हर पिता बच्चे से कभी न कहें ये 3 बातें, वरना वह आपके सामने भले ही मुस्कुराए, लेकिन दिल से आपसे दूर हो जाएगा

Newspoint
Newspoint
टीनएज ऐसा दौर होता है, जब माता-पिता और बच्चों के बीच गलतफहमियां बढ़ने लगती हैं। एक तरफ माता-पिता को लगता है कि बच्चा उनकी बात नहीं समझ रहा, तो दूसरी तरफ टीनएजर को महसूस होता है कि उसके माता-पिता उसकी फील‍िंग्‍स और परेशान‍ियों को समझ ही नहीं रहे। ऐसे में छोटी-छोटी बहसें धीरे-धीरे रिश्ते में दूरियां पैदा करने लगती हैं। कई बार गुस्से या झुंझलाहट में पिता कुछ ऐसी बातें कह देते हैं, जो बच्चे के दिल को गहराई से चोट पहुंचाती हैं। ऐसे में बाहर से वह भले ही आपके सामने मुस्कुराता रहे, लेकिन अंदर ही द‍िल ही दि‍ल में वह आपसे दूरी बनाने लगता है। पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा ने ऐसी ही 3 बातों के बारे में बताया है, जिन्हें हर पिता को अपने टीनएजर बच्चे से कहने से बचना चाहिए।
Newspoint
Hero Image
पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा कहती हैं कि टीनएजर बच्चों से तीन बातें ऐसी हैं, जो हर पिता को बिल्कुल नहीं कहनी चाहिए। इनमें पहली बात है-, ‘हमारे जमाने में तो…उनके मुताबिक, जैसे ही कोई टीनएजर बस इस तरह का डायलॉग सुनता है, उसका ब्रेन आपसे दूर होने लगता है। उसे महसूस होता है कि आप उसकी मौजूदा परिस्थितियों और चुनौतियों को नहीं समझ रहे हैं। इससे दोनों के बीच कम्युनिकेशन कमजोर पड़ने लगता है। एक्‍सपर्ट कहती हैं कि इसकी जगह हर पिता को कहना चाहिए, ‘मैं समझ सकता हूं कि तुम्हारा प्रेशर मेरे समय से बहुत अलग और शायद ज्‍यादा मुश्किल है। क्या तुम मुझे समझाओगे कि तुम्हारी असली परेशानी क्या है?’ इससे बच्चे को महूसस होता है कि उसकी बात सुनी और समझी जा रही है, जिससे वह खुलकर अपनी बात कहने में सहज महसूस करता है।
Newspoint
पेरेंटिंग कोच आगे बताती हैं क‍ि दूसरी बात जो पिता को अपने टीनएजर बच्चे से नहीं कहनी चाहिए, वह है-’तुम्हें किस बात का स्ट्रेस है? हमने सब कुछ तो तुम्‍हें दिला रखा है।’ उनका कहना है कि ऐसा कहने से बच्चा गिल्टी महसूस करने लगता है। उसे लगता है कि उसकी परेशानियों और इमोशन्स की कोई अहमियत नहीं है। धीरे-धीरे वह अपनी बातें और फील‍िंग्‍स माता-पिता के साथ शेयर करना भी कम कर देता है। इसील‍िए इसकी बजाय पिता को कहना चाहिए, ‘मैं देख रहा हूं कि तुम परेशान हो। हो सकता है मैं तुम्हारी समस्या को पूरी तरह न समझ पाऊं, लेकिन मैं तुम्हारे साथ हूं। बताओ, क्या बात है?’ ऐसे शब्द बच्चे के मन में भरोसा पैदा करते हैं कि उसे महसूस होता है क‍ि पेरेंट्स उसका साथ देना चाहते हैं।
Newspoint