जवां और खूबसूरत बनाए रखने के लिए लोग तरह-तरह के स्किनकेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करते हैं। कोई एंटी-एजिंग क्रीम लगाता है तो कोई सीरम और मॉइश्चराइजर के जरिए त्वचा की नमी बनाए रखने की कोशिश करता है। लेकिन इस पूरी देखभाल के दौरान अक्सर गर्दन की स्किन को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका असर तब दिखाई देने लगता है, जब गर्दन पर बारीक रेखाएं और झुर्रियां उभरने लगती हैं।

दरअसल, गर्दन की त्वचा भी चेहरे की तरह देखभाल मांगती है। उम्र बढ़ने के साथ यहां की स्किन की कसावट कम हो सकती है और त्वचा ढीली नजर आने लगती है। हालांकि, गर्दन पर दिखने वाली हर लाइन उम्र बढ़ने का संकेत नहीं होती। रोजमर्रा की कुछ आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। त्वचा में कोलेजन का कम होना, लगातार धूप के संपर्क में रहना और लंबे समय तक मोबाइल फोन पर गर्दन झुकाकर रखना इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। डर्मेटोलॉजिस्ट के मुताबिक, गर्दन की त्वचा की नियमित और सही देखभाल करके फाइन लाइंस और झुर्रियों की उपस्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए महंगे प्रोडक्ट की जरूरत नहीं, बल्कि स्किनकेयर रूटीन में कुछ जरूरी बदलाव करना भी फायदेमंद हो सकता है।


गर्दन पर समय से पहले लाइनें और झुर्रियां क्यों पड़ती हैं?

गर्दन पर कम उम्र में ही हॉरिजॉन्टल लाइनें दिखाई देने की एक बड़ी वजह टेक नेक की समस्या है। दरअसल, जब आप लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल, कंप्यूटर या टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं, तो गर्दन की त्वचा पर लगातार सिलवटें पड़ती हैं। समय के साथ ये रेखाएं ज्यादा स्पष्ट नजर आने लगती हैं। इसके अलावा, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोलेजन का उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगता है। कोलेजन त्वचा को मजबूती और लचीलापन देने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी मात्रा घटने पर त्वचा की कसावट प्रभावित होती है और गर्दन की स्किन पतली, ढीली तथा झुर्रियों वाली दिखाई दे सकती है। धूप के संपर्क में रहने से भी त्वचा में समय से पहले एजिंग के लक्षण उभर सकते हैं।

गर्दन की फाइन लाइंस कम करने के लिए अपनाएं ये 4 उपाय

1. स्किनकेयर रूटीन में शामिल करें रेटिनॉल

रेटिनॉल त्वचा की देखभाल में इस्तेमाल होने वाला एक लोकप्रिय इंग्रीडिएंट है। यह त्वचा की बनावट को बेहतर बनाने और कोलेजन के निर्माण को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। नियमित रूप से रेटिनॉल युक्त लोशन या क्रीम का इस्तेमाल करने से समय के साथ फाइन लाइंस और झुर्रियों की उपस्थिति कम हो सकती है। हालांकि, रेटिनॉल एक प्रभावशाली इंग्रीडिएंट है और शुरुआत में त्वचा पर जलन, रूखापन या इरिटेशन पैदा कर सकता है। इसलिए इसे इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। शुरुआत कम मात्रा और कम बार इस्तेमाल से करें। अगर आपकी त्वचा पहले से कटी-फटी या इरिटेटेड है, तो इसका इस्तेमाल न करें। गर्भवती महिलाओं को भी रेटिनॉल से बचना चाहिए।

2. गर्दन की त्वचा को मॉइश्चराइज रखने के लिए लगाएं हायलूरोनिक एसिड



त्वचा में नमी की कमी होने पर फाइन लाइंस ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकती हैं। गर्दन की स्किन को मुलायम और स्मूद बनाए रखने के लिए हायलूरोनिक एसिड युक्त सीरम या मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। हायलूरोनिक एसिड त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है। इससे रूखी त्वचा को हाइड्रेशन मिलता है और वह पहले की तुलना में अधिक मुलायम दिखाई दे सकती है। अगर गर्दन की स्किन ड्राई रहती है, तो ऐसे सीरम और मॉइश्चराइजर चुनें जिनमें यह इंग्रीडिएंट मौजूद हो। बेहतर हाइड्रेशन के लिए मॉइश्चराइजर को हल्की गीली त्वचा पर लगाएं। इससे त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है और गर्दन की स्किन ज्यादा आरामदायक तथा मुलायम महसूस होती है।

3. चेहरे के साथ गर्दन पर भी लगाएं सनस्क्रीन

अक्सर लोग घर से बाहर निकलते समय चेहरे पर तो सनस्क्रीन लगा लेते हैं, लेकिन गर्दन को भूल जाते हैं। यह आदत त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है, क्योंकि गर्दन भी सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आती है। सूरज की अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें त्वचा में मौजूद कोलेजन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे त्वचा की कसावट प्रभावित होती है और समय से पहले झुर्रियां तथा फाइन लाइंस नजर आने लगती हैं। इसलिए रोजाना चेहरे के साथ गर्दन पर भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। डर्मेटोलॉजिस्ट ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं, जिसका SPF 30 या उससे अधिक हो। इसे गर्दन के सामने और पीछे के हिस्से पर भी लगाएं, ताकि त्वचा को धूप से बेहतर सुरक्षा मिल सके।

4. गर्दन को स्ट्रेच करें और अपने पोश्चर में सुधार लाएं

अगर आप दिनभर मोबाइल या कंप्यूटर पर काम करते हैं और इस दौरान गर्दन झुकाकर रखते हैं, तो इससे गर्दन पर लगातार दबाव पड़ सकता है। लंबे समय तक एक ही पोजिशन में रहने से टेक नेक की समस्या बढ़ सकती है और गर्दन पर हॉरिजॉन्टल लाइनें अधिक स्पष्ट हो सकती हैं।इससे बचने के लिए काम के बीच-बीच में ब्रेक लें और गर्दन को आराम दें। हल्की स्ट्रेचिंग और गर्दन की मोबिलिटी से मांसपेशियों की अकड़न कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही मोबाइल और कंप्यूटर इस्तेमाल करते समय अपनी गर्दन को बहुत ज्यादा नीचे झुकाने से बचें।सही पोश्चर बनाए रखने और नियमित रूप से गर्दन को आराम देने से गर्दन पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव को कम किया जा सकता है। हालांकि, स्ट्रेचिंग को झुर्रियां मिटाने या ढीली त्वचा को कसने का पक्का उपाय नहीं मानना चाहिए।