5 ऐसे आयुर्वेदिक पैक जो ऐक्ने से दिलाते हैं राहत, नीम, मुलतानी मिट्टी जैसे सस्ते विकल्प आएंगे काम
ऐक्ने आया नहीं कि आप परेशान होकर नए नए केमिकल प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने ही लगते हैं। लेकिन संभव है कि इन प्रोडक्ट्स का आपकी त्वचा पर बुरा असर पड़े। लेकिन आयुर्वेद आपको सुरक्षित उपचार देता है। कुछ ऐसे आयुर्वेदिक पैक हैं जिन्हें आप आसानी से घर पर ही तैयार कर सकते हैं। इनको लगाने से ऐक्ने की समस्या दूर होती है और त्वचा को निखार मिलता है। ऐक्ने की समस्या केवल टीनेजर्स की नहीं रही। धूल, प्रदूषण, केमिकल वाले कॉस्मेटिक का इस्तेमाल अब हर उम्र के व्यक्ति को ऐक्ने दे रहा है। ऐक्ने आने पर क्रीम लगाने से संभव है कि कुछ दिन के लिए राहत मिल जाए। लेकिन इसका जड़ से उपचार चाहते हैं तो आपको अपने ऐक्ने के पीछे के कारण को समझना होगा और आयुर्वेद के कुछ नुस्खें अपनाने होंगे। जानिए पांच ऐसे आयुर्वेदिक पैक के बारे में जो आपको ऐक्ने से लंबे समय तक के लिए निजात दे सकते हैं।

ऐक्ने के पीछे का कारणआयुर्वेद के मुताबिक शरीर वात, पित्त और कफ से बना होता है। पित्त दोष और रक्त धातु यानी ब्लड टिशू के असंतुलित हो जाने पर ऐक्ने की समस्या होती है। आयुर्वेद में इसे मुखदुशिका या युवान पिडका कहते हैं। दरअसल त्वचा में सिबेशयस ग्लैंड होती हैं जो प्राकृतिक तेल बनाती हैं जिसे सीबम कहते हैं। लेकिन हॉर्मोन के असंंतुलित होने पर सीबम ज्यादा बनने लगता है। त्वचा पर मौजूद डेड स्किन सेल इस सीबम के साथ मिलकर पोर्स को बंद कर देते हैं। इस कारण बैक्टीरिया पनपना शरू हो जाते हैं, नजीते कै तौर पर ऐक्ने की समस्या सामने आती है। हॉर्मोन का असंतुलन किशोरावस्था, माहवारी या पीसीओडी जैसी स्थितियों में होता है।
ऐक्ने वाली त्वचा का यूं ख्याल रखें
तो इसलिए बढ़ता है ऐक्नेदबाने से : यह गलती अक्सर लोग करते हैं। ऐक्ने आने पर उसे दबाने से बैक्टीरिया को त्वचा के और भीतर जाने और फैलने का मौका मिल जाता है। इससे ऐक्ने चेहरे पर और भी जगह आने लगता है। साथ ही ऐक्ने के निशान की समस्या भी होती है।
नींद कम लेने से : कम नींद तनाव का कारण बनती है। इससे शरीर में कॉर्टिसॉल हॉर्मोन का स्राव होता है जो ऑयल ग्लैंड का काम और तेज कर देता है और ऐक्ने की समस्या बढ़ जाती है।
अस्वस्थ भोजन से : बहुत तला भोजन, मसालेदार खाना, फास्ट फूड, रिफाइन शुगर और डेरी प्रोडक्ट खाने से पित्त दोष बढ़ता है और ऐक्ने की समस्या सामने आती है।
कॉस्मेटिक : त्वचा पर बहुत केमिकल वाले कॉस्मेटिक लगाने या मेकअप करने से पोर्स बंद हो जाते हैं। वहीं अगर आप मेकअप लगाकर सो जाते हैं तो यह ऐक्ने को सीधा निमंत्रण देने जैसा है।
खराब हाइजीन : अगर आपकी तकिया का कवर साफ नहीं है या फोन की स्क्रीन गंदी रहती है तो इसका सीधा संपर्क आपके चेहरे से होता है। इनकी गंदगी आपके चेहरे पर लगती है और चेहरे पर बैक्टीरिया फैलने लगते हैं।
ऐक्ने से निजात दिलाते ये 5 आयुर्वेदिक पैकआयुर्वेद के खजाने में ऐसी जड़ी बूटियां मौजूद हैं जो त्वचा के इंफ्लेमेशन को कम करती हैं, एंटी बैक्टीरिया का काम करती हैं और रक्त को साफ करती हैं। ऐसी ही सामग्री से तैयार करें आयुर्वेदिक पैक जो आपको ऐक्ने की समस्या से निजात दिलाएंगे :
1- नीम और हल्दी का पैकनीम का आयुर्वेद में विशेष महत्व है। इसमें ऐंटी बायोटिक गुण होते हैं जो चेहरे के बैक्टीरिया को खत्म करते हैं। वहीं हल्दी में इंफ्लेमेशन कम करने की क्षमता होती है।
यूं तैयार करें : नीम की ताजी पत्तियां लेकर साफ करें और पीसकर पेस्ट बना लें। आप इसकी जगह नीम का पाउडर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें आधा चम्मच हल्दी डालें और थोड़ा गुलाब जल डालकर मिला लें।
ऐसे लगाएं : इसे साफ चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के बाद धो दें। सप्ताह में ऐसा दो बार करने से ऐक्ने आने की समस्या से राहत मिलती है।
2- चंदन और लाल चंदन का पैकचंदन में ठंडक देने वाले गुण होते हैं जो शरीर के पित्त दोष को शांत करते हैं। इनको लगाने से त्वचा की जलन से तुरंत राहत मिलती है। वहीं लाल चंदन ऐक्ने को दूर करने के लिए जाना जाता है।
यूं तैयार करें : एक चम्मच पीला चंदन और एक चंम्मच लाल चंदन लें और इसे गुलाब जल या खीरे के जूस के साथ मलाकर लगाएं।
ऐसे लगाएं : पैक को साफ चेहरे पर अच्छी तरह लगाएं। यह पैक खास तौर पर ऑयली स्किन वालों के लिए है।
3- मुलतानी मिट्टी और पुदीना पैकमुलतानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त ऑयल को एब्जॉर्ब कर लेती है। वहीं पुदीना में सैलेसेलिक ऐसिड होता है जो ऐक्ने को जल्द सुखा देता है।
यूं तैयार करें :एक चम्मच मुलतानी मिट्टी में पुदीना की ताजा पत्तियों का दो चम्मच रस डालें। इसे अच्छे से मिलाकर पेस्ट बनाएं।
ऐसे लगाएं : साफ चेहरे पर लगाकर 10 से 12 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से धोएं।
4- ऐलोवेरा और टी ट्री ऑयल पैकऐलोवेरा त्वचा का हाइड्रेट करके उसे राहत देता है। वहीं टी ट्री ऑयल ऐक्ने बनाने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने का काम करता है।
यूं तैयार करें : 2 चम्मच ऐलोवेरा जेल लें और उसमें टी ट्री ऐसेंशियल ऑयल की केवल 2 बूंदें मिलाएं।
ऐसे लगाएं : इस पेस्ट को चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाएं और धो लें। इसे आप रात में सोने से पहले भी लगा सकते हैं।
5- त्रिफला और शहद का पैकत्रिफला में आंवला, हरड़ और बहेड़ा होता है जो एंटीऑक्सिडेंट का काम करते हैं। शहद त्वचा को नमी देने के साथ संक्रमण भी दूर करता है। इस पेस्ट से चेहरे के पोर्स गहराई से साफ होते हैं।
यूं तैयार करें : एक चम्मच त्रिफला में एक चम्मच शहद मिलाएं और पेस्ट बनाएं।
ऐसे लगाएं : इसे चेहरे पर 15 मिनट लगाकर गुनगुने पानी से धो लें।
ऐक्ने को जड़ से सही करने के लिए आयुर्वेद में विरेचना और लीच थेरेपी जैसे पंचकर्मा उपचार हैं। विरेचना से शरीर डीटॉक्स होता है और पित्त दोष दूर होता है। अगर ऐक्ने की समस्या बहुत ज्यादा है तो लीच थेरेपी का सहारा लिया जाता है। इसमें चेहरे पर समस्या वाली जगह पर लीच के जरिए गंदगी को बाहर निकाला जाता है। आयुर्वेद मानता है कि ऐक्ने की पीछे हमारे शरीर की भीतरी बदलाव ज्यादा जिम्मेदार होते हैं। इसलिए फेस पैक जैसे बाहरी तत्वों के अलावा शरीर को अंदर से भी दुरुस्त करने की जरूरत है। पाचन में समस्या होने पर अमा बढ़ता है जो एक तरह का कचरा है। इसलिए कोशिश करें कि आपको कब्ज न होने पाए। ऐसा होने पर समय रहते उपचार कराएं और इससे बचने के लिए रोजाना हरी सब्जियों और फलों का सेवन करें। अगर ऐक्ने की समस्या बढ़ती है तो डॉक्टर को दिखाने से परहेज न करें।
ऐक्ने के पीछे का कारणआयुर्वेद के मुताबिक शरीर वात, पित्त और कफ से बना होता है। पित्त दोष और रक्त धातु यानी ब्लड टिशू के असंतुलित हो जाने पर ऐक्ने की समस्या होती है। आयुर्वेद में इसे मुखदुशिका या युवान पिडका कहते हैं। दरअसल त्वचा में सिबेशयस ग्लैंड होती हैं जो प्राकृतिक तेल बनाती हैं जिसे सीबम कहते हैं। लेकिन हॉर्मोन के असंंतुलित होने पर सीबम ज्यादा बनने लगता है। त्वचा पर मौजूद डेड स्किन सेल इस सीबम के साथ मिलकर पोर्स को बंद कर देते हैं। इस कारण बैक्टीरिया पनपना शरू हो जाते हैं, नजीते कै तौर पर ऐक्ने की समस्या सामने आती है। हॉर्मोन का असंतुलन किशोरावस्था, माहवारी या पीसीओडी जैसी स्थितियों में होता है।
ऐक्ने वाली त्वचा का यूं ख्याल रखें
- आयुर्वेदिक या केमिकल फ्री फेसवॉश का इस्तेमाल करके दिन में दो बार मुंह धोएं। फेसवॉश आपके चेहरे के लिए जेंटल होना चाहिए।
- ऑयली स्किन होने के बाद भी मॉश्चराइजर लगाना न भूलें। वॉटर बेस या जेल बेस ऐसे मॉश्चराइजर इस्तेमाल करें जो पोर्स को बंद न करते हों।
- यूवी किरणें पड़ने पर ऐक्ने के निशान और भी गहरे हो जाते हैं। इसलिए सनस्क्रीन लगाना न भूलें।
- शरीर से टॉक्सिन्स निकालने के लिए पर्याप्त पानी पीते रहें।
तो इसलिए बढ़ता है ऐक्नेदबाने से : यह गलती अक्सर लोग करते हैं। ऐक्ने आने पर उसे दबाने से बैक्टीरिया को त्वचा के और भीतर जाने और फैलने का मौका मिल जाता है। इससे ऐक्ने चेहरे पर और भी जगह आने लगता है। साथ ही ऐक्ने के निशान की समस्या भी होती है।
नींद कम लेने से : कम नींद तनाव का कारण बनती है। इससे शरीर में कॉर्टिसॉल हॉर्मोन का स्राव होता है जो ऑयल ग्लैंड का काम और तेज कर देता है और ऐक्ने की समस्या बढ़ जाती है।
अस्वस्थ भोजन से : बहुत तला भोजन, मसालेदार खाना, फास्ट फूड, रिफाइन शुगर और डेरी प्रोडक्ट खाने से पित्त दोष बढ़ता है और ऐक्ने की समस्या सामने आती है।
कॉस्मेटिक : त्वचा पर बहुत केमिकल वाले कॉस्मेटिक लगाने या मेकअप करने से पोर्स बंद हो जाते हैं। वहीं अगर आप मेकअप लगाकर सो जाते हैं तो यह ऐक्ने को सीधा निमंत्रण देने जैसा है।
खराब हाइजीन : अगर आपकी तकिया का कवर साफ नहीं है या फोन की स्क्रीन गंदी रहती है तो इसका सीधा संपर्क आपके चेहरे से होता है। इनकी गंदगी आपके चेहरे पर लगती है और चेहरे पर बैक्टीरिया फैलने लगते हैं।
ऐक्ने से निजात दिलाते ये 5 आयुर्वेदिक पैकआयुर्वेद के खजाने में ऐसी जड़ी बूटियां मौजूद हैं जो त्वचा के इंफ्लेमेशन को कम करती हैं, एंटी बैक्टीरिया का काम करती हैं और रक्त को साफ करती हैं। ऐसी ही सामग्री से तैयार करें आयुर्वेदिक पैक जो आपको ऐक्ने की समस्या से निजात दिलाएंगे :
1- नीम और हल्दी का पैकनीम का आयुर्वेद में विशेष महत्व है। इसमें ऐंटी बायोटिक गुण होते हैं जो चेहरे के बैक्टीरिया को खत्म करते हैं। वहीं हल्दी में इंफ्लेमेशन कम करने की क्षमता होती है।
यूं तैयार करें : नीम की ताजी पत्तियां लेकर साफ करें और पीसकर पेस्ट बना लें। आप इसकी जगह नीम का पाउडर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें आधा चम्मच हल्दी डालें और थोड़ा गुलाब जल डालकर मिला लें।
ऐसे लगाएं : इसे साफ चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट के बाद धो दें। सप्ताह में ऐसा दो बार करने से ऐक्ने आने की समस्या से राहत मिलती है।
2- चंदन और लाल चंदन का पैकचंदन में ठंडक देने वाले गुण होते हैं जो शरीर के पित्त दोष को शांत करते हैं। इनको लगाने से त्वचा की जलन से तुरंत राहत मिलती है। वहीं लाल चंदन ऐक्ने को दूर करने के लिए जाना जाता है।
यूं तैयार करें : एक चम्मच पीला चंदन और एक चंम्मच लाल चंदन लें और इसे गुलाब जल या खीरे के जूस के साथ मलाकर लगाएं।
ऐसे लगाएं : पैक को साफ चेहरे पर अच्छी तरह लगाएं। यह पैक खास तौर पर ऑयली स्किन वालों के लिए है।
3- मुलतानी मिट्टी और पुदीना पैकमुलतानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त ऑयल को एब्जॉर्ब कर लेती है। वहीं पुदीना में सैलेसेलिक ऐसिड होता है जो ऐक्ने को जल्द सुखा देता है।
यूं तैयार करें :
ऐसे लगाएं : साफ चेहरे पर लगाकर 10 से 12 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से धोएं।
4- ऐलोवेरा और टी ट्री ऑयल पैकऐलोवेरा त्वचा का हाइड्रेट करके उसे राहत देता है। वहीं टी ट्री ऑयल ऐक्ने बनाने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने का काम करता है।
यूं तैयार करें : 2 चम्मच ऐलोवेरा जेल लें और उसमें टी ट्री ऐसेंशियल ऑयल की केवल 2 बूंदें मिलाएं।
ऐसे लगाएं : इस पेस्ट को चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाएं और धो लें। इसे आप रात में सोने से पहले भी लगा सकते हैं।
5- त्रिफला और शहद का पैकत्रिफला में आंवला, हरड़ और बहेड़ा होता है जो एंटीऑक्सिडेंट का काम करते हैं। शहद त्वचा को नमी देने के साथ संक्रमण भी दूर करता है। इस पेस्ट से चेहरे के पोर्स गहराई से साफ होते हैं।
यूं तैयार करें : एक चम्मच त्रिफला में एक चम्मच शहद मिलाएं और पेस्ट बनाएं।
ऐसे लगाएं : इसे चेहरे पर 15 मिनट लगाकर गुनगुने पानी से धो लें।
ऐक्ने को जड़ से सही करने के लिए आयुर्वेद में विरेचना और लीच थेरेपी जैसे पंचकर्मा उपचार हैं। विरेचना से शरीर डीटॉक्स होता है और पित्त दोष दूर होता है। अगर ऐक्ने की समस्या बहुत ज्यादा है तो लीच थेरेपी का सहारा लिया जाता है। इसमें चेहरे पर समस्या वाली जगह पर लीच के जरिए गंदगी को बाहर निकाला जाता है। आयुर्वेद मानता है कि ऐक्ने की पीछे हमारे शरीर की भीतरी बदलाव ज्यादा जिम्मेदार होते हैं। इसलिए फेस पैक जैसे बाहरी तत्वों के अलावा शरीर को अंदर से भी दुरुस्त करने की जरूरत है। पाचन में समस्या होने पर अमा बढ़ता है जो एक तरह का कचरा है। इसलिए कोशिश करें कि आपको कब्ज न होने पाए। ऐसा होने पर समय रहते उपचार कराएं और इससे बचने के लिए रोजाना हरी सब्जियों और फलों का सेवन करें। अगर ऐक्ने की समस्या बढ़ती है तो डॉक्टर को दिखाने से परहेज न करें।
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