दुनियाभर में घूमने-फिरने के शौकीन लोग हमेशा ऐसी जगहों की तलाश में रहते हैं जहाँ भीड़-भाड़ कम हो और जहाँ जाकर मन को सुकून मिले। चकराता एक ऐसी ही जगह है जो अपनी शांति और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। बहुत से लोग अपनी छुट्टियों का मजा लेने के लिए पहाड़ों का रुख करते हैं। उत्तराखंड का चकराता हिल स्टेशन उन्हीं चुनिंदा जगहों में शामिल है जो आज भी बहुत शांत है। लेकिन यहाँ जाने से पहले एक अहम बात का पता होना बहुत जरूरी है। इस जगह पर विदेशी सैलानियों के जाने पर रोक लगी हुई है। ये खबर सुनकर बहुत से लोगों को हैरानी हो सकती है कि आखिर इतनी सुंदर जगह पर विदेशी लोग क्यों नहीं जा सकते।
सेना के नियंत्रण वाला इलाका
चकराता को लेकर जो सबसे बड़ी बात है वो ये है कि ये कोई आम टूरिस्ट स्पॉट नहीं है। ये असल में सेना के नियंत्रण में आने वाला एक कैंटोनमेंट एरिया है। इसी वजह से यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था बहुत ही कड़ी रखी जाती है। सेना के इस इलाके में सुरक्षा कारणों को सबसे ऊपर रखा जाता है। यही वो मुख्य वजह है जिसकी वजह से विदेशी नागरिकों की एंट्री यहाँ पूरी तरह बंद कर दी गई है। चकराता में सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही घूमने और यहाँ का नजारा देखने की इजाजत मिलती है। सेना के कड़े नियमों की वजह से यहाँ बाहर के देशों से आने वाले लोग अपनी मर्जी से नहीं घूम सकते।
हाई सिक्योरिटी जोन की पाबंदियां
देहरादून से चकराता की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। पहाड़ों के बीच बसा ये खूबसूरत इलाका एक हाई सिक्योरिटी जोन माना जाता है। यहाँ सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जाता। उत्तराखंड पर्यटन की जानकारी के मुताबिक विदेशी पर्यटकों के लिए एक सीमा तय की गई है। विदेशी लोग सिर्फ कालसी तक ही जा सकते हैं। कालसी के आगे जाने के लिए विदेशी सैलानियों को सेना से एक विशेष इजाजत लेनी पड़ती है। बिना इस खास अनुमति के कोई भी विदेशी नागरिक चकराता की सीमा के अंदर कदम नहीं रख सकता। ये नियम यहाँ की सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए ही बनाए गए हैं।
चकराता की अनछुआ सुंदरता
भले ही यहाँ विदेशी लोगों के आने पर रोक लगी है, लेकिन इसकी वजह से यहाँ का नजारा आज भी बहुत शुद्ध और साफ बना हुआ है। यहाँ घने देवदार के जंगल और ठंडा मौसम सैलानियों का दिल जीत लेता है। चकराता का माहौल बहुत ही शांत रहता है जिससे यहाँ आने वाले लोगों को एक अलग ही अहसास होता है। जो लोग ऋषिकेश और देहरादून की भीड़ से दूर जाना चाहते हैं, उनके लिए ये जगह सबसे अच्छा रास्ता है। यहाँ का वातावरण इतना सुकून भरा है कि लोग यहाँ घंटों बैठकर प्रकृति का आनंद ले सकते हैं।
टाइगर फॉल्स का बड़ा आकर्षण
चकराता के पास ही यहाँ का सबसे मशहूर झरना स्थित है जिसे टाइगर फॉल्स कहा जाता है। ये झरना करीब 50 मीटर की ऊँचाई से गिरता है और इसका नजारा बहुत ही शानदार होता है। यहाँ आने वाले पर्यटक टाइगर फॉल्स को देखना कभी नहीं भूलते। ये जगह पिकनिक मनाने, ट्रैकिंग करने और फोटोग्राफी के लिए बहुत ही मशहूर है। पहाड़ों के बीच से गिरते पानी की आवाज और चारों तरफ की हरियाली यहाँ आने वाले लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है। चकराता आने वाले भारतीय सैलानियों के लिए ये एक सबसे पसंदीदा जगह है।
भीड़ से दूर एक सुकून भरी जगह
आजकल के समय में जहाँ ज्यादातर हिल स्टेशन भीड़ से भर गए हैं, वहीं चकराता आज भी अपनी शांति बचाए हुए है। यहाँ आने वाले ट्रेवलर अक्सर अपने अनुभव साझा करते हैं और बताते हैं कि ये जगह देहरादून और ऋषिकेश के पास होने के बावजूद बहुत अलग है। यहाँ वो शोर-शराबा नहीं मिलता जो अक्सर बड़े टूरिस्ट स्पॉट्स पर देखने को मिलता है। यही वजह है कि सुकून की तलाश करने वाले लोग चकराता को अपनी पहली पसंद बनाते हैं। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य आज भी वैसा ही है जैसा बरसों पहले था।
सुरक्षा और पर्यटन का तालमेल
अगर आसान शब्दों में समझा जाए तो चकराता देश के उन खास हिस्सों में से एक है जहाँ सुरक्षा सबसे पहले आती है। सुरक्षा कारणों से लगाए गए इन प्रतिबंधों की वजह से ही यहाँ का सौंदर्य आज भी पूरी तरह सुरक्षित है। विदेशी नागरिकों के लिए भले ही यहाँ आना मुश्किल हो, लेकिन भारतीय सैलानियों के लिए ये किसी जन्नत से कम नहीं है। चकराता की खूबसूरती और यहाँ के नियम ही इसे भारत के दूसरे हिल स्टेशनों से अलग और खास बनाते हैं। यहाँ की हरियाली और ठंडी हवाएं हर किसी को अपना दीवाना बना लेती हैं।