'ये मर्दवादी समाज लड़कियों के लिए खतरनाक है... हमारे अंदर पशुता है', नरेश सक्सेना ने दिखाया समाज को आईना
हमारी सोसाइटी में लड़कियों की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर लंबे समय से बहस होती आ रही है। फिर चाहे रिश्ते में चुनाव की बात हो, या फिर अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने की। जब भी लड़कियों के खिलाफ होने वाली घटनाओं की चर्चा होती है, तो इसका सॉल्यूशन अक्सर यही निकाला जाता है कि उनकी आवाजाही, कपड़ों या लाइफस्टाइल पर ज्यादा से ज्यादा पाबंदियां लगा दिए जाएं।
इसी विषय पर मशहूर कवि नरेश सक्सेना का एक अलग नजरिया है, जो आम सोच से काफी अलग है। कवि का मानना है कि लड़कियों पर पाबंदियां लगाने के बजाय समाज को लड़कों पर रोक लगाने के बारे में सोचना चाहिए। एक इंटरव्यू में उन्होंने लड़कों पर कर्फ्यू लगाने की बात कही है। अब आप सोच रहे होंगे कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा? तो आइए जानते हैं उनके इस बयान के पीछे का तर्क क्या था।

लड़कियों की नहीं, सारी समस्या सोच की है
नरेश सक्सेना कहते हैं कि हमारा समाज पुरुषवादी है। ऐसे कई लोग हैं जो सामने दिखने वाली लड़की को जानते तक नहीं हैं, फिर भी उसके बाहर निकलने, रहने के तरीके और उसके फैसलों पर सवाल उठाने लगते हैं। उनके अनुसार यह मेंटालिटी उस सोच से जुड़ी है कि ताकतवर आदमी कमजोर को कंट्रोल कर सकता है। इसलिए ऐसी सोच वाले लोग महिलाओं की स्वतंत्रता को अपने काबू में रखना चाहते हैं। यानी वे चाहते हैं कि महिलाएं वही करें, जो यह पुरुष प्रधान समाज उन्हें करने के लिए कहे।
सुरक्षा के नाम पर लगाई जाती हैं पाबंदियां
लड़कियों के ऊपर लगाए जाने वाली पाबंदियों को बहुत खूबसूरत तरीके से एक्सप्लेन करते हुए नरेश सक्सेना ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर सारे नियम उन्हीं पर थोप दिए जाते हैं। उन्हें जल्दी घर लौटने के लिए कहा जाता है, कुछ जगहों पर न जाने की सलाह दी जाती है और उनके बातचीत करने के तरीके को भी बदलने के लिए कहा जाता है।लेकिन समाज यह बात भूल जाता है कि लड़कियों पर पाबंदियां लगाने से उन लोगों की सोच नहीं बदलती, जो महिलाओं को असुरक्षित महसूस कराने के लिए जिम्मेदार हैं।
इसी विषय पर मशहूर कवि नरेश सक्सेना का एक अलग नजरिया है, जो आम सोच से काफी अलग है। कवि का मानना है कि लड़कियों पर पाबंदियां लगाने के बजाय समाज को लड़कों पर रोक लगाने के बारे में सोचना चाहिए। एक इंटरव्यू में उन्होंने लड़कों पर कर्फ्यू लगाने की बात कही है। अब आप सोच रहे होंगे कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा? तो आइए जानते हैं उनके इस बयान के पीछे का तर्क क्या था।
लड़कियों की नहीं, सारी समस्या सोच की है
नरेश सक्सेना कहते हैं कि हमारा समाज पुरुषवादी है। ऐसे कई लोग हैं जो सामने दिखने वाली लड़की को जानते तक नहीं हैं, फिर भी उसके बाहर निकलने, रहने के तरीके और उसके फैसलों पर सवाल उठाने लगते हैं। उनके अनुसार यह मेंटालिटी उस सोच से जुड़ी है कि ताकतवर आदमी कमजोर को कंट्रोल कर सकता है। इसलिए ऐसी सोच वाले लोग महिलाओं की स्वतंत्रता को अपने काबू में रखना चाहते हैं। यानी वे चाहते हैं कि महिलाएं वही करें, जो यह पुरुष प्रधान समाज उन्हें करने के लिए कहे।
सुरक्षा के नाम पर लगाई जाती हैं पाबंदियां
लड़कियों के ऊपर लगाए जाने वाली पाबंदियों को बहुत खूबसूरत तरीके से एक्सप्लेन करते हुए नरेश सक्सेना ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर सारे नियम उन्हीं पर थोप दिए जाते हैं। उन्हें जल्दी घर लौटने के लिए कहा जाता है, कुछ जगहों पर न जाने की सलाह दी जाती है और उनके बातचीत करने के तरीके को भी बदलने के लिए कहा जाता है।लेकिन समाज यह बात भूल जाता है कि लड़कियों पर पाबंदियां लगाने से उन लोगों की सोच नहीं बदलती, जो महिलाओं को असुरक्षित महसूस कराने के लिए जिम्मेदार हैं।
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